ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 13 दिसम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 13 दिसम्बर 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *
दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है । *शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
*शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। *शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल*
👸🏻 शिवराज शक 352
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शनिवार पौष माह के कृष्ण पक्ष नवमी तिथि 04:38 PM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त पूर्ण रात्रि तक
🪐 नक्षत्र स्वामी – हस्त नक्षत्र के स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं, लेकिन इसके अधिष्ठाता देवता सवितृ (सूर्य देव का एक रूप) हैं, जो रचनात्मकता और जीवन शक्ति का प्रतीक हैं।
⚜️ योग – आयुष्मान योग 11:16 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
प्रथम करण : गर – 04:37 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 05:40 ए एम, दिसम्बर 14 तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:41:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:08:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:16 ए एम से 06:10 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:43 ए एम से 07:05 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:55 ए एम से 12:36 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:59 पी एम से 02:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:23 पी एम से 05:50 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:26 पी एम से 06:48 पी एम
💧 अमृत काल : 01:41 ए एम, दिसम्बर 14 से 03:27 ए एम, दिसम्बर 14
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:48 पी एम से 12:43 ए एम, दिसम्बर 14
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – महाराज छत्रसाल परमधाम दिवस, भारतीय वकिल कमल नारायण सिंह जन्म दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी श्रीधर पुरुषोत्तम उर्फ शिरूभाऊ लिमये स्मृति दिवस, अर्थशास्त्री लक्ष्मी चंद्र जैन जन्म दिवस, मनोवैज्ञानिक इलाचन्द्र जोशी जन्म दिवस, अभिनेत्री सुष्मिता पाटिल स्मृति दिवस, गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर जन्म दिवस, राष्ट्रीय कोको दिवस, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सेंट लूसी दिवस (ईसाई पर्व), राष्ट्रीय अश्व दिवस, चीन में नानजिंग नरसंहार स्मृति दिवस, अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह (08-14 दिसम्बर), हवाई सुरक्षा दिवस (सप्ताह)
✍🏼 *तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है। 🗼 *_Vastu tips* 🗽
आचार्य श्री गोपी राम के मुताबिक, भगवान शिव की मूर्ति उत्तर या उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में रखनी चाहिए। यह दिशा शिव जी की मानी जाती है और इससे घर में सौहार्द और सुख-शांति बनी रहती है। मूर्ति इस प्रकार स्थापित करें कि भगवान शिव का मुख दक्षिण दिशा की ओर रहे। ऐसा करने से घर के हर कोने में पॉजिटिविटी बनी रहती है।
*कैसा हो शिव जी की मूर्ति का आकार घर के मंदिर में बहुत बड़ी मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। वास्तु के अनुसार 5 से 8 इंच की मूर्ति सबसे उचित मानी जाती है। मूर्ति पत्थर, पीतल, क्रिस्टल या पंचधातु की बनी हो तो और बेहतर होता है। ध्यान दें कि शिव जी की मूर्ति शांत और ध्यानमग्न मुद्रा में होनी चाहिए, न कि तांडव मुद्रा में, क्योंकि घर में रखी शिव की तांडव मुद्रा वाली मूर्ति, घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा को अस्थिर बना सकती है। ❇️ *जीवनोपयोगी नुस्खे* ⚜️ जल जाने पर पका केला मसले और लगा दे छाले नहीं पडेंगे *किसी प्रिंटेड या लिखा अखबार पुस्तक आदि मे खाने की चीजें न लपेट कर रखे इसमे प्रयुक्त स्याही सीधा संबंध कैंसर से होता हैं
*सप्ताह मे 2 बार एलोवेरा जेल पानी मे डाल कर गर्म करे फिर इसकी भाप आंखें बंद कर चेहरे पर ले इससे स्किन होती हैं और अंदर तक सफाई हो जाती हैं दाग धब्बे जाते हैं *पीपल्स हो जा पर जीरा मे 2-2 लौंग मिला कर पीस ले इसे पेस्ट जैसा बना ले इसका लेप करे सूख जाय तब धोए नियमित करे पिंपल्स गायब हो जाएंगे
*होंठ गुलाबी बनाये नींबू रस और शहद मिक्स कर पेस्ट बना ले सोते वक़्त ओठों पर लगाकर सो जाय सुबह धों ले नियमित करे सूखे ओंठ मुलायम और गुलाबी हो जाएंगे *नींबू का रस मे प्याज का रस मिला ले फिर दही मे मिलाकर बालों की जड़ों मे मसाज करे नियमित अन्तराल से करने पर बालों का झड़ना बंद हो जाएगा
*नीम की पत्तियों को कुचल कर पानी मे उबालें इसे ठंडा होने पर बाल धोए जुए सब मर जाएंगे 🧋 आरोग्य संजीवनी 🍶
त्रिफला में फायदे इसमें मौजूद तून फलों के कारण हैं। इन तीन फलों के कारण त्रिफला के गुण बढ़ जाते हैं। त्रिफला के लाभ शरीर के साथ-साथ त्वचा और बालों को भी प्राप्त होते हैं। त्रिफला चूर्ण का उपयोग आप कैसे कर सकते हैं से भी जुड़ी जानकारी आप नीचे से प्राप्त कर सकते हैं
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त्रिफला चूर्ण से इम्यूनिटी मजबूत होती है त्रिफला चूर्ण के फायदे इसमें मौजूद तीन सामग्री के कारण है। यह सामग्री है- आंवला, बहेड़ा और हरड़। इन तीनों का मिश्रण इम्युनिटी मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसमें आंवला के फायदे कई सारे हैं क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है जिस कारण यह फ्री रेडिकल से लड़ने में मदद करता है। साथ ही एंटीऑक्सीडेंट इम्युनिटी को मजबूत बनाकर फ्री रेडिकल से बचाव करते हैं। वहीं दूसरी तरफ हरितकी को सफेद ब्लड सेल प्रोड्यूज करने के लिए जाना जाता है जो बाहर से होनी वाली बीमारी से बचाव करता है। विभिताकी, शरीर में से बैक्टीरिया निकालने का काम करता है।
*त्रिफला चूर्ण मूत्र पथ के संक्रमण रोकता है कई बैक्टीरिया ऐसे होते हैं जिन पर दवाई का असर भी नहीं होता है और आखिर में इंसान को बीमार कर देते हैं। मूत्र पथ के इंफेक्शन ऐसे बैक्टीरिया के कारण ही होते हैं जिससे ब्लैडर में सूजन हो जाती है। इस स्थिति में त्रिफला चूर्ण के फायदे आपकी मदद कर सकते हैं। इसका सेवन करने से ऐसे बैक्टीरिया ता जन्म नहीं हो पाता है और यह बैक्टीरिया मर जाते हैं। *त्रिफला चूर्ण के फायदे दर्द में आराम देते हैं त्रिफला में मौजूद हरितकी का सेवन करने से सूजन में आराम मिलता है। जोडों और मांसपेशियों में सूजन में आराम देता है और शरीर में से यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करता है। त्रिफला के फायदे, त्रिफला को पानी में मिलाकर पीने से गठिया, जोडों में दर्द में आराम देता है।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा राज….!!
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अयोध्या के राजा दशरथ एक बार भ्रमण करते हुए वन की ओर निकले वहां उनका समाना बाली से हो गया.
*राजा दशरथ की किसी बात से नाराज हो बाली ने उन्हें युद्ध के लिए चुनोती दी. राजा दशरथ की तीनो रानियों में से कैकयी अश्त्र शस्त्र एवं रथ चालन में पारंगत थी।अतः अक्सर राजा दशरथ जब कभी कही भ्रमण के लिए जाते तो कैकयी को भी अपने साथ ले जाते थे इसलिए कई बार वह युद्ध में राजा दशरथ के साथ होती थी. जब बाली एवं राजा दशरथ के मध्य भयंकर युद्ध चल रहा था उस समय संयोग वश रानी कैकयी भी उनके साथ थी।युद्ध में बाली राजा दशरथ पर भारी पड़ने लगा वह इसलिए क्योकि बाली को यह वरदान प्राप्त था की उसकी दृष्टि यदि किसी पर भी पद जाए तो उसकी आधी शक्ति बाली को प्राप्त हो जाती थी. अतः यह तो निश्चित था की उन दोनों के युद्ध में हार राजा दशरथ की ही होगी।राजा दशरथ के युद्ध हारने पर बाली ने उनके सामने एक शर्त रखी की या तो वे अपनी पत्नी कैकयी को वहां छोड़ जाए या रघुकुल की शान अपना मुकुट यहां पर छोड़ जाए। तब राजा दशरथ को अपना मुकुट वहां छोड़ रानी कैकेयी के साथ वापस अयोध्या लौटना पड़ा। *रानी कैकयी को यह बात बहुत दुखी, आखिर एक स्त्री अपने पति के अपमान को अपने सामने कैसे सह सकती थी. यह बात उन्हें हर पल काटे की तरह चुभने लगी की उनके कारण राजा दशरथ को अपना मुकुट छोड़ना पड़ा।वह राज मुकुट की वापसी की चिंता में रहतीं थीं. जब श्री रामजी के राजतिलक का समय आया तब दशरथ जी व कैकयी को मुकुट को लेकर चर्चा हुई. यह बात तो केवल यही दोनों जानते थे।कैकेयी ने रघुकुल की आन को वापस लाने के लिए श्री राम के वनवास का कलंक अपने ऊपर ले लिया और श्री राम को वन भिजवाया। उन्होंने श्री राम से कहा भी था कि बाली से मुकुट वापस लेकर आना है।श्री राम जी ने जब बाली को मारकर गिरा दिया। उसके बाद उनका बाली के साथ संवाद होने लगा। प्रभु ने अपना परिचय देकर बाली से अपने कुल के शान मुकुट के बारे में पूछा था। तब बाली ने बताया- रावण को मैंने बंदी बनाया था.जब वह भागा तो साथ में छल से वह मुकुट भी लेकर भाग गया. प्रभु मेरे पुत्र को सेवा में ले लें. वह अपने प्राणों की बाजी लगाकर आपका मुकुट लेकर आएगा।जब अंगद श्री राम जी के दूत बनकर रावण की सभा में गए. वहां उन्होंने सभा में अपने पैर जमा दिए बाली और उपस्थित वीरों को अपना पैर हिलाने की चुनौती दी. रावण की सभा मे कोई भी अंगद के पैर को हिला नही पाया. अंत मे रावण खुद आया पर जैसे ही वो झुका उसका मुकुट गिर गया और अंगद उस मुकुट को लेकर श्री राम जी के पास आ गए बाद मे युद्ध मे रावण को मृत्यु प्राप्त हुई. ये है महिमा रघुकुल के मुकुट की
🙏जय श्री राम, 🙏
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⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।
*_आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता हैं।

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