सहकारिता में भ्रष्टाचार का खुलासा, धारा 58-वी/ख के तहत समिति प्रबंधकों से वसूली नहीं कर रहे

सहकारिता, उप पंजीयक, जिला सहकारी बैंक, महाप्रबंधक
हरीश मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार 9584815781
रायसेन । सहकारिता अधिनियम 1960 की धारा 58 (1) के तहत सहायक पंजीयक (अंकेक्षक) सहकारी संस्थाएं, रायसेन ने प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था मर्यादित चिकलोद खुर्द, बाड़ी खुर्द, बगलवाड़ा का अंकेक्षण समिति प्रबंधकों द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड के आधार पर वर्ष 2019-20, 2020-21, और 2021-22 में किया।
इन संस्थाओं में ऑडिट के समय सहकारी निरीक्षक को समिति प्रबंधकों ने जरनल ,लेजर, फर्द बकाया जिसमें ऋण, अंश, ब्याज, अमानत शेष एवं डेड स्टॉक रजिस्टर प्रस्तुत नहीं किए। जिसके कारण संस्था की कैश बुक एवं व्यय पत्रकों का मिलान नहीं किया जा सका। लगातार आपत्तियों के बाद भी समिति प्रबंधक मुख्य पंजी का संधारण नहीं कर रहे, जो इस बात का घोतक है कि समिति प्रबंधकों द्वारा मुख्य पंजी का संधारण जानबूझकर नहीं किया जा रहा एवं जिला सहकारी बैंक महाप्रबंधक द्वारा भी कार्रवाई नहीं की जा रही। जबकि संस्था के कार्यों को संचालित करने हेतु नियमों का पालन आवश्यक है।
लाखों-करोड़ों का आर्थिक नुकसान, घाटा, दस्तावेज से छेड़छाड़, कूट रचना, हेराफेरी की वसूली की क्षतिपूर्ति करने के लिए धारा 58-बी/ख के तहत वसूली करने का अधिकार सहकारिता, उप पंजीयक और जिला सहकारी बैंक महाप्रबंधक को है। लेकिन सहकारिता, उप पंजीयक और जिला सहकारी बैंक, महाप्रबंधक समिति प्रबंधकों से वसूली नहीं कर, संरक्षण देकर, विधि विरुद्ध कृत्य कर, शासन को क्षति पहुंचाने वालों को संरक्षण दे रहे हैं।
नियमानुसार किसी सोसाइटी की संपरीक्षा, जांच, निरीक्षण के दौरान यह पाया जाए कि समिति प्रबंधक ने इस अधिनियम के नियम विरुद्ध कोई भुगतान या कदाचरण किया है या हानि पहुंचाई है। यह अपेक्षा करते हुए आदेश कर सकेगा कि वह ऐसी दर से, संगणित किये गये ब्याज सहित उस धन या संपत्ति या उसके किसी भाग का भुगतान ऐसी सीमा तक करे, जैसी कि सहकारिता, उप पंजीयक और जिला सहकारी बैंक, महाप्रबंधक साम्यपूर्ण समझें।
ज्ञात हो वर्ष 2014 में जिला सहकारी बैंक, मर्यादित, रायसेन एम ई शाखा में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ था, जो प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। घोटाले के मुख्य आरोपी सहकारिता के मठ में धनबल की भेंट देकर पदोन्नति प्राप्त कर पूज्यनीय पद पर प्रतिष्ठित हैं। इस घोटाले का मुख्य कारण यह था कि तत्कालीन सहकारिता, उप पंजीयक और जिला सहकारी बैंक, महाप्रबंधक उस समय भी समिति प्रबंधक को प्रश्रय दे रहे थे और आज भी दे रहे हैं।
*गंभीर वित्तीय आपत्तियां – सहकारी संस्था बाड़ी खुर्द**
**वर्ष 2019-20**
✒️ संस्था द्वारा प्रस्तुत लाभ-हानि पत्र के अनुसार 1,29,498.38 लाख रुपए की हानि हुई है। इस प्रकार संचित हानि 1,45,29,999.18 लाख रुपए हो चुकी है।
✒️ *31-03-2020 की स्थिति में सदस्यों से ब्याज लेनदारी 1,45,65,000.00 रुपए है, जो वसूल नहीं की जा रही।*
✒️ प्रबंध कार्यकारिणी समिति की बैठक नहीं बुलाई जा रही। मनमाने तरीके से सदस्यों से हस्ताक्षर कर लिए जाते हैं।
✒️ *संस्था को 1,29,498.38 लाख रुपए की हानि हुई है।*
✒️ समिति प्रबंधक द्वारा 31 मार्च को वर्षांत पर रोकड़ बही और स्टॉक पंजी बंद नहीं की जाती।
गंभीर वित्तीय आपत्तियां – सहकारी संस्था चिकलोद खुर्द
*वर्ष 2020-21*
✒️ 31-03-2021 को ऋण देना शेष 441.51 लाख रुपए है जबकि सदस्यों से लेना 192.09 लाख रुपए है। इस प्रकार 249.42 लाख रुपए का अंतर है।
✒️ *वर्ष 2021 में शुद्ध हानि 1.48 लाख रुपए होकर संचित हानि 203.93 लाख रुपए हो गई है।*
✒️ संस्था द्वारा जनरल लेजर तैयार नहीं किया जा रहा है, जो गंभीर आपत्तिजनक है।
✒️ *संस्था द्वारा कर्मचारियों का सेवा रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है।*
✒️ ऋण दस्तावेजों का परीक्षण जिला सहकारी बैंक, रायसेन द्वारा नहीं किया जा रहा है, जो घोर लापरवाही है।
✒️ देनदारियां 57,42,454.53 लाख रुपए निकल रही हैं। वसूली की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
✒️ टीडीएस 10,47,815.00 लाख रुपए लेना शेष है। इसे वापस नहीं लिया गया।
✒️ गेहूं खरीदी में 3,20,673.00 लाख रुपए का अतिरिक्त व्यय किया गया।
✒️ 31-03-2021 को संचित हानि 203.93 लाख रुपए हुई।
**वर्ष 2021-22**
✒️ 31-03-2022 की स्थिति में संचित हानि 200.70 लाख रुपए है।
✒️ 31-03-2022 की स्थिति में कुल ऋण 414.34 लाख रुपए सदस्यों से लेना एवं बैंक को कुल ऋण देना शेष 185.60 लाख रुपए है। इस प्रकार अंतर राशि 228.74 लाख रुपए डूबत हैं ।
गंभीर वित्तीय आपत्तियां – सहकारी संस्था बगलवाडा़
वर्ष 2019-20
✒️ संस्था में जनरल लेजर, खुर्द बकाया, ऋण, अंश, ब्याज, अमानत शेष और डेड स्टॉक रजिस्टर, मुख्य पंजी संधारित नहीं हो रही हैं।
✒️ वर्ष 2019-20 में संस्था को 3,26,533.88 लाख रुपए की लेनदारी निकल रही थी, जिसकी वसूली संस्था प्रबंधक द्वारा नहीं की गई।
✒️ वित्तीय पत्रक के अनुसार संस्था को लाभ राशि 46,632.50 और संचित हानि राशि 1,45,29,653.63 लाख है, जो घोर आपत्तिजनक है।
✒️ उपभोक्ताओं को केश क्रेडिट 1,73,927.76 लाख रुपए देना शेष है। लिमिट के विरुद्ध 31/3/19 को उपभोक्ता स्टॉक व्यापारिक पत्रक अनुसार 52,797.63 लाख रुपए शेष हैं। इस प्रकार लिमिट के विरुद्ध 1,21,130.00 लाख रुपए का स्टॉक नहीं है, फिर भी जिला सहकारी बैंक ने नवीनीकरण कर दिया।
✒️ 31/3/20 को केश क्रेडिट खाद 2,920,566.99 लाख रुपए देना शेष था, जबकि स्टॉक पत्रक अनुसार 622,901.46 लाख रुपए शेष हैं। इस प्रकार लिमिट के विरुद्ध 22,97,665.53 लाख रुपए का स्टॉक नहीं था। फिर भी जिला सहकारी बैंक द्वारा नवीनीकरण की स्वीकृति कैसे दी गई?
✒️ 31/3/20 में कुल ऋण 30,396,936.15 रुपए सदस्यों से लेना है एवं बैंक का कुल ऋण देना शेष 35,548,175.70 लाख रुपए है। इस प्रकार अंतर राशि रुपए -5,178,538.85 डूब गया।
*वर्ष 2020-21*
✒️ जिला सहकारी केंद्रीय बैंक वित्त दायी संस्था है। यह संस्था को ऋण उपलब्ध कराती है। शाखा प्रबंधक द्वारा ऋण खाते और दस्तावेजों का परीक्षण नहीं किया जा रहा, जो घोर लापरवाही या मिलीभगत है।
✒️ 31/3/21 को कैश क्रेडिट 29.20 लाख रुपए लिमिट के विरुद्ध खाद का स्टॉक 0.00 था। यह शाखा स्तर पर स्वीकृत लिमिट से अधिक का आहरण इंगित करता है, जिससे स्पष्ट होता है कि शाखा स्तर पर मनमानी तरीके से राशि का भुगतान किया जा रहा है।
✒️ बैंक को ऋण देना शेष 355.48 लाख है, जबकि सदस्यों से लेना 304.00 लाख है। इस प्रकार 51.48 लाख का अंतर है।
*वर्ष 2021-22*
✒️ जनरल लेजर पंजी संस्था प्रबंधक द्वारा तैयार नहीं की जा रही है।
✒️ संस्था के सदस्यों को उनके ऋण खातों की पासबुक जारी नहीं की गई है।
✒️ *अंश पूंजी पंजी तैयार नहीं की गई है।*
✒️ ब्याज रजिस्टर संधारित नहीं किया गया है।
✒️ गेहूं, चावल, शक्कर, केरोसिन एवं शासकीय योजनाओं के अनुसार प्राप्त निशुल्क गेहूं और चावल की प्रविष्टियां संस्था की कैश बुक में दर्ज नहीं की जा रही हैं, जो कि आपत्तिजनक है।
✒️ राज्य शासन एवं केंद्रीय शासन से ब्याज लेना बकाया का रजिस्टर नहीं बनाया गया है, जो विधि विरुद्ध है।
*क्या है नियम*
मध्य प्रदेश सहकारी अधिनियम 1960 की धारा 43 (बी/ख) के अनुसार, यदि किसी वर्ष में संस्था को परिचालन घाटा होता है, तो संचालक मंडल इसके कारणों को साधारण निकाय के समक्ष प्रस्तुत करेगा। साधारण निकाय घाटे के कारणों का परीक्षण करेगा और अपने परीक्षण के आधार पर परिचालन घाटे को सदस्यों से या आरक्षित निधियों से पूरा करेगा।
*क्या हुआ*
संस्थाओं ने धारा 43 (बी/ख) के तहत साधारण निकाय के समक्ष परिचालन घाटे को प्रस्तुत नहीं किया। यह प्रस्तुत न करना समिति प्रबंधकों का नियम विरुद्ध कृत्य है।
.व्यक्तियों के समूह द्वारा समान आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य की प्राप्ति के लिये मिलकर प्रयास करना सहकार कहलाता है। समान उद्देश्य की पूर्ति के लिये कृषकों के द्वारा बनाई गई संस्था को कृषि सहकारी संस्था कहते हैं। ‘सहकारिता’ शब्द की उत्पत्ति दो शब्दों से मिलकर हुई है- सह +कार…”
आपसे इस आर्थिक गबन की जानकारी प्राप्त हुई है। यदि गबन हुआ है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
नगेन्द्र सिंह, महाप्रबंधक,
जिला सहकारी बैंक, रायसेन
छवि कांत वाघमारे ,
उपायुक्त सहकारिता ने फोन नहीं उठाया
*क्या है धारा 58 बी*
म प्र सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 में धारा 58 बी
किसी संस्था को हुए नुकसान की भरपाई करने की प्रक्रिया है।
इस अधिनियम या किसी सोसायटी के नियमों या उपनियमों में किसी बात के होते हुए भी, जहां राज्य सरकार ने अपनी शेयर पूंजी में योगदान दिया है या ऋण या वित्तीय सहायता दी है या ऋण, डिबेंचर या अग्रिमों के पुनर्भुगतान की गारंटी दी है या अनुदान दिया है किसी भी अन्य रूप में और यदि ऑडिट, पूछताछ, निरीक्षण या किसी सोसायटी के समापन या अन्यथा के दौरान, यह पाया जाता है कि कोई व्यक्ति जिसे ऐसी सोसायटी के संगठन या प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी या कोई मृत, भूतपूर्व या वर्तमान सोसायटी के अध्यक्ष, सचिव, समिति के सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी ने इस अधिनियम के प्रावधानों या इसके तहत बनाए गए नियमों या सोसायटी के उपनियमों के विपरीत कोई भुगतान किया है या घोर लापरवाही या कदाचार के कारण कोई कमी या हानि हुई है। या ऐसी सोसायटी से संबंधित किसी भी धन या अन्य संपत्ति का दुरुपयोग किया है या धोखाधड़ी से अपने पास रखा है, तो रजिस्ट्रार अपने स्वयं के प्रस्ताव पर या समिति, परिसमापक या किसी लेनदार के आवेदन पर, स्वयं जांच कर सकता है या अपने द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति को एक आदेश द्वारा निर्देशित कर सकता है। इस संबंध में, ऑडिट, जांच या निरीक्षण, या परिसमापन की रिपोर्ट की तारीख से दो साल के भीतर ऐसे व्यक्ति के आचरण की जांच करने के लिए लिखेगा ।
किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसी कोई जांच तब तक शुरू नहीं की जाएगी जब तक संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया जाता है।



