राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ का प्रदर्शन प्रधानमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

सिलवानी। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के पदाधिकारियों एवं किसानों ने कृषि से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर अनुविभागीय अधिकारी एसडीएम हर्षल चौधरी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों ने केंद्र व प्रदेश सरकार से कई प्रमुख मांगें रखते हुए कृषि नीतियों में सुधार की मांग की।
महासंघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि भारत सरकार द्वारा अमेरिका के साथ की गई ट्रेड डील देश की कृषि व्यवस्था और किसानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि इस समझौते को तत्काल समाप्त किया जाए, क्योंकि इससे देश के किसानों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो सकता है। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों में किसानों की उपज 1972 के मंडी अधिनियम के अनुसार समर्थन मूल्य से कम पर खरीदी न हो। मंडी अधिनियम की धारा 36 और 37 का कड़ाई से पालन कराया जाए तथा यदि कोई अधिकारी इसका उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया जाए। किसानों ने गेहूं के समर्थन मूल्य को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि गेहूं की फसल का औसत मूल्य कम से कम 2700 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाए। किसानों का आरोप है कि पिछले रबी सत्र में गेहूं का समर्थन मूल्य 2475 रुपये और 175 रुपये बोनस सहित कुल 2600 रुपये दिया गया था, जबकि इस बार केंद्र सरकार द्वारा समर्थन मूल्य में 110 रुपये की वृद्धि के बावजूद प्रदेश सरकार ने बोनस घटाकर किसानों को मिलने वाली राशि कम कर दी है। महासंघ ने कहा कि अन्य राज्यों में किसानों को 2585 रुपये समर्थन मूल्य के साथ 150 रुपये बोनस देकर करीब 2735 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ दिया जा रहा है जबकि मध्यप्रदेश में किसानों को मात्र 40 रुपये बोनस देकर उनके साथ अन्याय किया जा रहा है।
इसके अलावा ज्ञापन में देश के सभी कृषि उत्पादों अन्न दलहन तिलहन मसाले फल, सब्जी दूध एवं सूखे मेवों का मूल्य सी2+50 फार्मूले के आधार पर तय करने और उस मूल्य पर खरीद की कानूनी गारंटी देने की मांग की गई। किसानों ने देशभर के किसानों को पूर्ण कर्जमुक्त करने तथा शासकीय या अर्धशासकीय परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित भूमि पर बाजार भाव से कम से कम चार गुना मुआवजा देने और प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का नियम लागू करने की भी मांग की।
महासंघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।



