मुक्तिधाम में टीनशेड नहीं, बरसते पानी में डीजल और टायर जलाकर करना पड़ा अंतिम संस्कार
सिलवानी। आजादी के 77 साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार करने के लिए मानवता को शर्मशार करने वाली घटनाएं सामने आ रही है।
बारिश के चार महीने में किसी की मृत्यु हो जाए तो उस परिवार को पहले बारिश थमने का इंतजार करना पड़ता है या फिर शव जलाने के लिए अपने साथ तिरपाल, डीजल और टायर की व्यवस्था करके ले जाना पड़ती है। चारों दिशाओं में लोग बांस के सहारे तिरपाल को पकड़कर खड़े होते है, तब अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूर्ण हो पाती है। ऐसी स्थिति सिलवानी तहसील के गांव सिंगौटा में गुरुवार को देखने मिली।
ग्राम पंचायत बम्होरी (वर्धा) के ग्राम सिंगौटा में मुक्तिधाम में टीनशेड तक नहीं है। बारिश में लोगों को तिरपाल, डीजल और टायर की व्यवस्था करके अंतिम संस्कार करना पड़ता है। ग्राम की बुजुर्ग महिला प्रेमबाई चढ़ार उम्र लगभग 70 साल का गुरुवार को बरसते पानी में डीजल और टायर की व्यवस्था करके अंतिम संस्कार करना पड़ा।
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार मुक्तिधाम में टीनशेड की मांग को लेकर आवेदन दे चुके है। गत वर्ष 26 अगस्त को ग्राम के जागरूक नागरिक ने जनपद पंचायत सिलवानी की सीईओ नीलम रायकवार को समस्या से अवगत कराया था। तब सीईओ द्वारा सचिव को भेजकर 7 दिवस में मुक्तिधाम में टीनशेड निर्माण करने की बात कही थी। लेकिन एक साल में भी उक्त समस्या का हल नहीं हुआ।
इसी तरह ग्राम पंचायत चिचोली में आदिवासी परिवार में एक बुजुर्ग व्यक्ति का बुधवार की शाम को निधन हो गया। गुरुवार को बारिश हो रही थी। बरसते पानी में गांव के लोग कीचड़ वाले रास्ते से होकर जंगल में लेकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। ग्राम के मुक्तिधाम में टीनशेड का निर्माण तो किया गया है। पर मुक्तिधाम के चारों और पानी भरा हुआ और रास्ते में दल दल है। मुक्तिधाम के लिए कोई रास्ता नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार बरसात के मौसम में किसी की मृत्यु होने पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह जानकारी अधिकारियों को भी है, लेकिन गांव के मुक्तिधाम में टीनशेड का निर्माण तक नहीं कराया जा रहा है।
इस संबंध में एसडीएम पीसी शाक्य ने बताया कि ग्राम सिंगौटा में मुक्तिधाम में टीनशेड नहीं होने को सीईओ से बात हुई है। मुक्तिधाम की भूमि को लेकर समस्या है। जिसे शीघ्र हल कर दिया जाएगा। ग्राम चिचोली के मुक्तिधाम में चारों पानी भरा हुआ है। पहुंचमार्ग की व्यवस्था के लिए निर्देश दिए गए है।



