प्रभारी मंत्री भी सक्षम नहीं एक अधिकारी पर कार्यवाही करने में

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह । ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा विभाग में पदस्थ कार्यपालन यंत्री मनोज गुप्ता पर जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार भी कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं । ज्ञात हो कि दिनांक 14 दिसम्बर को डॉ मोहन यादव सरकार के मध्य प्रदेश में 2 साल पूरे होने पर जनसंपर्क विभाग के द्वारा एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया था जिसमें कि दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार जो की मध्य प्रदेश सरकार की उपलब्धियां पत्रकार वार्ता में बता रहे थे हमारे द्वारा जब ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा विभाग में पदस्थ कार्यपालन यंत्री मनोज गुप्ता की नियुक्ति को लेकर प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार को अवगत कराया गया की मनोज गुप्ता कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यंत्राकी सेवा विभाग की नियुक्ति नियम विरुद्ध तरीके से की गई है एवं प्रभारी मंत्री को मनोज गुप्ता की नियुक्ति से जुड़े हुए दस्तावेज भी हमारे द्वारा प्रेस वार्ता में जिले के सभी पत्रकार और वरिष्ठ अधिकारी के सामने प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार को उपलब्ध कराए गए जिस पर प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार ने माना की इस प्रकार की नियुक्ति नियम विरुद्ध है और मनोज गुप्ता पर कार्यवाही की जाएगी उनको उनके मूल पद से अलग किया जाएगा लेकिन बड़े बिडमवना की बात यह है कि प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार भी कार्यपालन यंत्री मनोज गुप्ता पर कार्यवाही करने में कतरा रहे हैं क्योंकि मनोज गुप्ता के ऊपर सत्ताधारी पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का हाथ है उन्हीं के द्वारा इनकी नियुक्ति नियम विरुद्ध तरीके से दमोह के ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा विभाग में कार्यपालन मंत्री के पद पर कराई गई थी और मनोज गुप्ता के द्वारा विभाग में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है इनके द्वारा पत्रकारों की आरटीआई का कोई जवाब नहीं दिया जाता और इनके विरुद्ध लगाई गई सीएम हेल्पलाइन का इनके द्वारा स्वयं ही झूठा निराकरण कर दिया जाता है इन सब बातों से प्रभारी मंत्री को अवगत कराया गया एवं बताया गया कि पत्रकारों की खबरों पर जिला प्रशासन संज्ञान नहीं लेता है लेकिन प्रभारी मंत्री ने मजबूरी में पत्रकार वार्ता में यह घोषणा कर दी कि उनको मनोज गुप्ता को उनके पद से हटाया जाएगा लेकिन मंत्री जी शायद भूल गए कि मनोज गुप्ता पर सत्ताधारी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का हाथ है और जब यह बात मंत्री जी को मालूम चलीं तब मंत्री जी ने इस मुद्दे पर कोई बात नहीं की वहां पर दमोह जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारी और जिले के सत्ताधारी पार्टी के सभी राजनेता और दमोह जिले के समस्त पत्रकार मौजूद थे और अनेक पत्रकार साथियों ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था लेकिन जिले में एक भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी जिसको की नियम विरुद्ध तरीके से नियुक्त करके कार्यपालन यंत्री का प्रभार दे दिया गया हो और उसके द्वारा जमकर विभाग में भ्रष्टाचार किया जा रहा हों और मामला जिला प्रशासन से लेकर प्रभारी मंत्री और समस्त सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के बीच में उठाया गया मुद्दा हों लेकिन इस पर कोई कार्यवाही ना होना मध्य प्रदेश शासन पर एवं जिला प्रशासन पर कई गंभीर सवाल पैदा करता है कि मध्यप्रदेश शासन भ्रष्टाचार को खुलकर संरक्षण प्रदान कर रही है और मनोज गुप्ता के द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर सत्ता धारी पार्टी के नेताओं को इनके द्वारा अनैतिक लाभ दिया गया है इसी तरह ग्रामीण यंत्राकी सेवा विभाग में पदस्थ बाबू राजीव लोचन चौबे के द्वारा 44 लाख रुपए का गवन किया गया है इस पर कई बार जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया और भोपाल में मुख्यमंत्री कार्यालय में भी बाबू राजीव लोचन चौबे के द्वारा जो 44 लाख रुपए का गवन किया गया है इस संबंध में आवेदन कार्यवाही के लिए दिया गया लेकिन आज दिनांक तक कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यंत्राकी सेवा विभाग मनोज गुप्ता और बाबू राजीव लोचन चौबे के सामने मध्य प्रदेश शासन और जिला प्रशासन कार्यवाही करने में लाचार नजर आता है अब देखना होगा कि खबर प्रशासन के बाद भ्रष्टाचार में सर से लेकर पैर तक लिप्त कार्यपालन यंत्री मनोज गुप्ता और बाबू राजीव लोचन चौबे पर कार्यवाही होती है कि नहीं यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है और जिले में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक चुनौती है की वह जिले की आम जनता को अधिकारी कर्मचारी के द्वारा कोई भ्रष्टाचार जिले के किसी भी विभाग में नहीं किया जा रहा इसका संदेश जिला प्रमुख देते हैं और कहते हैं कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है तो हम उस पर कार्यवाही करेंगे लेकिन ग्रामीण यंत्राकी सेवा विभाग में खुलकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है और समस्त दमोह जिले बासियों को इस मामले की जानकारी है परंतु जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा कोई कार्यवाही ना करना संपूर्ण जिले की जनता में एक गलत संदेश देता है यहां पर कहना उचित होगा की एक कर्मचारी संपूर्ण मध्य प्रदेश शासन पर भारी देखना होगा कि यह अपने आप में कितना प्रभाव आम जनता और जिले में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों पर दिखाता है या फिर मनोज गुप्ता पर कोई कार्यवाही जिले के प्रभारी मंत्री और जिला प्रशासन कार्यवाही करता है या नहीं। खबर प्रकाशन के बाद एक देखने वाली अजीबो गरीब बात होगी


