Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 20 अगस्त 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 20 अगस्त 2023
20 अगस्त 2023 दिन रविवार को शुद्ध श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है, इसे दूर्वा गणपति चतुर्थी भी कहते हैं। चन्द्र उदय रात्री 08:30 मिनट पर होगी। गणेश पूजन के उपरान्त चन्द्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलना चाहिए। आज पश्चिम दिशा मेँ शुक्र देवता का बालत्व निवृति हो जाएगी। रविवार का हस्त नक्षत्र अर्थात रवि+हस्त से सर्वार्थ अमृत सिद्धियोग है। आप सभी सनातनियों को वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – अधिक श्रावण मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – श्रावण मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि 12:22 AM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि का स्वामी – चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणपति जी और पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त 04:22 AM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र स्वामी चंद्रमा तो राशि कन्या इसका स्वामी बुध है।
📢 योग – साध्य योग 09:58 PM तक, उसके बाद शुभ योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 11:23 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 12:21 ए एम, अगस्त 21 तक
🔥 गुलिक काल : रविवार का शुभ (गलिक काल) 03:37 पी एम से 05:16 पी एम
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:39:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:31:00
🎆 ब्रह्म मुहूर्त : 04:25 ए एम से 05:09 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:47 ए एम से 05:53 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:58 ए एम से 12:50 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:35 पी एम से 03:27 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:56 पी एम से 07:18 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:56 पी एम से 08:02 पी एम
💧 अमृत काल : 09:43 पी एम से 11:29 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, अगस्त 21 से 12:47 ए एम, अगस्त 21
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:53 ए एम से 04:22 ए एम, अगस्त 21
💧 अमृत सिद्धि योग : 05:53 ए एम से 04:22 ए एम, अगस्त 21
❄️ रवि योग : 05:53 ए एम से 04:22 ए एम, अगस्त 21
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में गुड़ चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/अमृतयोग/भद्रा/ विनायक चतुर्थी/ दुर्वागणपती व्रत/ नाग चतुर्थी उपवास/ ॠक हिरण्यकेशी श्रावणी/ प्रधानमंत्री स्व: श्री राजीव गांधी जयन्ती, बॉलीवुड फिल्म अभिनेता रणदीप हुडा जन्म दिवस, संत लोंगोवाल स्मृति दिवस, अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस, सोवियत संघ से स्वतंत्रता की बहाली का एस्टोनिया दिवस, इंफ़ोसिस कंपनी के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति जन्म दिवस, सद्भावना दिवस, भारतीय अक्षय ऊर्जा दिवस, विश्व मच्छर दिवस, विश्व जल सप्ताह (20 से 24 अगस्त)
✍🏼 विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
⛺ Vastu Tips 🏚️
आचार्य श्री गोपी राम से जानिए कि घर में गमला रखने की सही दिशा क्या है। किस दिशा में गमला रखने से आपको लाभ मिलेगा। वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे ईशान कोण में मिट्टी के गमले रखने के फल के बारे में। हमने आपको बताया था कि ईशान कोण में, यानि उत्तर-पूर्व दिशा में। ईशान कोण, यानि उत्तर-पूर्व दिशा में मिट्टी के गमले लगाने से आपको जीवन में कभी अवरोध, यानि मुसीबतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। अगर फिलहाल कोई परेशानी आपके या परिवार के सदस्यों के जीवन में चल रही है तो वो भी जल्द ही दूर हो जाएगी।
साथ ही इस दिशा में मिट्टी के गमले अपने हाथों से लगाने पर या खुद से उनकी देखभाल करने पर आपके हाथ हष्ट- पुष्ट रहते हैं। इससे आपके हाथों की मजबूती बरकरार रहती है। साथ ही अगर आपके परिवार में कोई छोटा बेटा है तो उसके जीवन में भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं आएगी और आयेगी भी तो वो उन परेशानियों को सामने से हटाते हुए आगे बढ़ते जाएंगे।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
शास्त्रों में बांस की लकड़ी को जलाना वर्जित है। किसी भी हवन अथवा पूजन विधि में बांस को नही जलाते हैं। भारतीय सनातन परंपराओं में बांस का जलाना निषिद्ध है। कहा जाता है की यदि बांस की लकड़ी को जलाया जाता है तो इससे वंश नष्ट हो जाता है और पितृ दोष लगता है।
बांस जलाने को अशुभ माना जाता है, कहा जाता है मुर्दे को जलाने के लिए बांस का प्रयोग किया जाता है, हिंदू धर्म में देसी घी का दीपक जलाया जाता है जो बहुत ही शुभ माना गया है, देसी घी का दीपक घर में अथवा मंदिर में जलाने से क्या लाभ होता है और बांस से निर्मित अगरबत्ती जलाने से होने वाली शुभ अशुभ बातों की चर्चा, ” कैसे आए घर में सुख समृद्धि ” नामक पुस्तक में की गई है
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
कल का शेष
लकवा मारने का कारण- लकवा मारने के पीछे कई कारण हो सकते हैं और हर किसी का आपकी न्यूरल गतिविधियों के साथ संबंध है। जैसे कि कुछ लोग स्पाइना बिफिडा जैसे जन्मजात दोषों के साथ पैदा होते हैं जो लकवा का कारण बनता है। इसके अलावा कुछ दर्दनाक चोट या चिकित्सीय स्थिति मांसपेशियों और तंत्रिका कार्यों को नुकसान पहुंचाती है और इसमें भी आप लकवा का शिकार हो सकते हैं।
इसके अलावा स्ट्रोक और रीढ़ की हड्डी की चोटें भी लकवा का कारण बन सकती हैं। कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां, जिनमें मल्टीपल स्केलेरोसिस और गुइलेन-बैरे सिंड्रोम शामिल हैं। साथ ही मस्तिष्क की चोटें, जिनमें सेरेब्रल पाल्सी जैसी स्थितियां शामिल हैं, ये भी लकवा मारने का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा कुछ न्यूरोलॉजिकल रोग, जैसे एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस भी इस बीमारी का कारण बन सकती है। ऐसी स्थिति में आपको इन तमाम समस्याओं को समझते हुए विटामिन बी12 की कमी से बचना चाहिए।
समाप्त
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
स्नान- के नियम प्राय: देखा गया है कि स्नान, तो सारी दुनिया के लोग ही नहीं वरन् कुछ पशु-पक्षी भी स्नान किया करते हैं, पर जितना महत्त्व स्नान का भारत वर्ष में है उतना शायद विश्व के अन्य किसी भी देश में नहीं होगा।
भारत वर्ष के बुजुर्ग लोगों से आपने कुंभ स्नान, कार्तिक स्नान, माघी स्नान, मौनी स्नान, संक्राति स्नान आदि के बारे में सुना ही होगा।
धार्मिक इन स्नानों का अपना अलग-अलग विशेष महत्त्व हमारे आध्यात्मिक ग्रन्थों में प्रतिपादित किया गया है।
आयुर्वेद में प्रात स्नान को भगवान की पूजा बताया है। बहुत से ग्रन्थों में स्नान के बारे में बहुत ही अच्छी-अच्छी और लाभदायक बातों की जानकारी है।
👉🏽 योगरत्नाकर नामक ग्रन्थ में तो स्नान के दस गुण बताते हुए वर्णन किया गया है-
प्रातः स्नानमलं च पापहरणं दुःस्वप्न विध्वंसनं।
शौचस्याऽऽयतनं मलापहरणं संवर्धनं तेजसाम्।।
रूपद्योतकरं शरीर सुखदं कामाग्नि सन्दीपनं। –
स्त्रीणां मन्मवगाहनं श्रम हरं स्नानैते दशते, गुणा:!!
अर्थात् सूर्योदय के पूर्व प्रातःकाल का स्नान मल, पाप दुर्भाग्य और खराब सपनों का नाश करता है।
प्राथकाल में शौचालय भी पवित्रता का स्थान है और मल को हरने वाला है। तेज को बढ़ाता है। शरीर को सुंदर स्वास्थ्य और मन को सुख देता है।
काम शक्ति और जठराग्नि को बढ़ाता है। स्त्रियों में काम की वृद्धि करता है और थकावट मिटाता है। इस प्रकार स्नान के दस गुण हैं।
स्नान कभी भी शीघ्रता से तथा हड़बड़ाहट (उकताहट) में कदापि नहीं करना चाहिए। सर्वप्रथम शिवलिंग रूपी मस्तिष्क पर जल अर्पित करें।
जिस प्रकार हम भोजन को रुचि और स्वाद के साथ धीरे- धीरे ग्रहण करते हैं उसी प्रकार धीरे-धीरे पूरे मनोयोग के साथ स्नान करना चाहिए।
विशेष परिस्थितियों जेसे बीमारी की अवस्था में, अत्यधिक पसीना आने के तुरंत बाद, धूप से घर पहुँचने के तुरंत बाद स्नान नहीं करना चाहिए।
स्नान का मतलब सिर्फ शरीर को गीला करते हुये पानी को डालना नहीं है। बल्कि एक आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक प्रक्रिया को संपादित करते हुये स्नान करने को ही संपूर्ण स्नान माना गया है।
👉🏽 आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ चरक संहिता में उल्लेख है कि
पवित्रं वृष्यमायुष्यम् श्रम स्वेदमलापहम्।
शरीर बल संधानं स्नानमोजस्करं परम् ॥_
अर्थात सूर्योदय से पहले स्नान करने से शरीर में पवित्रता आती है। रस, रक्त, वीर्य, शुक्र और आयु की वृद्धि होती है। प्रातः का स्नान थकावट, पसीना और मल को दूर करता है तथा शरीर में बल तथा ओज को बढ़ाता है। बुढ़ापा जल्दी नहीं आता।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल कादान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति कीपूजा के उपरान्त मोदक,बेशन के लड्डू एवं विशेष रूपसे दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।
शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता हैवह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्तिबुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेमभाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करनापड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।

