Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 01 अप्रैल 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 01 अप्रैल 2025
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – मंगलवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि 02:32 AM तक उपरांत पंचमी।
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र भरणी 11:06 AM तक उपरांत कृत्तिका
🪐 नक्षत्र स्वामी – भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र ग्रह । भरणी नक्षत्र के देवता यम हैं, जो मृत्यु के देवता और धर्म के राजा माने जाते हैं।
⚜️ योग – विष्कुम्भ योग 09:47 AM तक, उसके बाद प्रीति योग 06:07 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 04:04 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 02:32 ए एम, अप्रैल 02 तक बव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:53:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:07:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:39 ए एम से 05:25 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:02 ए एम से 06:11 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:50 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:20 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:38 पी एम से 07:01 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:39 पी एम से 07:48 पी एम
💧 अमृत काल : 06:50 ए एम से 08:16 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, अप्रैल 02 से 12:48 ए एम, अप्रैल 02
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 11:06 ए एम से 06:10 ए एम, अप्रैल 02
❄️ रवि योग : 11:06 ए एम से 06:10 ए एम, अप्रैल 02
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷 आज का उपाय-हनुमान मंदिर में पंचमुखा दीपक प्रज्जवलित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ विनायक चतुर्थी/ (अंगारक योग)/ अप्रैल फ़ूल्स डे यानी मूर्ख दिवस, भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान वीरेन्द्र सिंह जन्म दिवस,राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस, उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी जन्म दिवस, ओडिशा स्थापना दिवस, दूरदर्शन कॉर्पोरेशन स्थापना दिवस, भारतीय वायु सेना स्थापना दिवस, राष्ट्रीय टॉम फ़ूलरीज़ दिवस, भारतीय रिजर्व बैंक दिवस, दिल्ली भारत की राजधानी घोषित दिवस, उपन्यासकार मिलान कुंदेरा जन्म दिवस, भारतीय एथलीट फौजा सिंह जन्म दिवस, प्रसिद्ध साहित्यकार कैलाश वाजपेयी स्मृति दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में पड़े पुराने तालों को रखना बहुत अशुभ है. वास्तु शास्त्र के जानकार बताते हैं कि जो ताले इस्तेमाल में नहीं आते हैं या फिर खराब पड़े हैं उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए. वास्तु एक्सपर्ट बताते हैं कि बंद पड़े ताले किस्मत को बंद कर सकते हैं और आपकी तरक्की के रास्ते बंद पड़ जाते हैं
चलती हुई घड़ी कालचक्र को दर्शाती है. जबकि, बंद पड़ी घड़ी निगेटिव एनर्जी उत्पन्न करती है. साथ ही बंद पड़ी घड़ियां कार्यों में रुकावट पैदा करती हैं. ऐसे में अगर आपके घर में भी बंद पड़ी घड़ियां हैं तो उसे तुरंत सही करा लें. मान्यता है कि बंद पड़ी घड़ियां आपका अच्छा समय आने ही नहीं देती हैं. इसलिए घर में बंद पड़ी घड़ियों को लेकर हमेशा सतर्क रहें.
🔐 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
चाय में कैफीन पाया जाता है, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को कम करता है। अगर आप अधिक चाय पीते हैं, तो यह आपकी हड्डियों के लिए खतरनाक हो सकता है। विशेष रूप से अधिक कैफीन वाले चाय या कॉफी का सेवन हड्डियों से कैल्शियम को निकाल सकता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। इसलिए, चाय का सेवन सीमित करें और अधिक पानी या कैल्शियम से भरपूर अन्य पेय पदार्थों का सेवन करें।
शराब का अत्यधिक सेवन हड्डियों की सेहत पर गहरा असर डालता है। शराब शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को कम करती है और हड्डियों को कमजोर कर सकती है। यह हड्डियों को चूने के समान बना सकती है और हड्डी के फ्रैक्चर (हड्डी टूटने) का खतरा बढ़ा सकती है। अगर आप हड्डियों को मजबूत रखना चाहते हैं तो शराब का सेवन बहुत सीमित करें।
☕ आरोग्य संजीवनी 🍶
सरसों का तेल: ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होता है। ये ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है और घुटनों को नेचुरल वार्मिंग इफेक्ट देता है। आयुर्वेद में इसे वात इंबैलेंस को दूर करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है, जो जॉइंट पेन का एक बड़ा कारण होता है।
लहसुन: इसमें सल्फर कंपाउंड्स होते हैं, जो न सिर्फ इन्फ्लेमेशन को कम करते हैं, बल्कि जॉइंट कार्टिलेज को रिपेयर करने में भी मदद करते हैं। लहसुन का वार्मिंग इफेक्ट घुटनों के दर्द में आराम दिलाता है।
हल्दी: यह एक पावरफुल एंटी-इन्फ्लेमेटरी कंपाउंड है, जो घुटनों और जोड़ों के दर्द व स्टिफनेस से राहत देती है। साथ ही डैमेज्ड टिशूज को हील करने में भी मदद करती है।
कपूर: यह एक नेचुरल एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) है, जो तुरंत कूलिंग इफेक्ट देता है और पेन को कम करता है।
📖 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
नित्य पूजा में भगवान को चढ़ाया हुआ भोग क्या तुरंत हटा लेना उचित होता है या उसे रखा रहने दिया जाना चाहिए?
आशा जी , ऐसे प्रश्न पर विचार करने से पहले साकार विग्रह की पूजा से जुड़े कर्मकाण्ड के नियम को समझना जरूरी है।
◆यों तो पूजा पञ्चउपचार से हो षोडशउपचार से, भोग लगाना ही चाहिए। अब कितनी देर तक भोग सेवा में रखा रहना चाहिए यह सवाल भक्त को स्वयं से करना चाहिए।
★बचपन से मैंने देखा कि हमारे यहाँ भोग लगाने के दौरान पाठ या मन्त्र जप किया जाता रहा है उसकी समाप्ति के बाद ही भोग वहां से उठाया जाता है व आचमन कराया जाता है।
ऐसे ही संध्या कालीन सेवा में भोग लगाने के बाद कुछ भजन कीर्तन होते थे।
●पर अब उम्र दायित्व समय व परिस्थिति के अनुसार भोग लगा कर यह भावना करते हुए कि प्रभु भोग ग्रहण कर रहे हैं व प्रार्थना करते हुए कम से कम एक दो चार मिनिट आँख बंद करते हुए बैठना चाहिए व कोई मन्त्र जपना चाहिए। फिर आचमन कराना चाहिए।
★सगुण उपासना में भोग लगाने या अर्पित करने के पश्चात यह परम्परा है कि आँख बंद कर ऐसी भावना करना चाहिए कि
देव आपके समर्पित भोग को ग्रहण कर रहे हैं। साथ ही प्रार्थना भी करना चाहिए कि प्रभु कृपया इसे ग्रहण करें।
इस भाव को जब तक उपासक मन में नहीं लाएगा तब तक भोग अर्पण केवल मशीनी क्रिया बनी रहेगी भगवान तो भाव के भूखे हैं भोग के नहीं।
★आपका सवाल संभवतः भोग को तुरन्त हटाने की क्रिया जो मंदिरों में होती है उससे संबंधित है।
◆हरेक मन्दिर व सम्प्रदाय के अपने अपने नियम हैं।
विग्रह के समक्ष भोग लगाने की लाइन लगी हो तो पुजारी भोग प्रस्तुत कर व कुछ प्रक्रिया पूरी करके तुरन्त हटा लेते हैं व अगले भक्त को अवसर देते हैं।
यहाँ प्रक्रिया घर से अलग होना स्वाभाविक है।उस पर आपत्ति नहीं की जा सकती।
★वैसे भगवान को भोग चढ़ाया नहीं जाता,अर्पित किया जाता है ,फूल चढ़ाना की तर्ज पर आजकल भोग चढ़ाना वाक्य चलन में है ।
भोग जब प्रभु द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है तब वह प्रसाद कहा जाता है। पर भ्रम व भूल से प्रसाद चढ़ाना ,ऐसा चलन में है।
◆सनातनधर्म में इतने उपदेशक कथावाचक हैं पर विग्रह की पूजा अर्चना की संक्षिप्त विधि से प्रत्येक को अवगत कराना व लोक शिक्षण करना वे अपना कर्तव्य नहीं समझते। वे समझते हैं कि “पब्लिक सब जानती है”।
★आप स्वविवेक से निर्णय कीजिए।
●गीता में भगवान कहते हैं पत्रं पुष्पम तोयं – अर्थात केवल पत्ते फूल और जल ही पर्याप्त है बस यह श्रद्धा पूर्वक अर्पित किया गया हो।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।


