आधुनिक चकाचौंध ने पुरानी परम्पराऐं बन कर रह गई गुड्डा गुड्डी की कहानियां
कहां गए श्रावण के झूले ,
कहां गई आल्हा की चौपाले,
कहां गई शेरे की नाचें ।
राजेश रजक वरिष्ठ पत्रकार
रायसेन । आधुनिकता की चकाचौंध ने प्रेम की परिभाषा को बदल कर रख दिया है । वही पुरानी परंपराए सिर्फ आज कहानी बनकर रह गई है । भोलेनाथ की भक्ति का पवित्र मास और तुरंत फलदाई होता है श्रावण मास । परन्तु आधुनिकता की चकाचौंध ने सब कुछ मानो बर्वाद करके रख दिया है । बुजुर्ग दादा-दादी, नाना-नानी की आंनद दायक कहानियां प्रेरणादायक होती थी परंतु समय का असमय परिवर्तन ने पुरानी परम्पराओं को सिर्फ विलुप्त कहानी ही बना दिया है ।
कहा गए सावन के झूले – सावन को लेकर कई गीतकारों ने फिल्मों का गीतों से सजाया था । सावन के झूलो ने मुझको बुलाया ….ऐसे सुहावने गीत होते थे । वही श्रावण के महीनों में बेटियों ससुराल से पीहर (मायके) आती थी और ऊंचे ऊंचे पेड़ों पर झूले डालकर झूला करती थी कहा गए वो सावन के झूले? झूलो पर गाँव की बेटियां सभी एकत्रित होकर पेड़ से बंधे झूलो को मचकनी मार कर झूला करती है । क्या यह परम्परा पुनः लौटेंगी या कहानी बन कर रह जाएगी ।
कहा गई आल्हा की चौपाल –
श्रावण मास में बरसात के समय लोग गांव में कैद हो जाते थे और चौराहों पर बने चबूतरों पर बैठकर आल्हा का गान करते है जो ओज और अतिशयोक्ति अलंकारों से पूर्ण होती है जब आल्हा पढ़ी जाती थी अप्रत्यक्ष रूप से सुनने और पढ़ने वालो को अनुभूति होती थी – एक को मारे दो गिर जावे, तीसरो दहशत में मार जाए……. परन्तु यह भी आधुनिकता की चकाचौंध में गायब हो गई ।
कहाँ गई सेरो की नाच –
श्रावण माह में लोग एकत्रित होकर हाथों ने छोटी छोटी लकड़ी की डंडी लेकर ताल मिलाकर बजाते से और गाते थे वही समूह में एकल नृत्य करते हुए एक साथ गीतों को गाते थे। आज यह भी आधुनिकता की चकाचौंध में खो गई है और बच्चों से लेकर युवा और युवाओं से लेकर बुजुर्गों के हाथों में सिर्फ मोबाइल ही नज़र आता है ।
गौरतलव है कि बच्चे लोहे के नुकीले डंडों को लेकर गाड़ते हुए चलते थे यह भी खेल होते थे । नारियल की नट्टी में रस्सी बांध कर चलते थे वही लकड़ी के पाद बनाकर डण्डे ने डालकर गेड़ी पर चलते थे और खेलते थे। आज मोबाइल के चलते सभी गायब सा हो गया है । काश वही दिन आज भी होते तो आज जो कुरीतियों दिनों दिन बढ़ रही है । वह नही होती और प्रेम ही प्रेम होता । न बुजुर्ग आश्रमो में होते न ही बेटा बहु माता पिता से अलग होते ।



