धार्मिक

26 नवम्बर 2024 उत्पन्ना एकादशी कल, जानें किस शुभ योग में करें भगवान विष्णु की पूजा

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
⚜▬▬ஜ✵❀ श्री हरि: ❀✵ஜ▬▬⚜
🔮 26 नवम्बर 2024 उत्पन्ना एकादशी कल, जानें किस शुभ योग में करें भगवान विष्णु की पूजा
🔘 HIGHLIGHTS
🔹 एकादशी व्रत को शुभ माना जाता है।
🔹 इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है।
🔹 एकादशी व्रत माह में दो बार किया जाता है।
🔹 उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष में होती है।
🔹 इस दिन व्रत करने से सभी पाप समाप्त होते हैं।
🔹 उत्पन्ना एकादशी 26 नवंबर 2024 को प्रारंभ होगी।
👉🏼 उत्पन्ना एकादशी का दिन भगवान श्री विष्णु की उपासना के लिए बहुत शुभ माना जाता है. यह एकादशी मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष में आती है और इस साल यह 26 नवम्बर 2024 को मनाई जाएगी. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी एकादशी का जन्म हुआ था, जो पापों का नाश करने वाली और भक्तों को मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती हैं. भगवान विष्णु को इस दिन तुलसी दल अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इस साल उत्पन्ना एकादशी पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें प्रीति योग और आयुष्मान योग प्रमुख हैं. इन योगों में भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि और खुशियां आती हैं.
📆 उत्पन्ना एकादशी तिथि
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 26 नवंबर दिन मंगलवार को देर रात 01 बजकर 01 मिनट से लेकर अगले दिन यानी 27 नवंबर दिन बुधवार को देर रात 03 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि तिथि के अनुसार, 26 नवंबर को ही उत्पन्ना एकादशी का व्रत किया जाएगा. वहीं व्रत का पारण 27 नवंबर की दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक किया जा सकता है.
⚛️ उत्पन्ना एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी पूजा का समय 26 नवंबर सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. इस शुभ योग में करें भगवान श्री विष्णु की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है.
💧 उत्पन्ना एकादशी का पारण

व्रत का पारण अगले दिन 27 नवंबर 2024 को द्वादशी तिथि में करें. पारण का समय दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट बजे तक उत्तम रहेगा. पारण से पहले भगवान विष्णु का ध्यान करें और फिर पारण करें.
📖 उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि
व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. फिर पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करें और घी का दीपक जलाएं. “ॐ नमो नारायण” मंत्र का जाप करें. साथ ही भगवान विष्णु को सुपारी, नारियल, फल, लौंग, पंचामृत, अक्षत, मिठाई और चंदन चढ़ाएं. सबसे आखिर में आरती करके भगवान का आशीर्वाद लें.
💁🏻‍♀️ उत्पन्ना एकादशी का व्रत क्यों विशेष है?

इस दिन का महत्व सिर्फ इसलिए नहीं है क्योंकि यह एकादशी व्रत का दिन है, बल्कि यह दिन और भी ज्यादा खास है क्योंकि इस दिन कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है. हस्त नक्षत्र, प्रीति योग और आयुष्मान योग इस दिन बनने वाले प्रमुख योग हैं, जो इसे और भी खास बनाते हैं. कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा से अनगिनत पुण्य मिलते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और आशीर्वाद का आगमन होता है.
🤷🏻 उत्पन्ना एकादशी का महत्व
मान्यता के अनुसार, एकादशी का पालन करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है. इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मोक्ष प्राप्ति और विष्णु लोक में स्थान मिलता है. इस व्रत को करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है. यह व्रत न केवल पापों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है.

Related Articles

Back to top button