कच्चे खचा मार्गो का पर्याय बना जैतपुर कछया पंचायत का जनजीवन

आजादी के आठ दसको बाद भी ग्रामीण अंचलो का जन जीवन आज भी दयनीय व उपेक्षित
रिपोर्टर : कुंदन लाल चौरसिया
गौरझामर । मध्यप्रदेश मे डा मोहन यादव सरकार को आरूढ हुए काफी समय होने के बाद भी गौरझामर क्षेत्र की अनेको ग्राम पचायते आज भी उपेक्षा की शिकार है यहां पर विकास की मुख्य धारा कही दूर तक दिखाई नही देती गांवो की पहचान सिर्फ चुनाव के समय तक मात्र एक वोट बैक की तरह रहती हैं। जनप्रतिनिधियो को चुनाव जीतने के बाद फिर गांव तरफ देखने की फुरसत तक नही रहती और यह सिलसिला आज का नही पिछले 78 वर्षो से यूं ही चला आ रहा है बता दे की जैतपुर कछया गांव के अलावा इस पंचायत के अन्तर्गत तीन मंजरे टोले भी आते है जो आज भी उपेक्षित पडे विकास की वाट जोह रहे है यहां के रहवासियो का कहना है कि वह वर्षो से बरसात मे कीचड भरी जिन्दगी का वह असहनीय दंश झेलते आ रहे है लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नही है हमारे प्रतिनिधि को गांव के पूर्व जनपद सदस्य राम सिह आठया ने बताया की गांव के बीच मे बहने वाले नाले पर न पुलिया हैऔर न ही सड़क, कीचड के कारण लोगो का जीना हराम हो गया है। ग्राम पंचायत भवन जैतपुर से पंडलपुर टोला रोड नहर तक करीब ढाई किलोमीटर है यहां करीब पांच सौ किसान खेतीहर मजदूर गरीब लोग निवास करते है स्कूलआने जाने के लिए नौनिहाल छात्र छात्राओ एवं बाजार करने खेत आने जाने व इलाज कराने के लिये पास के गांव व जैतपुर कछया तक बीच की स्थिति बडी बिकट व असहनीय हो जाती है दलदली कच्चे रास्ते से सहज निकलना मुनासिब नही है लोग व बच्चे गेडी लेकर निकलने को मजबूर है यही हाल दानवाला टोला सियारी का हार,तथा महुआ खौगरा टोला का है यहां भी चार सौ से ऊपर लोग निवास करते हैं राजस्व निरीक्षक मंडल गौरझामर के अंतर्गत अति समीपस्थ ग्राम पंचायत जैतपुर कछया होने के बाद भी विकास की दृष्टि से यहां दिया तले अंधेरा हैं ग्राम की जनता ने सर्व प्रथम प्राथमिकता के आधार पर जैतपुर कछया से मजरो टोलो को जाने वाले कच्चे मार्गो को बारह मासी पक्का बनाने की मांग की है जिसके कारण लोगो को हो रही परेशानी दूर हो सके।



