वृश्चिक लग्न पुनर्वसु नक्षत्र में में हुआ मोदी जी का शपथग्रहण

ज्योतिषीय गणना : पं. मोहनलाल द्विवेदी, ( हस्तरेखा, जन्मकुंडली एवं वास्तु विशेषज्ञ ) माँ शारदा देवीधाम, मैहर म.प्र. मोबाइल नम्बर 9424000090,, 7000081787
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने 9 जून दिन रविवार को शाम 7 बजकर 23 मिनट पर प्रधानमंत्री पद की तीसरी बार शपथ ग्रहण लिए । इस बार का शपथ ग्रहण का मुहूर्त और भी अधिक खास हो गया क्योंकि इस बार भारतीय जनता पार्टी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं हो सका, सहयोगी दलों के साथ मिलकर नरेंद्र मोदी ने सरकार बनाई। अतः लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार इनकी सरकार तीसरी बार का कार्यकाल पूरा कर पाएगी या नहीं। इसलिए शपथ ग्रहण के मुहूर्त को समझना ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत जरूरी हो जाता है ।
इस संबंध में मां शारदा देवीधाम मैहर जन सूचना केंद्र के वास्तु एवं ज्योतिर्विद पं. मोहनलाल द्विवेदी ने बताया कि बीजेपी को इस बार सरकार बनाने के लिए गठबंधन के सहयोग की आवश्यकता पड़ी। लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इस बार 240 सीटें जीतीं, जो कि पूर्ण बहुमत 272 के आकड़े से 32 सीट कम है, जिसके चलते मोदी मंत्रिमंडल में इस बार सहयोगी दलों को भी कुछ महत्वपूर्ण मंत्रालय देकर उनको खुश करने की कोशिश की गई ।
पंडित द्विवेदी ने शपथ ग्रहण के समय शाम 7.23 बजे सौरमंडल में भ्रमणशील ग्रहों की गति की गणना करके बताया कि देश के शासक/राजा यानि आज के समय के अनुसार प्रधानमंत्री जिनकी स्थिति को हम उनकी शपथ ग्रहण कुंडली के लग्न से देखते हैं, तो वही सप्तम भाव से विपक्षी दलों की ताकत का विचार किया जाता है। सत्ताधारी पार्टी के सहयोगी दलों को हम शपथ ग्रहण कुंडली के तीसरे (छोटे सहयोगी) और ग्याहरवें (बड़े सहयोगी) घरों से देखकर उनकी शक्ति का आंकलन करते हैं। मोदी जी ने इस बार भी पूर्व की भांति स्थिर लग्न वृश्चिक में शपथ लिया । पिछले कार्यकाल की ही भांति एक बार फिर प्रधानमंत्री ने शपथ ग्रहण के लिए वृश्चिक लग्न को चुना है, जो कि एक स्थिर राशि होने के साथ-साथ न केवल उनके जन्म लग्न की राशि है अपितु इस राशि को ‘गुप्त रूप से कार्य करने वाली’ राशि कहा जाता है। वृश्चिक राशि का स्वाभाव बेहद छिपकर और चौंकाने वाले अंदाज में निर्णय लेने का होता है। लेकिन 9 जून दिन रविवार को शाम 7 बजकर 23 मिनट पर जब प्रधानमंत्री मोदी शपथ लिए तब वृश्चिक राशि के सप्तम भाव वृषभ से चार ग्रह गुरु, बुध, सूर्य और शुक्र देख रहे होंगे सप्तम भाव चूंकि विपक्ष का विचार किया जाता है तो यह ज्योतिषीय संकेत इंडिया गठबंधन का उनके बड़े निर्णयों पर इस बार कुछ अवरोध पैदा करने की तरफ संकेत दे रहा है।
इसके साथ ही शपथ ग्रहण कुंडली के लग्नेश मंगल विवादों/शत्रु भाव छठे घर में अपनी स्वयं की राशि मेष में होकर शनि की तीसरी दृष्टि से पीड़ित हैं तथा शनि की दसवीं दृष्टि शपथ ग्रहण कुंडली के लग्न पर और मंगल की आठवीं दृष्टि भी वही पड़ रही है, जो प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के मंत्रियों के कुछ त्वरित निर्णयों के कारण पैदा होने वाले विवादों की तरफ स्पष्ट संकेत है।
उद्योग जगत और किसानों को होगा लाभ
पं. द्विवेदी ने बताया कि रविवार के दिन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र, ध्रुव योग और वाणिज्य करण में शपथ ले रहे मोदी के मुहूर्त में रिक्त तिथि और केमद्रुम योग में विराजमान चंद्रमा का दोष है। चतुर्थी तिथि को रिक्त तिथि जाना जाता है, जिसमें शुरू किए कुछ कार्यों में असफलता मिल सकती है। चतुर्थी तिथि के दिन मुहूर्त के ग्रंथों के अनुसार वृषभ और कुंभ राशि तिथि शुन्य राशि होती हैं, जिनमे पड़े ग्रह कुछ कमजोर हो जाते हैं। चूंकि यहां पांच ग्रह तिथि शुन्य राशि में हैं अत: प्रधानमंत्री मोदी के इस तीसरे कार्यकाल में कुछ बड़े निर्णय जैसे समान नागरिक संहिता, एनआरसी, मुस्लिम आरक्षण को ओबीसी सूची से हटवाना, अग्निवीर योजना आदि के क्रियान्वन में बड़ी बाधा और निराशा होगी। लेकिन शपथ ग्रहण कुंडली के लग्न पर मंगल और शनि की दृष्टि तथा नवांश के दशम भाव पर भी इन दोनों ग्रहों की दृष्टि उद्योग जगत, श्रम कानून, चिकित्सा क्षेत्र, पुलिस सुधार, न्यायपालिका में नियुक्तियों आदि के क्षेत्र में बड़े निर्णय अगले कुछ महीनों में ही ले लिए जा सकते है। कृषि के कारक ग्रह शनि और चंद्रमा दोनों का शपथ ग्रहण कुंडली में स्वग्रही होना, किसानों के लिए जल्द ही कुछ बड़ी घोषणा होने का ज्योतिषीय संकेत है। चंद्रमा शपथ ग्रहण कुंडली में कर्क राशि में वर्गोतम है, अत: दुग्ध उत्पादन और मछलीपालन के क्षेत्र में सरकार प्रगति के लिए जल्द की बड़े कदम उठा सकती है।
सरकार तीसरी बार का कार्यकाल पूर्ण करेगी
17 सितंबर 1950 को दोपहर के समय वडनगर, मेहसाणा गुजरात में जन्मे मोदी की जन्म कुंडली वृश्चिक लग्न की है, जिसमें जन्म लग्न में लग्नेश और षष्टेश (रोग और शत्रु) मंगल का नवमेश (भाग्य) चंद्रमा से एक बड़ा राजयोग बन रहा है। जनता में लोकप्रियता के कारक ग्रह शनि दशम भाव में शुभ ग्रह शुक्र से युत होकर पंचमेश गुरु से दृष्ट है, जिससे सार्वजनिक जीवन में उनकी छवि निष्कलंक बनी रही है। 5 जून 2024 से 5 जून 2025 तक चलने वाली बेहद चुनौतीपूर्ण छठे भाव के स्वामी मंगल की महा दशा में अष्टम भाव के अधिपति बुध की अन्तर्दशा कुछ विवादों और राजनीतिक षड्यंत्रों की ओर ज्योतिषीय संकेत दे रही है। बाद में वर्ष 2025 के अंत में मंगल में केतु की अशुभ दशा में विवादों और स्वास्थय कारणों के चलते उनको कुछ परेशानियां आएगी, उस समय प्रधानमंत्री की समझदारी से समस्त समस्याओं का हल निकाल लेगे और 5 बर्ष का कार्यकाल पूर्ण करेगे । 03 जून 2027 से ढाई वर्ष के लिए शनिदेव का भ्रमण अपनी नीचराशी में में रहेगा जो सरकार के लिए कड़ी चुनौती वाला होगा जिसे सूझ बूझ से सम्हाला जा सकता है।

लग्न कुंडली
दिनांक 09/06/2024
समय शाम 07.23
नई दिल्ली



