मध्य प्रदेश

ऐलान नहीं… शहर को प्लान चाहिए…

हरीश मिश्र, स्वतंत्र पत्रकार
मिर्गी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें अचानक दौरे पड़ते हैं, शरीर में अकड़न और झटके आते हैं तथा व्यक्ति कुछ समय के लिए अपना नियंत्रण खो देता है।
रायसेन नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों को समय-समय पर अतिक्रमण हटाने का “दौरा” पड़ता है।
जब यह दौरा पड़ता है तो सड़क किनारे बैठकर रोटी कमाने वाले दीनदयाल का ठेला, बाबूलाल का टीन शेड और इमरत लाल की छोटी-सी दुकान दिखाई देने लगती है।
मगर पता नहीं क्यों, उसी सड़क पर खड़े प्रभावशाली लोगों के अतिक्रमण नजरों से ओझल हो जाते हैं।
सवाल भूखे पेट का है।
सवाल भेदभाव का है।
सवाल समान नियम का है। अगर नियम है तो सबके लिए हो। अगर कार्रवाई है तो समान हो और अगर शहर को व्यवस्थित करना है तो पहले पूरा प्लान सार्वजनिक हो।
सवाल यही है—क्या अतिक्रमणकारियों की भी कोई राजनीतिक पहचान होती है?
पिछले सप्ताह आशा मेडिकल के सामने अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई में सिर्फ एक सब्जी विक्रेता को हटाया गया। जहां अतिक्रमण हटाया गया, वहां कुछ ड्रम रखकर “ऑक्सीजन पार्क-2” बना दिया गया।
रामलीला गेट के पास भी केवल एक ठेले वाले पर कार्रवाई होती है और आसपास के दूसरे अतिक्रमण उसी तरह बने रहते हैं, तो सवाल कार्रवाई पर नहीं, चयन की कसौटी पर खड़ा होता है।
सागर रोड स्थित गर्ल्स स्कूल के पास के अतिक्रमण का सवाल भी सामने आता है।
क्या वहां भी वही नियम लागू होंगे, जो एक गरीब सब्जी विक्रेता या ठेले वाले पर लागू होते हैं?
क्या नगर पालिका के पास अतिक्रमण की कोई कार्ययोजना है ?
क्या पूरे शहर का अतिक्रमण सर्वे हुआ है ? क्या सभी अतिक्रमणों को एक समान मापदंड से चिन्हित किया गया है?
नगर पालिका को अतिक्रमण हटाना है तो जरूर हटाए। लेकिन पहले नागरिकों और पत्रकारों के सामने अतिक्रमण हटाने की स्पष्ट कार्ययोजना रखे।
बताए—
सड़क की वास्तविक सीमा कहां तक होगी ?
अतिक्रमण की निर्धारित सीमा क्या है?
किस आधार पर कार्रवाई हो रही है?
क्या सभी क्षेत्रों में समान मापदंड लागू होंगे ?
सब्जी बाजार हटेगा तो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी?
क्योंकि केवल “हटा लो” कहना योजना नहीं है।
पहले सीमा तय हो।
फिर लाल निशान लगे।
फिर संवाद हो।
फिर वैकल्पिक व्यवस्था बने।
और अंत में सब पर समान कार्रवाई हो।
यह किसी ठेले वाले या दुकानदार के पक्ष में खड़े होने का सवाल नहीं है।
यह नियम के पक्ष में खड़े होने का सवाल है।
नगर पालिका का अतिक्रमण का दौरा ऐसा हो कि गरीब का ठेला ही नहीं, प्रभावशाली का कब्जा भी दिखाई दे।
पहले प्लान, फिर ऐलान।
पहले समान मापदंड, फिर कार्रवाई।
क्योंकि—
शहर एक है तो नियम भी एक होने चाहिए।
रायसेन को केवल अतिक्रमण हटाने का अभियान नहीं, अतिक्रमण रोकने की स्थायी व्यवस्था चाहिए।
शहर को उजाड़ना नहीं है…व्यवस्थित करना है।

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