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14 दिसम्बर 2024 : दत्तात्रेय जयंती? यहां पढ़ें डेट और शुभ मुहूर्त, पूजा विधि

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 14 दिसम्बर 2024 : दत्तात्रेय जयंती? यहां पढ़ें डेट और शुभ मुहूर्त, पूजा विधिः
HIGHLIGHTS
🔹 सनातन धर्म में दत्तात्रेय जयंती बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
🔹 हर साल यह मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है।
🔹 इस दिन भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ था।
दत्तात्रेय जयंती हिंदू धर्म में सबसे शुभ दिनों में से एक मानी जाती है। यह दिन भगवान दत्तात्रेय को समर्पित है। हर साल यह पर्व मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस शुभ दिन पर भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ था, जिसे दत्त जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस साल यह पर्व 14 दिसंबर 2024 को मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि जो लोग इस व्रत का पालन करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। साथ ही दत्तात्रेय भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
⚛️ दत्तात्रेय जयंती शुभ मुहूर्त

👉🏼 आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 14 दिसंबर, 2024 को शाम 4 बजकर 58 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 15 दिसंबर, 2024 दोपहर 2 बजकर 31 मिनट पर होगी। पंचांग को देखते हुए इस साल दत्तात्रेय जयंती 14 दिसंबर को मनाई जाएगी।
✡️ दत्तात्रेय पूजन का शुभ मुहूर्त : गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:23 से 05:51 के बीच।
🙇🏻 इस विधि से करें भगवान दत्त की पूजा
▪️ 14 दिसंबर, शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और हाथ में जल-चावल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। शाम को किसी साफ स्थान पर एक पटिए रखें और इसके ऊपर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा स्थापित करें।
▪️ सबसे पहले भगवान को कुंकुम से तिलक करें और इसके बाद फूल व माला अर्पित करें। शुद्ध घी का दीपक भी जरूर लगाएं। हाथ में फूल लेकर नीचे लिखा मंत्र बोलें और इसे भगवान दत्तात्रेय को अर्पित कर दें-
▪️ ऊं अस्य श्री दत्तात्रेय स्तोत्र मंत्रस्य भगवान नारद ऋषि: अनुष्टुप छन्द:,_
▪️ श्री दत्त परमात्मा देवता:, श्री दत्त प्रीत्यर्थे जपे विनोयोग:।
▪️ इसके बाद एक-एक करके गुलाल, अबीर, चंदन आदि चीजें भगवान दत्तात्रेय को चढ़ाएं। अपनी इच्छा अनुसार भोग लगाएं व आरती करें। संभव हो तो नीचे लिखे मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें। मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें-
🗣️ भगवान दत्तात्रेय की पूजन मंत्र
ॐ द्रांदत्तात्रेयाय नम:।।
दिगंबरा-दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा।।
ऊं ह्रीं विद्दुत जिव्हाय माणिक्यरुपिणे स्वाहा।।
ॐ दिगंबराय विद्महे योगीश्रारय् धीमही तन्नो दत: प्रचोदयात।।
🤷🏻 दत्तात्रेय जयंती का महत्व
दत्तात्रेय जयंती तीनों देवों के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। भक्त इस पर्व को बड़ी श्रद्धा भाव के साथ मनाते हैं। मान्यता है कि इस खास दिन पर भगवान दत्तात्रेय त्रिमूर्ति (जिसमें तीने देवों के मुख एक ही शरीर से जुडे़ हैं) ने अवतार लिया था। इस खुशी में लोग व्रत करते हैं। पूजा पाठ करते हैं।
धार्मिक ग्रंथों में भगवान दत्तात्रेय को सनातन धर्म में ज्ञान, वैराग्य और तपस्या का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि उन्होंने 24 गुरुओं से ज्ञान प्राप्त किया था। उनके उपदेश समस्त मानव समाज के लिए जीवन के मूल सिद्धांत, आत्मज्ञान और भक्ति का गहरा संदेश देते हैं। भक्तों का मानना है कि इस दिन पूजा करने से आध्यात्मिक विकास होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।
💁🏻‍♀️ दत्तात्रेय जयंती के दिन किन नियमों का करें पालन?
दत्तात्रेय जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। यदि गंगा जल उपलब्ध न हो तो साफ पानी से स्नान कर सकते हैं।
दत्तात्रेय जयंती के दिन दत्तात्रेय मंत्र का जाप करना चाहिए।
इस दिन शास्त्रों का अध्ययन करना भी शुभ माना जाता है।
📖 दत्तात्रेय जयंती से जुड़ी कथा

दत्तात्रेय जयंती के पीछे एक प्रचलित कथा है। इस कथा के अनुसार, भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अंश से उत्पन्न हुए थे। इन तीनों देवताओं की पत्नियां – सावित्री, लक्ष्मी और पार्वती को यह बात पसंद नहीं आई। तब उन्होंने अपने पतियों से कहा कि वे दत्तात्रेय को यह बताएं कि वह किसका पुत्र है।
ब्रह्मा, विष्णु और शिव पृथ्वी पर आए और दत्तात्रेय से पूछा कि वह उनमें से किसका पुत्र है। दत्तात्रेय ने उत्तर दिया कि वह उनकी पत्नियों का पुत्र है। यह सुनकर तीनों देवता भ्रमित हो गए। तब दत्तात्रेय ने बताया कि उनकी पत्नियां हीं शक्ति का स्वरूप हैं और शक्ति के बिना उनका कोई अस्तित्व नहीं है। इस प्रकार दत्तात्रेय ने त्रिमूर्ति को भी ज्ञान प्रदान किया।
दत्तात्रेय जयंती ज्ञान, वैराग्य और समर्पण का पर्व है। इस दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा-अर्चना करके हम उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं। दत्तात्रेय जयंती हमें सिखाती है कि जीवन में त्याग, दान, क्षमा और सदाचार का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है। साथ ही, यह हमें पर्यावरण चेतना जगाने और प्रकृति का सम्मान करने का संदेश भी देती है।
👉🏼 इस लेख के माध्यम से हमने आपको दत्तात्रेय जयंती से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की हैं। आशा है कि यह लेख आपको आगामी दत्तात्रेय जयंती को मनाने में सहायक होगा।

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