मध्य प्रदेशव्यापार

आजीविका मिशन की मदद से शुरू किए पोल्ट्री व्यवसाय ने आदिवासी परिवारों को बनाया आत्मनिर्भर

मुर्गी दाना बनाने की यूनिट से बीस से अधिक परिवारों को भी मिला रोजगार
सिलवानी । रायसेन जिले में सिलवानी विकासखण्ड में ग्रामीण अंचल में आदिवासी महिलाओं ने स्व-सहायता समूहों से जुड़कर ना सिर्फ स्वयं का रोजगार शुरू किया, बल्कि आज सफल उद्यमी हैं और दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। सिलवानी विकासखण्ड से लगभग 25 से 40 किमी के दायरे में सियरमऊ कलस्टर के ग्राम आते है। इस कलस्टर के ग्रामों से लगभग 5 से 10 परिवार प्रतिवर्ष गुजरात, महाराष्ट्र व अन्य प्रदेषों में पोल्ट्री शेडों मे काम करने के लिए पलायन करते थे। कोविड काल में यह परिवार वापस अपने ग्राम में आए, इनकी मुलाकात आजीविका मिशन के दल से हुई तब यह बात निकल कर आई कि इन लोगों को यदि पोल्ट्री का कार्य स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो जाये तो कुछ हद तक पलायन में कमी आयेगी। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए मिषन द्वारा उन परिवारों से सम्पर्क किया जो पोल्ट्री के कार्य के लिए अन्य स्थानों पर पलायन किया था उनसे चर्चा के उपरांत उनको निवासरत ग्राम में ही उनको पोल्ट्री का कार्य उपलब्ध कराने की एक मुहिम चलाई गई। इसी तारतम्य में मिशन दल द्वारा सियरमऊ कलस्टर अंतर्गत आने वाले संकुल स्तरीय संगठन को मनरेगा की एजेंसी बनाकर 69 लाख की परियोजना तैयार कर प्रषासनिक स्वीकृति कलेक्टर रायसेन से लेकर 50 मुर्गी शेडों का हितग्राही मूलक योजना में निर्माण कार्य करवाया गया। सियरमऊ कलस्टर में आने वाले ग्राम आमापानीखुर्द में वृहद आकार का एक पोल्ट्री यूनिट राष्ट्रीय पशुधन मिषन एवं पंजाब नैशनल बैंक शाखा सिलवानी के सहयोग से 40.02 लाख की इकाई की स्थापना माह अप्रैल 2023 मे संकुल स्तरीय संगठन द्वारा की गई। वर्तमान में इस इकाई से प्रतिदिन लगभग 9500 अण्डे प्राप्त होते है इनको स्थानीय बाजार मे विक्रय से अच्छा लाभ प्राप्त हो रहा है। चूंकि इस कलस्टर में मक्के का उत्पादन अच्छी मात्रा में होता है लेकिन उसका ग्रामीणों का उचित मूल्य नहीं मिलता था। मुर्गी का दाना बनाने में 60 से 70 प्रतिषत मक्के का उपयोग किया जाता है इसी को ध्यान में रखते हुए मुर्गी दाना बनाने की यूनिट की स्थापना प्रधानमंत्री रोजगार श्रजन कार्यक्रम के तहत मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक शाखा सिलवानी के सहयोग से की गई ओर किसानों से स्थानीय स्तर पर मक्का क्रय कर मुर्गी दाना बनाया जा रहा है। जिसमें 20 से अधिक परिवारों को रोजगार स्थानीय स्तर मिल रहा है। जिससे पलायन में कमी आई है।

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