मध्य प्रदेश

पंचायत भवन निर्माण पर उठे गंभीर सवाल, अनियमितताओं के आरोपों से ग्रामीणों में आक्रोश

उपयंत्री ठेकेदार गठजोड़ की चर्चा
रिपोर्टर :  सतीश चौरसिया
उमरियापान |  ढीमरखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायत टोला में निर्माणाधीन पंचायत भवन में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।  लाखों रुपये की लागत से बनने वाले इस सरकारी भवन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।  ग्रामीणों का आरोप है कि जिस पंचायत भवन का निर्माण ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, वही भवन अब भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण बनता जा रहा है।  स्थानीय लोगों के अनुसार, कागज़ों में दर्शाई गई निर्माण लागत और ज़मीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
*37.50 लाख की लागत, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत भवन की अनुमानित लागत लगभग 37.50 लाख रुपये दर्शाई गई है ।  इस राशि में मजबूत संरचना, मानक निर्माण सामग्री और निर्धारित समय में कार्य पूर्ण किए जाने का प्रावधान बताया गया है । लेकिन जब ग्रामीणों ने निर्माण स्थल का अवलोकन किया तो स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आई । स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन में उपयोग की जा रही निर्माण सामग्री अत्यंत घटिया गुणवत्ता की है।  सीमेंट की मात्रा कम, रेत में मिट्टी की मिलावट, कमजोर ईंटें और बिना मानक के किया जा रहा प्लास्टर कार्य साफ दिखाई देता है। कई स्थानों पर दीवारों में दरारें भी नजर आने लगी हैं, जबकि निर्माण अभी पूर्ण भी नहीं हुआ है।
*अधूरा ढांचा, धीमी गति से कार्य*
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य की गति भी बेहद धीमी है ।  जिस भवन को निर्धारित समय-सीमा में तैयार हो जाना चाहिए था, वह अब भी अधूरा पड़ा है।  लोगों का कहना है कि यदि कार्य की यही गति और गुणवत्ता बनी रही तो भवन के लंबे समय तक टिके रहने पर गंभीर संदेह है । इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी होगी, बल्कि पंचायत के दैनिक कार्यों में भी बाधा उत्पन्न होगी  ।
*तकनीकी मानकों की अनदेखी के आरोप*
निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप भी प्रमुखता से सामने आया है ।  ग्रामीणों का कहना है कि भवन निर्माण में न तो सही लेआउट का पालन किया गया है और न ही स्वीकृत नक्शे के अनुसार कार्य किया जा रहा है। कॉलम, बीम और नींव की मजबूती को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि माप-जोख और निरीक्षण की प्रक्रिया केवल कागज़ों तक सीमित रह गई है। मौके पर किसी भी स्तर पर सख्त निगरानी या गुणवत्ता जांच होती हुई नजर नहीं आती।
*उपयंत्री–ठेकेदार गठजोड़ की चर्चा*
ग्राम पंचायत टोला में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि इतनी बड़ी अनियमितताएँ बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं हो सकतीं।  ग्रामीणों के अनुसार, इस पूरे मामले में उपयंत्री और ठेकेदार की कथित मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है । आरोप है कि तकनीकी स्वीकृति देने से लेकर माप-जोख और भुगतान तक की प्रक्रिया में आँख मूंदकर काम किया गया । कुछ लोगों का यह भी कहना है कि बिना वास्तविक प्रगति के ही बिल पास कर दिए गए, जिससे ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

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