कार्तिक मास के पावन अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा आयोजित

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । झुरैया मंदिर रोड घोसी मोहल्ला में कार्तिक मास के पावन अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन रखा गया है जिसमें भारी संख्या में महिला पुरुष शामिल हो रहे हैं।
श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस के अवसर पर बोलते हुए कथा कथा व्यास आचार्य पं कपिल नारायण महाराज तिनसुआ वालों ने कहा
भक्ति से भगवान बस में हो जाते हैं और भगवान भक्त को दर्शन देने आ जाते हैं भगवान को प्राप्त करने के कई उपाय है जिनका अनुसरण हमें करना चाहिए। उन्होंने ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद चरित्र व नरसिंह अवतार का प्रसंग सुनाया।
श्रीमद् भागवत कथा व ज्ञान यज्ञ में काफी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालु श्रोता व दर्शक मौजूद थे। कथावाचक पंडित कपिल नारायण ने भक्त प्रहलाद चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि, प्रह्लाद चरित्र पुत्र व पिता के संबंध को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि यदि भक्त सच्चा हो तो विपरीत परिस्थितियां भी उसे भगवान की भक्ति से विमुख नहीं कर सकती।
राक्षस प्रवृत्ति के हिरण्य कश्यप जैसे पिता को प्राप्त करने के बावजूद भी प्रह्लाद ने ईश्वर भक्ति नहीं छोड़ी। प्रह्लाद ने बिना भय के हिरण्य कश्यप के यहां रहते हुए ईश्वर की भक्ति को स्वीकार किया और पिता को भी उसकी ओर आने के लिए प्रेरित किया। लेकिन राक्षस प्रवृत्ति के होने के चलते हिरण्य कश्यप ने प्रह्लाद की बात को नहीं माना।
ऐसे में भगवान नरसिंह की ओर से उसका संहार किया गया। उसके बाद भी प्रह्लाद ने अपने पुत्र धर्म का निर्वहन किया और अपने पिता की सद्गति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। कथा व्यास कपिल नारायण ने कहा कि, भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की कथा तो हम सभी जानते हैं। हिरण्य कश्यप का अंत करने के बावजूद उनका क्रोध शांत नहीं हुआ। जिससे भू लोक, स्वर्ग लोक और पाताल लोक कांपने लगा।
प्रभु के क्रोध को शांत करने की शक्ति सिर्फ महाकाल शिव जी के पास ही हो सकती थी। भक्तों की पुकार पर शिव उन्हें शांत करने गए, लेकिन नरसिंह जी का क्रोध शांत करने में वो भी असफल हुए। फिर त्रिकालदर्शी शिव ने मानव, चील और सिंह के शरीर वाले सर्वेश्वर का अवतार लिया।
नरसिंह और सर्वेश्वर अवतारों में पूरे 18 दिनों तक युद्ध चला। अंततः नरसिंह सर्वेश्वर अवतार के आगे कमजोर पड़ने लगे और हार स्वीकार कर अपने क्रोध को शांत किया। सभी देवों ने विष्णु स्तुति की श्रु नरसिंह श्रीहरि में लीन हो गए। और भी अनेक अनेक कथा श्रवण करते हुए प्रभु की भक्ति में भक्तों को लीन किया
मुख्य यजमान नीलेश सिंह घोषी पुत्र खुमान सिंह घोषी के द्वारा आंसदी की पूजा अर्चना की गई।



