आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 29 अगस्त 2024
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – भाद्रपद मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 01:37 AM तक उपरांत द्वादशी
🖍️ तिथि स्वामी – एकादशी तिथि के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आद्रा 04:39 PM तक उपरांत पुनर्वसु
🪐 नक्षत्र स्वामी – आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु है। तथा भगवान शिव के रुद्र रूप को आर्द्रा नक्षत्र का अधिपति देवता माना जाता है।
⚜️ योग – सिद्धि योग 06:17 PM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
⚡ प्रथम करण : बव – 01:24 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 01:37 ए एम, अगस्त 30 तक कौलव
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:41:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:19:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:28 ए एम से 05:13 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:51 ए एम से 05:58 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:47 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:46 पी एम से 07:08 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:46 पी एम से 07:53 पी एम
💧 अमृत काल : 06:20 ए एम से 07:59 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:44 ए एम, अगस्त 30
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 04:39 पी एम से 05:58 ए एम, अगस्त 30
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को फल भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – जया (अजा) एकादशी व्रत-(स्मार्त)/ महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद जयन्ती, राष्ट्रीय खेल दिवस, होयल दिवस, पॉटरी बोतल ओवन दिवस, व्यक्तिगत अधिकार दिवस, राष्ट्रीय नींबू रस दिवस, राष्ट्रीय चॉप सूई दिवस, तेलुगू भाषा दिवस, परमाणु परीक्षण के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस, राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा
✍🏼 विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
अगर आपके घर में वास्तु दोष है तो उस दोष को दूर करने के लिए कुछ तोड़फोड़ करने की जरूरत नहीं है। आपको सिर्फ इतना करना है कि मकान की छत पर एक बड़ा गोल शीशा यानि आईना इस तरह से लगाएं कि मकान की संपूर्ण छाया उसमें दिखाई देती रहे। हमारी वास्तु शास्त्र में आईने को उत्प्रेरक बताया गया है, जिसके द्वारा भवन में तरंगित ऊर्जा का सुखद एहसास होता है।
आपको भूलकर भी कभी घर में टूटे बर्तन या टूटी खाट का प्रयोग नहीं करना चाहिए और न ही घर में टूटे बर्तन व टूटी खाट रखनी चाहिए। इसका आपको फायदा तो होता नहीं, उल्टा धन हानि के योग बनते हैं।
हमारे घर में सबसे सात्विक जगह होती है रसोईघर। घर की सुख-समृद्धि रसोईघर से झलकती है। अगर रसोईघर गलत स्थान पर है तो अग्नि कोण में बल्ब लगा दें और हर रोज ध्यान से सुबह-शाम उस बल्ब को जरूर जलाकर रखें। इससे वास्तु दोष भी दूर होगा और घर में सुख-समृद्धि का वास भी होगा।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर उनका पेस्ट बनाकर नहाने से पहले उसे लगाने से भी बालों का गिरना कम होता है।
बालों में सप्ताह में एक बार तिल का तेल जरूर लगाएं। इस तेल के लगातार उपयोग से बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
आधा कप दही में एक ग्राम काली मिर्च और थोड़ा नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं, शीघ्र ही बहुत फायदा होगा।
धूम्रपान और शराब हमारे पूरे शरीर के लिये हानिकारक है यह हमारे शरीर में ऐसे विषैले तत्व पैदा करते है जो की हमारे बालों के लिए बहुत हीं हानिकारक होते हैं।
इसलिए यदि आप अपने शरीर और अपने बालों से प्यार करते है तो इनके सेवन से पूरी तरह से परहेज करें।
🍃 आरोग्य संजीवनी_ 🍁
कालीजीरी एक औषधीय पौधा है और बहुत सी बीमारियों को दूर करने में सहायक सिद्ध होता है। काली जीरी आकार में छोटी और स्वाद में तेज, तीखी और कडुवी होती है। यह कफ, वात को नष्ट करके मन, मस्तिष्क को उत्तेजित करती है। यह कब्ज पेट की बीमारियों में रामबाण औषधि है। काली जीरी के सेवन से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं और खून भी साफ होता है।
इसके सेवन से त्वचा के रोगों से निजात मिलती है, काली जीरी मूत्र की मात्रा और वेग को बढ़ाती है। इसके नित्य सेवन से शरीर ऊर्जावान बनता है, शक्ति का संचार होता है।
मैथीदाना 250 ग्राम, अजवाइन 100 ग्राम और काली जीरी ( जीरा नहीं ) 50 ग्राम लेंकर इन तीनों को हल्का गरम करके / भून कर बारीक पीस कर चूर्ण बना लें। भूनने से पहले काली जीरी को अच्छी तरह से साफ कर लें । फिर इस चूर्ण को किसी एयर टाइट डिब्बे में बंद कर लें ।
अब इस चूर्ण को नित्य रात्रि में सोने से थोड़ी देर पहले एक चम्मच की मात्रा में हलके गर्म पानी के साथ लें, इसके नियमित सेवन से बहुत ही चमत्कारी परिणाम प्राप्त होते है।
5-7 दिन में ही इसके परिणाम दिखने लग जाते है। इसका कम से कम 3 माह तक लगातार सेवन अवश्य ही करना चाहिए।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
एकादशी में क्या ना करें,
एकादशी के दिन फूल और वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, एकादशी के दिन किसी भी प्रकार का दातुन नहीं करना चाहिए वरन दशमी की रात को ही अच्छी तरह दातुन और कुल्ला करके मुँह साफ करना चाहिए ।
एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए, शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन चावल खाने वाला पाप भागी बनता है उसके सभी पुण्य नष्ट हो जाते है ।
एकादशी के दिन जौ का सेवन भी नहीं करना चाहिए, शास्त्रों के अनुसार जौ को महर्षि मेधा के शरीर से उत्पन्न हुआ मानते है। इसलिए इस दिन इसका सेवन करना वर्जित है।
इस दिन चाहे आपने ब्रत रखा हो या नहीं लेकिन आप किसी भी दूसरे मनुष्य का दिया हुआ अन्न बिलकुल भी ग्रहण न करें, नहीं तो पूरे वर्ष भर के पुण्य नष्ट हो जाते है।
एकादशी के दिन मांस, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल आदि तामसी वस्तुओं का सेवन कदापि नहीं करना चाहिए, इससे मन में पाप के विचार जाग्रत होते है ।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के ब्रह्मखंड के अनुसार एकादशी के दिन सेम की फली नहीं खानी चाहिए, एकादशी के दिन इसका सेवन करने से संतान को हानि पहुँचती है।
जो लोग एकादशी का ब्रत रखते है उन फलाहारीयों को गाजर, शलजम, गोभी, पालक, कुलफा का साग इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए। वह लोग आम, अंगूर, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करें।
एकादशी के दिन भगवान विष्णु को मीठा पान चढ़ाया जाता है लेकिन इस दिन पान खाना वर्जित माना गया है। मान्यता है कि चूँकि पान खाने से मन में रजोगुण की प्रवृत्ति बढ़ती है और विचारों में सात्विकता नहीं रह पाती है अत: इस दिन पान का सेवन निषेध कहा गया है ।
एकादशी से एक दिन पहले ही संध्या से पूर्व घर में झाड़ू लगाकर घर को अच्छी तरह से साफ करे लेना चाहिए। एकादशी के दिन घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीव मर सकते है।
एकादशी के दिन बाल, दाढ़ी, नाख़ून नहीं कटवाने चाहिए ।
शास्त्रों में परनिंदा अर्थात दूसरों की बुराई करने को घोर पाप माना गया है। मान्यता है की ऐसा करने से मन में दूसरों के प्रति कटु भाव आ सकते हैं, और समाज में भी अपयश मिलता है इसलिए एकादशी के दिन परनिंदा न करते हुए भगवान विष्णु की पूजा अर्चना में मन लगाना चाहिए।
एकादशी के दिन क्रोध, हिंसा नहीं करनी चाहिए है। क्रोध और हिंसा से शरीर और मन दोनों में ही विकार आता है, इससे भगवान श्री हरि रुष्ट हो जाते है ।
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।



