ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 29 नवम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 29 नवम्बर 2025
29 नवम्बर 2025 दिन शनिवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष कि नवमी तिथि है। आज के विषय में लिखा है:- की नवम्या देवी पूजनेन विष्णुलोकप्राप्ति । अर्थात आज नवमी को देवी की आराधना करने से भगवान श्रीहरि विष्णु के लोग अर्थात वैकुंठ लोक की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। आज की नवमी को महानंदा नवमी व्रत भी है। आज सम्पूर्ण दिवस रवि योग भी है। आप सभी सनातनियों को “महानंदा नवमी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
*शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।। ☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है । *शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
*शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। *शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष नवमी तिथि 11:15 PM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वभाद्रपदा 02:22 AM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति (गुरु) है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के देवता अज एकपाद हैं, जो एक-पैर वाले सर्प या बकरे के सिर वाले देवता हैं।
⚜️ योग – हर्षण योग 09:26 AM तक, उसके बाद वज्र योग
प्रथम करण : बालव – 11:50 ए एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 11:15 पी एम तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:33:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:06:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:07 ए एम से 06:01 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:34 ए एम से 06:55 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:48 ए एम से 12:30 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:21 पी एम से 05:48 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:24 पी एम से 06:45 पी एम
💧 अमृत काल : 06:31 पी एम से 08:05 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:43 पी एम से 12:37 ए एम, नवम्बर 30
❄️ रवि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ पंचक जारी/ इलेक्ट्रॉनिक शुभकामना दिवस, अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता दिवस, राष्ट्रीय लेमन क्रीम पाई दिवस, गुजरात के मुख्यमंत्री छबीलदास मेहता स्मृति दिवस, परमवीर चक्र विजेता गुरबचन सिंह सलारिया जयन्ती, कवि अली सरदार जाफ़री जयन्ती, राष्ट्रीय चॉकलेट दिवस, भारतीय समकालीन फैशन उद्योगपति रोहित खोसला जन्म दिवस, भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता ठक्कर बाप्पा जन्म दिवस, अमृतलाल विट्ठलदास ठक्कर जयन्ती, उद्योगपति एवं एयरलाइन उद्योग के अग्रणी, जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय जगुआर दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🛕 Vastu tips 🏚️
किचन या बाथरूम बनवाना भी पड़ सकता है भारी आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार आग और पानी से जुड़े स्थान, जैसे किचन और बाथरूम, सीढ़ियों के नीचे बनवाना अशुभ माना गया है। इससे आर्थिक नुकसान, अनिश्चितता और परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद बढ़ सकते हैं।
*सीढ़ियों के नीचे क्या बनाना है सही अगर आप इस स्पेस का उपयोग करना ही चाहते हैं तो यहां स्टोर रूम या क्लोज्ड कैबिनेट बना सकते हैं। इसमें आप अतिरिक्त सामान रख सकते हैं जो रोजाना के उपयोग में नहीं आता। यह उपयोग वास्तु के अनुकूल माना जाता है। *जूते रखने की आदत क्यों करनी चाहिए बंद? कुछ लोग सीढ़ियों के नीचे जूते-चप्पल रखने के लिए रैक लगा देते हैं, जिससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक, ऐसा करने से आपके घर-परिवार की सुख-समृद्धि में परेशानी आ सकती है और घर के लोगों में बेचैनी बढ़ सकती है।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
औषधीय गुणों से भरपूर विजयसार पेड़ के बारे में सब जानते हैं कि इसके लाभ मधुमेह के लिए होते हैं। लेकिन इसके अलावा भी विजयसार में मौजूद पोषक तत्‍व और औषधीय गुण विभिन्‍न स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने में मदद करते हैं। विजयसार पेड़ के एंटी-हाइपरलिपेडिक गुण शरीर में कुल कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करने में मदद करते हैं। इसमें मौजूद जीवाणुरोधी और बंधनकारी गुण खून बहना, चोट और अन्‍य त्‍वचा समस्‍याओं का इलाज करने में मदद करते हैं। विजयसार के फायदों में एनीमिया, डायरिया, त्‍वचा समस्‍याएं, स्‍वशन संबंधी बीमारियां, दांतों की समस्‍या और बालों संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में होते हैं। आइए विस्‍तार से जाने विजयसार किस तरह से हमारे लिए फायदेमंद होता है।
*मधुमेह की रोकथाम करने के लिए विजयसार एक प्रभावी उपाय माना जाता है। विजयसार का उपयोग कर आप मधुमेह के लक्षणों को कम कर सकते हैं। विजयसार रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने के साथ ही कोलेस्‍ट्रॉल को भी कम करता है। नियमित रूप से विजयसार का सेवन करने से यह मधुमेह के लक्षणों जैसे बार-बार पेशाब आना, बार-बार भूख और प्‍यास लगना, शरीर में दर्द और जलन आदि को निय‍ंत्रित करने में मदद करता है। इसके औषधीय रूप में विजयसार का उपभोग करने के साथ ही कुछ लोग इसकी लकड़ी से बने बर्तनों में भोजन करने की सलाह देते हैं। 💉 *आरोग्य संजीवनी* 🩸 इन 3 औषधियों की बहुत उपयोगी दवा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री :
*250 ग्राम मैथीदाना *_100 ग्राम अजवाईन *_50 ग्राम काली जीरी (ज्यादा जानकारी के लिए नीचे देखे) *तैयार करने का तरीका :*
उपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-हल्का सेंकना(ज्यादा सेंकना नहीं) तीनों को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पावडर बनाकर कांच की शीशी या बरनी में भर लेवें।
🍱 औषधि को सेवन करने का तरीका,,,,,
रात्रि को सोते समय एक चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी (हल्का गर्म) के साथ लेना है। गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।
*
चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी (कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी । पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा। चमड़ी की झुर्रियाॅ अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा ।
*इन 5 रोगों में फायदेमंद है,,,,* गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा। हड्डियाँ मजबूत होगी।*
आँखों रौशनी बढ़ेगी।* बालों का विकास होगा।*
पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
सनातन धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि ग्रह-नक्षत्रों का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वैदिक ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह कहा गया है, लेकिन इसका प्रभाव किसी भी वास्तविक ग्रह से कम नहीं माना जाता। जब राहु अशांत होता है तो जीवन में बिना वजह तनाव और अचानक समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे समय में शास्त्रों में बताए कुछ उपाय बताए गए हैं, जिनमें एक है मेहमानों का सम्मान और उन्हें शुभ वस्तुओं का दान। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से कि घर में मेहमानों के आने पर ऐसे कौन से उपाय बताए गए हैं, जिन्हें करने से राहु का प्रकोप कम या दूर किया जा सकता है।
*ये हैं अशांत राहु के लक्षण राहु के अशांत होने पर व्यक्ति के जीवन में कई अनचाहे बदलाव महसूस होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में घर और मन दोनों भारी महसूस होते हैं और स्थिरता खत्म होने लगती है। सबसे पहले तो यह जान लेते हैं कि राहु दोष के लक्षण क्या होते हैं, जिन्हें एक आम इंसान समझ और राहु को शांत करने के आसान उपायों को अपनाकर इससे छुटकारा पा सके। ये रहे अशांत राहु के लक्षण- बिना कारण डर या बेचैनी निर्णयों में अस्थिरता या भ्रम अचानक विवाद या रिश्तों में‌ तनाव घर में अव्यवस्था बढ़ना चीजों का खो जाना, जूते-चप्पलों का बिखराव *क्यों जरूरी है राहु दोष का निवारण?* आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, राहु जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित करता है जैसे सेहत, करियर, विवाह, मानसिक संतुलन और आर्थिक स्थिरता। राहु की गलत स्थिति अचानक रुकावटें, गलत फैसले, अनचाही आदतें और बेचैनी पैदा करती है। इसलिए इसे शांत करना बेहद जरूरी माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि मेहमानों का सत्कार करने से राहु की ऊर्जा नरम होती है, क्योंकि राहु का संबंध ‘अचानक आने वाले व्यक्ति’ से है। मेहमान को ये 3 चीजें देने से होगा राहु दोष निवारण *ठंडा जल या मिश्री मिला पानी शीतल जल मन की गर्मी और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक है। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि राहु प्यास, भ्रम और मानसिक अशांति का सूचक है। अपने मेहमानों को ठंडा पानी या मिश्री मिला जल देने से ऊर्जा संतुलित होती है और राहु की उग्रता शांत होती है।
*मीठा या मिष्ठान्न भोजन इलायची, सौंफ या कोई छोटा मिष्ठान्न देना बहुत शुभ माना जाता है। मीठा बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधि है, जो राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है। इससे रिश्तों में मधुरता बढ़ती है और तनाव दूर होता है। *थोड़ी-सी दक्षिणा अगर आपको राहु के लक्षण नजर आते हैं, तो घर आने वाले अतिथि को या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को घर से खाली न जाने दें। उन्हें 11, 21, 51, 101 या 501 रुपये की दक्षिणा देना शुभ माना गया है। यह राहु और केतु दोनों को शांत करता है। माना जाता है कि इससे अचानक होने वाली आर्थिक हानि कम होती है और घर में पॉजिटिविटी आती है।
══════◄••❀••►═══════
⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।
*_आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।

Related Articles

Back to top button