पर्यावरणमध्य प्रदेश

हर दिन चढ़ रहा पारा, तपाने लगी धूप, छाछ व शीतल पेय की मांग बढ़ी

मार्च के माह में ही अधिकतम पारा 37 डिग्री पर पहुंचा
सिलवानी। मौसम ने अब पूरी तरह से करवट बदल ली है तथा पारा भी हर दिन ऊंचाई चढ़ रहा है। गुरूवार को अधिऽ तम तापमान 37 डिग्री तो न्यूनतम भी 23 डिग्री सेल्सियस रहा। धूप की तपन तीखी होने से लोग जहां अब छांव ढूंढने लगे, वहीं नगर में जगह-जगह गन्ने की चरखी चलने के साथ ही छाछ व शीतल पेय पदाथों की मांग भी बढ़ गई। इस बार मौसम में हो रहे बदलाव के चलते जहां औसत से दोगुनी बारिश हुई, वहीं ठंड ने भी सारे रिकार्ड तोड़ दिए, तो अब गर्मी के बारे में भी कुछ ऐसा ही लग रहा है। मार्च माह में इससे पहले कभी भी अधिकतम तापमान 37 डिग्री तक नहीं गया, लेकिन इस बार तो आधा मार्च गुजरते ही सूरज की तपन असहनीय होने लगी। सुबह 7 बजे से ही धूप इतनी तेज होती है कि मॉर्निंग वॉक पर देर से पहुंचने वाले लोग धूप निकलते ही छांव तलाशने लगते हैं। गुरूवार की सुबह पौने सात बजे ही धूप निकल आई और महज पंद्रह मिनिट में ही उसकी तपन इतनी अधिक हो गई कि लोग छांव ढूंढते नजर आए। दिन चढने के साथ ही गर्मी तीखी होती गई और बाजार आए लोगों के भी चंद कदम चलने पर ही कंठ सूखने लगे। गर्मियों में गन्ने का रस, छाछ व शीतल पेय पदार्थों से राहत मिलती है, और इन दिनों एकाएक बढ़ी गर्मी के चलते उक्त सभी चीजों की डिमांड भी बढ़ गई।
बाजार में भी आया बदलाव
जिस तरह से रेडीमेड कपड़े की दुकानों पर सीजन के अनुरूप कपड़े शोरूम में लटकाए जाते हैं, ठीक उसी तरह मौसम के बदलाव के साथ ही बाजार में भी लोगों के कारोबार बदलने लगे। कल तक जो चाय की गुमटी लगाकर सर्द मौसम में गर्म चाय पिला रहे थे, वो अब कुल्फी व आईसक्रीम का ठेला लगाने लगे। यही स्थिति चाट-पकौड़ी वालों की भी हो गई तथा कोई घिसी हुई बर्फ दे रहा है तो कोई नींबू पानी बेचता नजर आ रहा है। सर्दी में कोई दूसरा कारोबार करने वालों ने गन्ने के रस की चरखी लगा ली तो वहीं जूस वालों की दुकान भी अब बढ़ गईं। फालूदा आईसक्रीम का ठेला भी घूम-घूमकर लोगों को गर्मी से राहत देने की कवायद में जुटा हुआ है।
दो साल से ठप था कोल्ड ड्रिंक का धंधा
पिछले दो साल से कोरोना काल में शीतल पेय पदार्थ तो दूर ठंडा पानी पीने की बजाए लोग गर्म पानी पी रहे थे। जिसके चलते पिछले दो साल तक गर्मियों में शीतल पेय पदार्थों का मार्केट पूरी तरह से ठप हो गया था। अब कोरोना का संक्रमण लगभग खत्म होने की कगार पर है, इसलिए कोल्ड ड्रिंक्स आदि का कारोबार करने वालों को इस साल उम्मीद है। हालांकि दो साल तक खपत न होने से यह खतरा भी बढ़ गया है कि पुरानी पेकिंग की बोतलें ठिकाने न लगाई जा रही हो।

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