आबकारी और पुलिस की सक्रियता से शराब ठेकेदार के मंसूबों पर फिरा पानी, रची थी कच्ची शराब की जहरीली कहानी

रिपोर्टर : विनोद साहू
बाड़ी । वैसे तो मध्यप्रदेश में शराब ठेकेदार सरकार को अपने इशारों से नचाते हुए के कई प्रमाण सामने आये है।
रची जहरीली शराब की पटकथा, अपने ही लोगों को बनाया मोहरा।
बाड़ी शराब ठेका का लायसेंस किसी का और नाम किसी का प्रचारित किया गया जिससे जनता और प्रशासन को बड़े नेता के नाम पर डराकर खुलेआम कीमत से बीस प्रतिशत अधिक पर शराब बेंच सके और इसमें बह सफल भी रहे लिहाजा अंग्रेजी सुराप्रेमी बरेली से शराब खरीदने लगे और देशी शराब के शौक़ीन कच्ची शराब बेंचने बालों की और रुख करने लगे जिससे शराब ठेकेदार को नुक़सान होने लगा और रच दी जहरीली शराब की कहानी।
गुरुवार की शाम सिंधीकेंप की नहर के ब्रज को बताया घटना स्थल।
गुरुवार की शाम लगभग साढ़े पाॅच बजे अस्पताल में सायरन बजाती एंबुलेंस आई और उसमें से पाॅच लोगों को उतारे गये जो बेहोशी की हालत में नजर आये पूछताछ करने पर बता चला कि यह लोग सिंधीकेंप के पास बेहोशी की मिले और मामला कच्ची शराब का हैं। लेकिन जैसे ही बेहोशी का नाटक कर रहे लोगों का नाम पता मालुम हुआं जिससे बह संदिग्ध लगे क्योंकि यह लोग उदयपुरा के आस पास के थे और सिंधीकेंप में आकर कच्ची शराब भी तो महज यहीं लोग ही कैसे शिकार हुए। क्योंकि कच्ची शराब पीने बाले अधिकतर गरीब मजदूर लोग होते हैं जो बीस तीस रुपये की कच्ची शराब पीकर उतना ही नशा कर लेते हैं जितने चार क्वार्टर देशी मदिरा में नहीं हो पाता । अगर कच्ची शराब जहरीली होती तो और भी तो कोई इसका शिकार होता ।
बाड़ी शराब ठेकेदार ने कच्ची शराब बेंचने बालों पर खुद का शासन और आबकारी विभाग को सुस्त साबित करने एक ऐसी चाल चली जिसकी गूॅज पलक झपकते ही रायसेन कलेक्टर के काॅनों में गूॅज उठी उन्होंने तत्काल बरेली एसडीएम संतोष मृदगल को इसकी जाॅच के लिए तत्काल भेजा। देर रात तक आबकारी अधिकारी राजस्व विभाग के एसडीएम व खंड चिकित्सा अधिकारियों की पूछताछ में यह फर्जी मामला खुलकर सामने आ गया। आबकारी विभाग व पुलिस ने मामलें की गंभीरता देखते हुए जाॅच शुरु कर दी।



