भ्रष्टाचार में डूब गई नहर की गुणवत्ता जमकर हुई खाईबाजी और मनमानी, खुलने लगी भ्रष्टाचार की परतें
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान,। जबलपुर, कटनी सहित कई अन्य जिलों की प्सास बुझाने वाली नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध से सिंचाई के लिये नहरों के माध्यम से पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। जब से नहरों के माध्यम से गांव-गांव तक पानी पहुंच रहा है तब से फसलों को पानी की कमी नहीं हो रही है लेकिन जिन नहरों के माध्यम से नर्मदा नदी के बने बरगी बांध का पानी पहुंचाया जा रहा है वह जर्जर हो गई है। नहर की हालत किसी से छिपी नहीं है। नहरों का मेंटनेंस गंभीरता से करवाया नहीं जा रहा है और न ही दुर्दशा का शिकार नहरों पर ध्यान रखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि उमरियापान से गुजरी बड़ी नजर की हकीकत क्या है यह स्वयं परत दर परत उखड़ रही सीमेंट और रेत ही बंया कर रही है। उमरियापान के आगे हरदी के पास नजर का अधिकांश हिस्सा उधड़ रहा है। स्मरण रहे कि बरगी बांध की बांयी तट नहर में करोड़ों रूपये पानी की तरह बहाये गये थे और गुणवत्ता का ध्यान देने इंजीनियरों की फौज 24 घंटे लगी रहती थी जांच भी होती थी लेकिन जैसे ही ये नहर शुरू हुई और बाध के पानी का बहाव शुरू हुआ वैसे ही इसके निर्माण कार्य में खाईबाजी और भ्रष्टाचार की पोल खुलने लगी। स्थिति ऐसी हो गई है कि सीमेंट, रेत-गिट्टी और लोहा पानी में बह गया। जगह-जगह से नजर दरत गई। दरारें निर्माण कार्य में हुई घपलेबाजी की मानों चीख चीखकर गवाही दे रही है। करोड़ों रूपये नजर निर्माण में हुये भ्रष्टाचार में डूबे गये हों। लोगों का कहना है कि प्रशासन इस तरफ ध्यान दे तो प्रारंभिक अवस्था में ही खराब हो रही नजर को ठीक करवाया जा सकता है।
मेंटनेंस आखिर कब होगा
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ साल तक तो नहर ठीक रही लेकिन जैसे ही पानी छोड़ा जाने लगा वैसे ही समय बीता और यह नजर के दोनों हिस्सों में दरार दिखाई पड़ी। इतने बड़े प्रोजेक्ट के पूने होने के बाद रख रखाव की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी है इसके लिये मेंटनेंस के लिये फंड होता है जिससे सुधार करवाया जाता है लेकिन इस विभाग में मेंटनेंस तो खूब किया लेकिन समस्या का हल नहीं हुआ। अब बताया जा रहा है कि मेंटनेंस के लिये फंड नहीं है। आकस्मिक फंड की राशि का प्रयोग तब किया जाता है जब नजर कहीं फूट जाती है और पानी बहता है। नहरों में कई जगह पर ऐसी समस्या आई है कि जहां पर सीमेंट और रेत का बेस उखड़ गया है।
साहब करें दौरा तो पता चले हकीकत
कछारगांव, उमरियापान, हरदी, परसवारा सहित अन्य जगहों का जायजा संवाददाता ने लिया तो नहर निर्माण और उसमें हुई अंधेरगर्दी हुई और उसकी बानगी देखने को मिली। हर 5 से 10 फुट के अंतराल में नहर दरक गई। दरारें ऐसी कि अगर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो नहर का पानी दूसरी दिशा में बहने लगेगा। स्थानीय लोगों का कहना था कि नहर बनाते समय खूब कहा गया था कि इसकी गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है। सीमेंट और रेत इस तरह प्रयोग हो रही है कि कई वर्षों तक ये हिलेगी नहीं और नहर जस की तस बनी रहेगी लेकिन कुछ साल बीतने के बाद यह नजर बदहाली के आलम में पहुंच गई।




