गांव के विकास का सिस्टम हड़ताल पर, ठप हुआ योजनाओं का काम, ग्रामीण परेशान
रिपोर्टर : मनीष यादव
पलेरा । नगर की जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत आने वाली 71 ग्राम पंचायतों में गांव का विकास ठहर गया है। गांव के विकास की जिम्मेदारी जिन उपयंत्रियों के कंधे पर है, उनमें अधिकांश लोग हड़ताल पर चले गए हैं। उपयंत्रियों की हड़ताल के कारण गांव में विकास योजनाएं संचालित होने में कठिनाई आ गई है। हालांकि प्रशासन के द्वारा कहा जा रहा है कि विकास कार्यों को सुचारू रूप से चलने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। दरअसल समूचे प्रदेश की ग्राम पंचायतों में उपयंत्रियों की हड़ताल के चलते मनरेगा और अन्य निर्माण कार्य ठप हो गए हैं। पंचायतों में नियुक्त उपयंत्रियों के काम बंद करने से भवन निर्माण, मूल्यांकन और ‘एक बगिया मां के नाम’ जैसी योजनाएं अधर में लटक गई हैं। मजदूरों को काम और मजदूरी दोनों से वंचित होना पड़ रहा है। ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने जानकारी देते हुए बताया कि 16 अगस्त से 10 दिनों के लिए सभी उपयंत्री सामूहिक अवकाश में थे, इसके बाद 27 अगस्त से हड़ताल पर चले गए। लगभग 21 दिनों से सभी कार्य ठप पड़े हैं। जिला इकाई संघ के अध्यक्ष जितेंद्र तिवारी एवं जिला सचिव आशीष बिहारी मिश्रा एवं उपयंत्री कृष्ण बलराम दीक्षित ने बताया कि बीते दिनों मनरेगा संघ के उपयंत्रियों की प्रमुख मांगों को लेकर प्रदेश स्तर पर हड़ताल जारी है। मनरेगा योजना से संचालित कार्यों में रुकावट आ रही है। इसके अलावा नए स्वीकृत भवनों के ले-आउट न होने की वजह से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं। साथ ही ग्राम पंचायतों में पूर्व में कराए गए कार्यों के मूल्यांकन न होने से आगे की प्रक्रिया संचालित नहीं हो पा रही है। जिसके कारण पंचायतों में विकास कार्य की प्रगति पीछे होती चली जा रही है।
इस संबंध में सिद्धगोपाल वर्मा, सीईओ, जनपद पंचायत पलेरा का कहना है कि उपयंत्रियों के हड़ताल पर जाने के बाद जिला प्रशासन द्वारा अन्य विभागों के उपयंत्रियों को कार्यो को देखने के लिए नियुक्त किया गया है, फिलहाल एक बगिया मां के नाम पर फोकस है, जिसके क्रियान्वयन के लिए प्रयास जारी हैं।



