सहकारिता में कोई बेदाग नहीं!

दिव्य चिंतन : हरीश मिश्र, लेखक, स्वतंत्र पत्रकार
सहकारी बैंक रायसेन एवं जिला पंजीयक कार्यालय, रायसेन की कार्यशैली पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। इन दोनों संस्थानों में निर्वाचित धवल वस्त्रधारी, कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी सदैव कृषि साख सहकारी संस्थाओं को लूटते रहते हैं। उनके संरक्षण में घोटाले होते हैं, लेकिन समिति प्रबंधकों के हिस्से में ही दाग आते हैं। धवल वस्त्रधारियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के अनावश्यक दबाव से त्रस्त समिति प्रबंधक राजनीतिक दलों की रैलियों और सरकारी कार्यक्रमों का खर्च उठाते-उठाते दो-दो हाथ, दो-दो वेयरहाउस और दो-दो कोठी बना लेते हैं अर्थात ऐसे कार्य कर गुजरते हैं जो बिना संरक्षण के असंभव हैं।
प्रदेश में सहकारिता ऐसा विभाग है जहाँ मंत्री-संत्री से लेकर अधिकारी-कर्मचारी तक कोई भी बेदाग नहीं मिलेगा! सब बदरंग मिलेंगे। किंवदंती है कि इस विभाग में कभी पतझड़ नहीं आता, हमेशा बसंत की बहार रहती है। अपेक्स बैंक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, महाप्रबंधक, उप पंजीयक, सहायक पंजीयक, सहकारी निरीक्षक और प्राथमिक कृषि सहकारी संस्था के अध्यक्ष, समिति प्रबंधक, और धवल वस्त्रधारी ए-4 साइज कागज पर स्याही उड़ेल कर, फ्लूइड स्याही लगाकर, खाता-बही, फर्द बकाया पंजी, डेड स्टॉक पंजी, मुख्य पंजी, ऋण, अंश, ब्याज, अमानत पंजी, वित्तीय पत्रकों दस्तावेजों की कतरन जलाकर सालभर होलिका उत्सव मनाते हैं। सहकारिता में होली के हुड़दंग का बड़ा अजब हाल है। हर मुखड़े पर खुशी के रंग हैं, जीवन सभी का गुलाल है।
समिति प्रबंधकों के गालों पर साजन (महाप्रबंधक, उप पंजीयक, उप अंकेक्षक, सहकारी निरीक्षक) लाल-हरे, नीले-पीले रंग लगाते हैं। प्रबंधक इठलाते झूमकर चलते हैं, भ्रष्टाचार की भंग जो पीते हैं।
इस विभाग में एक वर्ष में चार मौसम (गेहूँ, मूंग, चना, धान उपार्जन) की खरीदी और पाँचवां मौसम प्यार का अर्थात सहकारी संस्थाओं की जांच का आता है। पाँचवें मौसम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, महाप्रबंधक, सहायक पंजीयक, सहकारी निरीक्षक, समिति प्रबंधकों के साथ जांच-जांच के नाम पर प्यार से फाग खेलते हैं। गुलाल भी समिति प्रबंधक की पन्नी में से निकाल कर समिति प्रबंधक के ललाट पर टीका लगा देते हैं।
सहकारिता के क्षेत्र में कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी सिद्धहस्त तांत्रिक हैं। वे अमावस्या की रात में न्यौछावर लेकर, जांच प्रतिवेदन होलिका में दहन कर देते हैं।
सहकारिता काजल की कोठरी है। यह कोठरी न्यू मार्केट में बनी है, जिसे अपेक्स बैंक कहते हैं। अपेक्स का अर्थ होता है उच्चतम बिंदु, लेकिन कृत्य न्यूनतम बिंदु के हैं। यहाँ कुछ नहीं करने पर भी दाग लगते हैं, इसलिए उन्हें बदरंग होने से परहेज नहीं होता।
सहकारिता के आकाश में टिमटिमाते दीप, कलंकित छवि के अधिकारी, भ्रष्ट आचरण करने वाले, ना उन्हें छवि धूमिल होने की चिंता होती है, न ही किसी बात का डर। प्रबंधकों की भलाई करने के लिए चांदी पर सोने की परत चढ़ाकर सबकी भलाई कर, मलाई चट कर जाते हैं। कृषकों के हित की जगह प्रबंधकों के हित के लिए सहकारी निरीक्षक कार्य करते हैं।



