धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 20 दिसम्बर 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 20 दिसम्बर 2024
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌧️ मास – पौष मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार पौष माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 10:49 AM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मघा 03:47 AM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी : मघा नक्षत्र के देवता पितर देव और नक्षत्र स्वामी केतु जी है ।
⚜️ योग : विष्कुम्भ योग 06:11 PM तक, उसके बाद प्रीति योग
प्रथम करण : तैतिल – 10:48 ए एम तक
द्वितीय करण : गर – 11:29 पी एम तक वणिज
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:20 ए एम से 06:15 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:47 ए एम से 07:09 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:58 ए एम से 12:40 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:02 पी एम से 02:43 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:26 पी एम से 05:53 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:29 पी एम से 06:51 पी एम
💧 अमृत काल : 01:12 ए एम, दिसम्बर 21 से 02:55 ए एम, दिसम्बर 21
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:52 पी एम से 12:47 ए एम, दिसम्बर 21
❄️ रवि योग : 03:47 ए एम, दिसम्बर 21 से 07:10 ए एम, दिसम्बर 21
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में श्रंगार सामग्री चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : मूल समाप्त/रवियोग/ अंतरराष्ट्रीय मानव एकता दिवस, कवि अरुण कांबले स्मृति दिवस, संगीत निर्देशक कानू रॉय पुण्य तिथि
✍🏼 विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu Tips_ 🏡
भूमि दोष का होना आपके पारिवारिक जीवन में कई परेशानियां लेकर आ सकता है। वास्तु शास्त्र में कई तरह के दोष बताए गए हैं, लेकिन भूमि दोष को इन सब में सबसे घातक माना गया है। इस दोष के होने से घर के सभी लोग प्रभावित होते हैं। इसलिए वक्त रहते इसका निवारण आपको अवश्य करना चाहिए। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि, भूमि दोष के होने पर क्या संकेत आपको मिलते हैं, कैसी घटनाएं आपके घर में घटित हो सकती हैं और भूमि दोष को दूर करने के लिए क्या उपाय आपको करने चाहिए।
भूमि दोष वास्तु के अनुसार, भूमि या भवन खरीदने से पहले कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बिना विचार किए भूमि खरीदने से कई बार दिक्कतों का सामना व्यक्ति को करना पड़ सकता है। भूमि या भवन खरीदते समय आपको कुंडली भी अवश्य दिखानी चाहिए, क्योंकि कुंजली में शनि और गुरु की स्थिति से पता चल जाता है कि, ली जाने वाली जमीन आपके लिए कैसी रहेगी। अगर भूमि में दोष है तो नीच दिए गए लक्षणों से आप पता कर सकते हैं।
♻️ जीवनपयोगी कुंजियां ⚜️
रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है तो आप लौकी के रस का सेवन करें, कितना सेवन करें ? रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो कब पिये ? सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते हैं या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते हैं इसमें 7 से 10 पत्ते तुलसी के डाल लो तुलसी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते मिला सकते हैं पुदीना भी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ये भी बहुत क्षारीय है ।
लेकिन याद रखें नमक काला या सेंधा ही डाले वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है तो आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करें 2 से 3 महीने की अवधि में आपकी सारी heart की blockage को ठीक कर देगा 21 वें दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे।
🥒 आरोग्य संजीवनी 🍓
ज्यादा पेशाब आने पर बबूल की कच्ची फली को छाया में सुखा कर, घी में तल कर इसका पाउडर बना लेना चाहिए. इस पाउडर को रोजाना 3 ग्राम लेने से ज्यादा पेशाब आने की समस्या ख़त्म हो जाती है
मुँह के रोगों के लिए
बबूल की छाल को बारीक पीस कर इसे गरम पानी में मिला कर कुल्ला करने से मुँह की सभी समस्याएं जल्द ही ख़त्म हो जाती हैं और दोबारा नहीं होंगी.
गले के रोग बबूल के कुछ पत्ते और छाल को बड की छाल के साथ बराबर मात्रा में मिला कर सुखा कर पीस कर इसका पाउडर बना लीजिये. इस पाउडर को आधा चम्मच 1 गिलास गरम पानी में मिला कर गरारे करने से गले की समस्याएं जैसे सूखापन, खराश और छाले ख़त्म हो जाते हैं.
बांझपन दूर करने के लिए बबूल यानि कीकर के पेड़ के तने पर एक छोटा सा फोड़ा सा निकलता है जिसे बांदा कहते हैं. इस बांदे को लेकर पीस लें और चूरन बना लें. इस चूरन को छाया में सुखा लें और ज़रूरत ले तो और बारीक कर ले इन ताकि खाने लायक बन जाये.
माहवारी ख़त्म होने के अगले दिन से तीन दिन तक इस चूरन का आधा चम्मच सेवन रोजाना कीजिये. इससे गर्भ ठहरने के आसार बढ़ जाते हैं.
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक कहानी 👏🏻 विश्वास की 👏🏻
एक राजा बहुत दिनों से पुत्र की प्राप्ति के लिए आशा लगाए बैठा था लेकिन पुत्र नहीं हुआ, उसके सलाहकारों ने तांत्रिकों से सहयोग लेने को कहा
सुझाव मिला कि किसी बच्चे की बलि दे दी जाए तो पुत्र प्राप्ति हो जायेगी
राजा ने राज्य में ढिंढोरा पिटवाया कि जो अपना बच्चा देगा,उसे बहुत सारा धन दिया जाएगा
एक परिवार में कई बच्चें थे,गरीबी भी थी।एक ऐसा बच्चा भी था, जो ईश्वर पर आस्था रखता था तथा सन्तों के सत्संग में अधिक समय देता था
परिवार को लगा कि इसे राजा को दे दिया जाए क्योंकि ये कुछ काम भी नहीं करता है, हमारे किसी काम का भी नहीं है
इसे देने पर राजा प्रसन्न होकर बहुत सारा धन देगा
ऐसा ही किया गया, बच्चा राजा को दे दिया गया
राजा के तांत्रिकों द्वारा बच्चे की बलि की तैयारी हो गई
राजा को भी बुलाया गया, बच्चे से पूछा गया कि तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है ?
बच्चे ने कहा कि मेरे लिए रेत मँगा दिया जाए, रेत आ गया
बच्चे ने रेत से चार ढेर बनाए, एक-एक करके तीन रेत के ढेरों को तोड़ दिया और चौथे के सामने हाथ जोड़कर बैठ गया,उसने कहा कि अब जो करना है करें
यह सब देखकर तांत्रिक डर गए उन्होंने पूछा कि ये तुमने क्या किया है ?
पहले यह बताओ, राजा ने भी पूछा तो बच्चे ने कहा कि पहली ढेरी मेरे माता-पिता की है, मेरी रक्षा करना उनका कर्त्तव्य था परंतु उन्होंने पैसे के लिए मुझे बेच दिया इसलिए मैंने ये ढेरी तोड़ी दी
दूसरी मेरे सगे-सम्बन्धियों की थी, उन्होंने भी मेरे माता-पिता को नहीं समझाया
तीसरी आपकी है राजा क्योंकि राज्य की प्रजा की रक्षा करना राजा का ही धर्म होता है परन्तु राजा ही मेरी बलि देना चाह रहा है तो ये ढेरी भी मैंने तोड़ दी
अब सिर्फ अपने सद्गुरु और ईश्वर पर ही मुझे भरोसा है इसलिए यह एक ढेरी मैंने छोड़ दी है
राजा ने सोचा कि पता नहीं बच्चे की बलि देने के पश्चात भी पुत्र प्राप्त हो या न हो, तो क्यों न इस बच्चे को ही अपना पुत्र बना ले
इतना समझदार और ईश्वर-भक्त बच्चा है इससे अच्छा बच्चा कहाँ मिलेगा ?
राजा ने उस बच्चे को अपना पुत्र बना लिया और राजकुमार घोषित कर दिया
जो ईश्वर और सद्गुरु पर विश्वास रखते हैं, उनका बाल भी बाँका नहीं होता है
हर मुश्किल में एक का ही जो आसरा लेते हैं, उनका कहीं से किसी प्रकार का कोई अहित नहीं होता है
सभी रिश्ते झूठे हो सकते हैं पर एक सहारा ही प्रभु-परमात्मा का ही सत्य है🙏🙏
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।

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