Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 23 जनवरी 2026
23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पञ्चमी तिथि है। आज बागीश्वरी जयंती भी है। बसंत ऋतु का आज से ही माना जाता है इसलिए इस बसंत पञ्चमी के पहले पंचमी को बसंत पञ्चमी कहा जाता है। परंतु आज पूर्वाह्न काल मैं ही बसंत पञ्चमी मनाया जाएगा। आज रतीकाम महोत्सव भी है। इसलिए इसको मदन पञ्चमी भी कहा जाता है। आज कहीं कहीं तक्षक नाग की पूजा का भी प्रचलन है। आज जैन लोगों का पुष्पांजलि व्रत का भी आरंभ होता है। आज नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जन्म जयन्ती भी है। आज संपूर्ण दिवस रवि योग भी है। आप सभी सनातनियों को “नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्म जयन्ती एवं सरस्वती पूजन तथा बसन्तोत्सव” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 *दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। *शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
*शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु प्रारम्भ
🌦️ मास – माघ मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार माघ माह के शुक्ल पक्ष पञ्चमी तिथि 01:46 AM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पञ्चमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वभाद्रपदा 02:32 PM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति (गुरु) ग्रह हैं, और इसके अधिष्ठाता देवता अजा एकपाद हैं, जो शिव के उग्र रूप में से एक है।
⚜️ योग – परिघ योग 03:58 PM तक, उसके बाद शिव योग
⚡ प्रथम करण : बव 02:10 PM तक, बाद बालव 01:46 AM तक
✨ द्वितीय करण : कौलव पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:55:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:34:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 05:26 एएम से 06:20 एएम
🌟 अभिजित मुहूर्त – 12:12 पीएम से 12:54 पीएम
🌌 सायाह्न सन्ध्या 17:53 पी एम से 19:13 पी एम तक
✡️ विजय मुहूर्त – 02:20 पीएम से 03:02 पीएम
🐃गोधूलि मुहूर्त – 05:50 पीएम से 06:17 पीएम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 29:53 पी एम से 07:13 पी एम तक
💧 अमृत काल – 06:59 ए एम से 08:35 ए एम तक
🗣️ निशिता मुहूर्त – 12:06 एएम से 01:00 एएम, 24 जनवरी
❄️ रवि योग – 02:33 पीएम से 07:13 एएम, 24 जनवरी
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – वसन्त पञ्चमी/ सरस्वती जयन्ती/ बसन्तोत्सव/ पुष्पांजलि व्रत (जैन)/ रतीकाम महोत्सव/ तक्षक पूजा/ पञ्चक जारी/ रवि योग/ विडाल योग/ महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस (नेताजी) जयन्ती, महाराष्ट्र के प्रमुख नेता बालासाहेब ठाकरे जन्म दिवस, पराक्रम दिवस, राष्ट्रीय पाई दिवस, भीम सेन सिंघल जन्म दिवस, भारतीय क्रांतिकारी वीर सुरेंद्र साई जयन्ती, कुष्ठ निवारण अभियान दिवस, भारतीय कांतिकारी नरेंद्र मोहन सेन पुण्य तिथि, संगीत शिक्षक पं. शंकरराव व्यास जन्म दिवस, शाहजी राजे भोसले स्मृति दिवस, राजनीतिक अंबिका चरण मजूमदार जन्म दिवस, सिविल सेवक अचल कुमार ज्योति जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips 🌹
वास्तु में घर का पोछा लगाने के लिए नया या अच्छी हालत का सूती कपड़ा, पुरानी साड़ी का साफ हिस्सा, जो कभी जूठा ना हुआ हो, माइक्रोफाइबर पोछा कपड़ा आदि सबसे अच्छे माने गए हैं। पोछा लगाते समय वास्तु के नियमों का विशेष ध्यान रखें।
पहले से गलती हो गई है तो ये उपाय तुरंत करें घर में गंगाजल का छिड़काव करें, ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ 108 बार जपें, उत्तर-पूर्व कोने में नमक का कटोरा रखें और इसे हर 7 दिन पर बदलें, अगले सोमवार या शुक्रवार को गरीबों को नया कपड़ा दान करें, मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनवाएं या चिपकाएं।
*आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, घर की सफाई ‘शुद्ध वस्त्र’ से ही करनी चाहिए। पुराने या जूठे कपड़े से सफाई करने से लक्ष्मी जी का अपमान होता है। जो घर पुराने वस्त्र से पोंछता है, वहां धन नहीं टिकता है। पुराने कपड़े से पोछा लगाने से घर में दरिद्रता देवी का प्रवेश हो सकता है। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ घटता है मोटापा हरी मिर्च सब्जी में डालकर खाने से ज्यादा भोजन के साथ खाने में ज्यादा फायदेमंद होती है। इसका नियमित प्रयोग करने पर आपका मोटापा घटाती है। क्योंकि इसमें मिलने वाला एंटी-ऑक्सीडेंट्स मोटापे को कंट्रोल करता है और चर्बी बनने से रोकता है। *तीखा खाने से मूड बनता है
*बेहतर मिर्च खाने से दिमाग में एंडोर्फिन पैदा होता है जो कि आपका मूड हल्का बना कर आपको खुशी प्रदान करता है। *त्वचा के लिये अच्छी हरी मिर्च में बहुत सारा विटामिन ई होता है जो कि त्वचा के लिये फायदेमंद प्राकृतिक तेल का प्रोडक्शन करता है। तो अगर आप तीखा खाना खाती हैं तो आपकी त्वचा अपने आप ही अच्छी हो जाएगी।
*प्रतिरक्षा में सुधार इसमें बहुत सारा विटामिन सी होता है, जो कि प्राकृतिक प्रतिरक्षा में सुधार करती हैं। यह आपको बीमारियों से बचाती है। *पुरुषों को जरुर खानी चाहिये पुरुषों को हरी मिर्च पोस्ट्रेट कैंसर के खतरे से बचाती है।
🍵 *आरोग्य संजीवनी* 🍶
कफ-खांसी दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार |
बलगम-खांसी में फायदेमंद :- 1-2 बार कपड़े से छानकर गाय के मूत्र (गौझरण अर्क ) में थोड़ी-सी हल्दी मिलाकर पिलाना कफ (बलगम)-खांसी में फायदेमंद होता है।
बलगम:- अदरक को छीलकर मटर के बराबर उसका टुकड़ा मुख में रखकर चूसने से कफ (बलगम) आसानी से निकल आता है।
कफ:- 3 ग्राम लौंग 100 मिलीलीटर पानी में उबालें। एक चौथाई रह जाने पर कम गर्म करके पी लें। इससे कफ निकल जाता है।
बलगम:- 10 कालीमिर्च, 15 तुलसी के पत्ते पीसकर शहद में मिलाकर नियमित 3 बार चाटने से गले में जमा बलगम बाहर निकलकर साफ हो जाता है।
खांसी :- अगर किसी को खांसी की शिकायत हो तो?मटकी की ठीकरी/मिट्टी का बर्तन। को इतना गरम करो।और आधा कफ़ बीयर डाल दो और धीरे-धीरे चुस्की लेते हुए। पीजिए!
सर्दी खांसी जुखाम:-
अदरक, अजवाइन और गुड़ मुह ने रखकर चूसे
सर्दी खांसी जुखाम:- *पांच तेजपत्ता, दालचीनी का टुकड़ा।दो लॉन्ग, छोटा सा अदरक का टुकड़ा, गुड़ का टुकड़ा।एक गिलास पानी।सब का मिश्रण करके इतना उबालों आधा कप रह जाए। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ एक बार महर्षि गौतम के तपोवन में रहने वाले ब्राह्मणों की पत्नियां किसी बात पर उनकी पत्नी अहिल्या से नाराज हो गईं। उन्होंने अपने पतियों को ऋषि गौतम का अपकार करने के लिए प्रेरित किया। उन ब्राह्मणों ने इसके निमित्त भगवान श्रीगणेश जी की आराधना की। उनकी आराधना से प्रसन्न हो गणेश जी ने प्रकट होकर उनसे वर मांगने को कहा। वे ब्राह्मण बोले, ‘‘प्रभो! यदि आप हम पर प्रसन्न हैं तो किसी प्रकार ऋषि गौतम को इस आश्रम से बाहर निकाल दें।’’ *उनकी यह बात सुनकर गणेश जी ने उन्हें ऐसा वर न मांगने के लिए समझाया, किंतु वे अपने आग्रह पर अटल रहे। अंतत: गणेश जी को विवश होकर उनकी बात माननी पड़ी। अपने भक्तों का मन रखने के लिए वह एक दुर्बल गाय का रूप धारण करके ऋषि गौतम के खेत में जाकर रहने लगे। गाय को फसल चरते देख कर ऋषि बड़ी नरमी के साथ हाथ में तृण लेकर उसे हांकने के लिए लपके। उन तृणों का स्पर्श होते ही वह गाय वहीं गिरकर मर गई। अब तो बड़ा हाहाकार मचा। सारे ब्राह्मण एकत्र हो गौ-हत्यारा कहकर ऋषि गौतम की भर्त्सना करने लगे। ऋषि गौतम इस घटना से बहुत आश्चर्यचकित और दुखी थे। अब उन सारे ब्राह्मणों ने कहा कि तुम्हें यह आश्रम छोड़कर अन्यत्र कहीं दूर चले जाना चाहिए। गौ-हत्यारे के निकट रहने से हमें भी पाप लगेगा।
*विवश होकर ऋषि गौतम अपनी पत्नी अहिल्या के साथ वहां से एक कोस दूर जाकर रहने लगे। किंतु उन ब्राह्मणों ने वहां भी उनका जीना दूभर कर दिया। वे कहने लगे, ‘‘गौ-हत्या के कारण तुम्हें अब वेद-पाठ और यज्ञादि के कार्य करने का कोई अधिकार नहीं रह गया।’’ *अत्यंत अनुनय भाव से ऋषि गौतम ने उन ब्राह्मणों से प्रार्थना की कि आप लोग मेरे प्रायश्चित और उद्धार का कोई उपाय बताएं। तब उन्होंने कहा, ‘‘गौतम! तुम अपने पाप को सर्वत्र सबको बताते हुए तीन बार पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करो। फिर लौट कर यहां एक महीने तक व्रत करो। इसके बाद ‘ब्रह्मगिरी’ की १०१ परिक्रमा करने के बाद तुम्हारी शुद्धि होगी अथवा यहां गंगा जी को लाकर उनके जल से स्नान करके एक करोड़ पार्थिव शिवलिंगों से शिवजी की आराधना करो। इसके बाद पुन: गंगाजी में स्नान करके इस ब्रह्मगिरी की ११ बार परिक्रमा करो। फिर सौ घड़ों के पवित्र जल से पार्थिव शिवलिंगों को स्नान कराने से तुम्हारा उद्धार होगा।’’
*ब्राह्मणों के कथनानुसार महर्षि गौतम वे सारे कार्य पूरे करके पत्नी के साथ पूर्णत: तल्लीन होकर भगवान शिव की आराधना करने लगे। इससे प्रसन्न हो भगवान शिव ने प्रकट होकर उनसे वर मांगने को कहा। महर्षि गौतम ने उनसे कहा, ‘‘भगवान मैं यही चाहता हूं कि आप मुझे गौ-हत्या के पाप से मुक्त कर दें।’’ *भगवान शिव ने कहा, ‘‘गौतम! तुम सर्वथा निष्पाप हो। गौ-हत्या का अपराध तुम पर छलपूर्वक लगाया गया था। छलपूर्वक ऐसा करवाने वाले तुम्हारे आश्रम के ब्राह्मणों को मैं दंड देना चाहता हूं।’’
*इस पर महर्षि गौतम ने कहा, ‘‘प्रभु! उन्हीं के निमित्त से तो मुझे आपका दर्शन प्राप्त हुआ है। अब उन्हें मेरा परमहित समझ कर उन पर आप क्रोध न करें।’’ *बहुत से ऋषियों, मुनियों और देवगणों ने वहां एकत्र हो गौतम की बात का अनुमोदन करते हुए भगवान शिव से सदा वहां निवास करने की प्रार्थना की। वह उनकी बात मानकर वहां त्र्यंबकेश्वर ज्योर्तिलिंग के नाम से स्थित हो गए। गौतम जी द्वारा लाई गई गंगा जी भी वहां पास में गोदावरी नाम से प्रवाहित होने लगीं।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।

