ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 31 अगस्त 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 31 अगस्त 2024
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_

☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – भाद्रपद मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि : शनिवार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 03:41 AM तक उपरांत चतुर्दशी
📝 तिथि स्वामी – त्रयोदशी तिथि के देवता हैं त्रयोदशी और शिव। त्रयोदशी में कामदेव की पूजा करने से मनुष्य उत्तम भार्या प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 07:39 PM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र के देवता गुरु बृहस्पति हैं। इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है।
⚜️ योग – वरीयान योग 05:38 PM तक, उसके बाद परिघ योग
प्रथम करण : गर – 02:59 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 03:40 ए एम, सितम्बर 01 तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:43:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:17:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:29 ए एम से 05:14 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:51 ए एम से 05:59 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:47 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:29 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:43 पी एम से 07:06 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:43 पी एम से 07:51 पी एम
💧 अमृत काल : 12:48 पी एम से 02:31 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:44 ए एम, सितम्बर 01
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में काले तिल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
❄️ पर्व एवं त्यौहार – शनि प्रदोष/भद्रा/ पर्यूषण पर्वारंभ (चतुर्थी पक्ष) – जैन/ कैलाश यात्रा/ पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह पुण्य तिथि, ब्रिटिश राजकुमारी डायना स्मृति दिवस, विमुक्त दिवस, राष्ट्रीय बाहर खाना दिवस, राष्ट्रीय दियासलाई बनानेवाला दिवस, राष्ट्रीय डायटोमेसियस पृथ्वी दिवस, राष्ट्रीय ट्रेल मिक्स दिवस, राष्ट्रीय दक्षिण कैरोलिना दिवस, राष्ट्रीय चिड़ियाघर जागरूकता दिवस, आयरनमैन वेल्स, राष्ट्रीय फ्रेंचाइज़ प्रशंसा दिवस, राष्ट्रीय मैचमेकर दिवस
✍🏼 विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🏘️ Vastu tips
सोने के नियम वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दक्षिण दिशा में बेडरूम नहीं होना चाहिए। इससे नींद में बाधा उत्पन्न होती है। साथ ही दक्षिण दिशा में बेड होने से पितृ दोष भी लग सकता है। इसके साथ ही दक्षिण दिशा में कभी पैर रखकर भी नहीं सोना चाहिए, ऐसा करना बहुत ही अशुभ माना जाता है। ऐसा करना आपके लिए कई बीमारियों का कारण बन सकता है।
न रखें ये चीजें घर की दक्षिण दिशा में भूलकर भी तुलसी का पौधा, मंदिर, इलेक्ट्रॉनिक सामान या फिर जूते-चप्पल नहीं होने चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को अपने जीवन में नकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। साथ ही इन चीजों को दक्षिण दिशा में रखने से धन की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अगर बच्चों को बुरी संगति में पड़ने से नहीं बचाया गया तो बच्चों का फ्यूचर बर्बाद हो सकता है। पैरेंट्स होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप अपने बच्चे को बुरी संगति से बचाकर रखें। आइए कुछ ऐसी मददगार पैरेंटिंग टिप्स के बारे में जानते हैं जो आपके बच्चों को बुरी संगति की चपेट में आने से बचा सकती हैं। इस तरह की टिप्स को फॉलो कर आप अपने बच्चे के साथ एक मजबूत रिश्ता बनाने में भी कामयाबी हासिल कर पाएंगे।
दोस्त बनने की कोशिश करें बच्चों को गलत संगति में पड़ने से बचाने के लिए आपको सबसे पहले उनका दोस्त बनने की कोशिश करनी चाहिए। अगर उन्हें घर में ही दोस्ती का रिश्ता मिलेगा तो वो बाहर जाकर गलत संगति के लोगों के साथ दोस्ती ही नहीं करेंगे। इसके अलावा अगर कोई गलत संगति वाला शख्स आपके बच्चे के साथ दोस्ती करने की कोशिश करेगा, तो आपका बच्चा इस बारे में सबसे पहले आपको ही बताएगा। इसलिए आपको अपने बच्चे को इस बात का भरोसा दिलाना चाहिए को आप उनके सबसे अच्छे दोस्त हैं।
💉 आरोग्य संजीवनी
🩸
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना: नीम के पत्ते एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुणों से भरपूर होते हैं, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
त्वचा के लिए फायदेमंद: नीम के पत्तों का सेवन या इसका लेप त्वचा की समस्याओं जैसे पिंपल्स, एक्ने, और इन्फेक्शन को दूर करने में मदद करता है। यह त्वचा को साफ और स्वस्थ बनाए रखता है।
मधुमेह नियंत्रित करना: नीम के पत्ते ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं, जो मधुमेह के मरीजों के लिए लाभकारी होता है।
डिटॉक्सिफिकेशन: नीम के पत्तों का सेवन शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे आंतरिक सफाई होती है और किडनी व लिवर को स्वस्थ बनाए रखता है।
पाचन में सुधार: नीम के पत्ते पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और कब्ज, गैस जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं।
दांतों और मसूड़ों की सेहत: नीम के पत्तों से बना मंजन दांतों को मजबूती प्रदान करता है और मसूड़ों की सूजन और इन्फेक्शन को कम करता है।
मलेरिया और डेंगू से बचाव: नीम के पत्तों का सेवन मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से बचाव में सहायक होता है, क्योंकि यह मच्छरों को दूर रखता है।
📖 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
अधिकतर लोग सुबह-शाम पूजा करते हैं, लेकिन उनका मन शांत नहीं होता है। इस संबंध में एक कथा प्रचलित है, जिसमें बताया गया है कि किन कारणों से किसी व्यक्ति का मन शांत नहीं होता है। जानिए ये कथा…
प्रचलित कथा के अनुसार पुराने समय में एक महिला सुबह-शाम पूजा करती थी, साधु-संतों का सम्मान करती थी, लेकिन उसे मन की शांति नहीं मिल रही थी। एक दिन उसके गांव में प्रसिद्ध संत पहुंचे। संत गांव के लोगों को प्रवचन देते थे। जीवन यापन के लिए घर-घर जाकर भिक्षा मांगते थे।
संत उस महिला के घर भिक्षा मांगने पहुंचे। महिला ने संत को खाना देते हुए कहा कि महाराज जीवन में सच्चा सुख और आनंद कैसे मिलता है? मैं सुबह-शाम पूजा करती हूं, लेकिन मेरा मन शांत नहीं है। कृपया मेरे परेशानी को दूर करें। संत ने कहा कि इसका जवाब मैं कल दूंगा।
अगले दिन संत महिला के घर फिर आने वाले थे। इस वजह से महिला ने संत के सत्कार के लिए खीर बनाई। वह संत से सुख और आनंद का ज्ञान जानना चाहती थी। संत महिला के घर पहुंचे। उन्होंने भिक्षा के लिए महिला को आवाज लगाई। महिला खीर लेकर बाहर आई। संत ने खीर लेने के लिए अपना कमंडल आगे बढ़ा दिया।
महिला कमंडल में खीर डालने वाली थी, तभी उसकी नजर कमंडल के अंदर गंदगी पर पड़ी। उसने बोला महाराज आपका कमंडल तो गंदा है, इसमें कचरा पड़ा हुआ है।
संत ने कहा कि हां ये गंदा तो है, लेकिन आप खीर इसी में डाल दो। महिला ने कहा कि नहीं महाराज, ऐसे तो खीर खराब हो जाएगी। आप कमंडल दें, मैं इसे धोकर साफ कर देती हूं। संत ने पूछा कि मतलब जब कमंडल साफ होगा, तभी आप इसमें खीर देंगी? महिला ने जवाब दिया कि जी महाराज इसे साफ करने के बाद ही मैं इसमें खीर दूंगी।
संत ने कहा कि ठीक इसी तरह जब तक हमारे मन में काम, क्रोध, लोभ, मोह, बुरे विचारों की गंदगी है, तब तक उसमें ज्ञान कैसे डाल सकते हैं?
अगर ऐसे मन में उपदेश डालेंगे तो अपना असर नहीं दिखा पाएंगे। इसीलिए उपदेश सुनने से पहले हमें हमारे मन को शांत और पवित्र करना चाहिए। तभी हम ज्ञान की बातें ग्रहण कर सकते हैं। पवित्र मन वाले ही सच्चा सुख और आनंद प्राप्त कर पाते हैं।
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।

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