
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 04 जनवरी 2026
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
*रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास प्रारम्भ
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – रविवार माघ माह के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि 12:30 PM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुनर्वसु 03:11 PM तक उपरांत पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र के देवता अदिति (देवी) हैं,और इसके स्वामी ग्रह (ग्रह देवता) बृहस्पति (गुरु) हैं।
⚜️ योग – वैधृति योग 01:47 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
⚡ प्रथम करण कौलव 12:30 PM तक, बाद
✨ द्वितीय करण : तैतिल 11:09 PM तक, बाद गर
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:54:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:20:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 05:26 एएम से 06:20 ए एम
🌟 अभिजीत मुहूर्त – 12:05 पीएम से 12:47 पी एम
💧 अमृत काल – 01:01 पीएम से 02:27 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त – 02:10 पीएम से 02:51 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 05:35 पीएम से 06:02 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त – 11:59 पीएम से 12:53 ए एम, जनवरी 05
🌌 संध्या मुहूर्त – 05:38 पीएम से 06:59 पी एम
🌸 त्रिपुष्कर योग – 12:29 पीएम से 03:11 पीएम
❄️ रवि पुष्य योग – 03:11 पीएम से 07:15 एएम, जनवरी 05
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग – 03:11पी एम से 07:15 एएम, जनवरी 05
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – माघ प्रारम्भ उत्तर इष्टि/ रवि पुष्य योग/ त्रिपुष्कर योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ माघ स्नानारंभ/ विश्व ब्रेल दिवस, राष्ट्रीय सामान्य ज्ञान दिवस, वीर बल दिवस, अभिनेता आदित्य पंचोली जन्म दिवस, प्रसिद्ध अभिनेता प्रदीप कुमार जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी विष्णु दामोदर चितले जयन्ती, मशहूर संगीतकार राहुल देव बर्मन (आर. डी. बर्मन) स्मृति दिवस, स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली स्मृति दिवस, भारतीय क्रिकेटर सुरेंद्रनाथ जन्म दिवस, पंजाबी गायक गीतकार गुरदास मान जन्म दिवस, मुख्य न्यायाधीश एस.एच कपाड़िया पुण्य तिथि, म्यांमार स्वतंत्रता दिवस, लेखक सरोजिनी साहू जन्म दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया गया है। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।। 🗽 *_Vastu tips* 🗼
रसोई घर में इस बात का अवश्य ही ध्यान रहे कि खाना बनाने का चूल्हा आग्नेय कोण में ही होना चाहिए ।
*चूल्हा ईशान कोण या उत्तर में भूलकर भी ना रखे । ईशान कोण में चूल्हा होने से संतान पर बुरा प्रभाव पड़ता है , धन हानि के साथ अपयश का सामना भी करना पड़ सकता है और उत्तर दिशा में जो कि कुबेर की दिशा है चूल्हा रखने से तमाम प्रयास के बाद भी जीवन में असफलता ही हाथ लगती है, राजा भी रंक हो सकता है । *रसोई घर में खाना बनाने का चूल्हा दीवार से 2 -3 इंच की दूरी बनकर रखना चाहिए दीवार से सटा कर नहीं।
*रसोई घर में खाना बनाने वाले व्यक्ति का मुँख पूर्व की ओर होना चाहिए, इससे खाना पौष्टिक बनता है और खाने वालो का स्वास्थ्य ही ठीक रहता है । *आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार रसोई घर की कोई भी दिवार शौचालय के साथ नहीं लगी होनी चाहिए और रसोईघर, शौचालय या बाथरूम के ऊपर या नीचे भी नहीं होना चाहिए।
*रसोई घर का दरवाजा पूर्व, उत्तर या पश्चिम दिशा में खुलना शुभ माना जाता है । ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ दीमक की दवा लगाने के बाद भी इनके वापस आने के कुछ खास कारण होते हैं. असली दीमक का ठिकाना जमीन के अंदर होता है. हमें जो दिखती हैं, वो सिर्फ सतह पर काम करने वाली दीमकें होती हैं. इनका असली घर गहरी मिट्टी में छुपा रहता है. अगर इलाज वहां तक नहीं पहुंचता, तो दीमक फिर से आ जाती है. अगर दवा पूरे घर के चारों ओर बराबर न छिड़की जाए या कोई जगह छूट जाए, तो दीमक आसानी से उस रास्ते से घर में घुस जाती है. घर में नमी वाली जगहें, दीवारों में दरारें और मिट्टी से सटी लकड़ी की चीजें दीमक के लिए हमेशा के लिए रास्ता बना देती हैं. *दीमक से बचने के आसान तरीके कुछ आसान आदतें अपनाकर आप दीमक को अपने घर से दूर रख सकते हैं. घर में पानी टपकने वाली पाइप या नल हो तो तुरंत ठीक करवाएं. बाथरूम और किचन में पानी जमा न होने दें. घर के फर्श, बंद कमरों और कोनों में हवा आने-जाने का इंतजाम करें. घर के बाहर लकड़ी की चीजें या लकड़ी मिट्टी पर सीधा न रखें. साल में एक बार प्रोफेशनल से दीमक की जांच करवाएं. दीवारों पर मिट्टी की लाइन या खोखली लकड़ी जैसी शुरुआती निशान देखें.
*करें इन चीजों का इस्तेमाल इसके अलावा आप दीमक से छुटकारा पाने के लिए नीम, लौंग, संतरे का तेल और वाइट विनेगर की मदद ले सकते हैं. इन चीजों को आपको दीमक प्रभावित एरिया पर लगाना है. रोजाना इसके प्रयोग से दीमक धीरे-धीरे खत्म होने लगेंगे. 🥂 आरोग्य संजीवनी 🍶
अगर किसी को पथरी की शिकायत है और डाक्टर उसे आपरेशन की सलाह दे रहे है तो थोड़ा रुकिए। पथरी होने पर 7 दिन तक सुबह एक गिलास पानी/छाछ में थोड़ी गरम की हुई फिटकरी घोल कर पी लें, फिटकरी इतनी अवश्य ही घोलें कि पानी खारा हो जाय ।
*इससे पथरी गल कर आसानी से निकल जाती है। अगर पथरी पूरी तरह से ना निकल पाए तो इसे पुनः 10 दिन बार फिर से करें | यहाँ पथरी गलाने का अचूक इलाज है सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे की पथरी टूटकर बाहर निकल जाती है। आम के पत्ते छांव में सुखाकर बहुत बारीक पीस लें और आठ ग्राम रोज पानी के साथ लीजिए, फायदा होगा।
*पथरी की समस्या से निपटने के लिए केला जरूर खाना चाहिए क्योंकि इसमें विटामिन बी 6 होता है। विटामिन बी 6 ऑक्जेलेट क्रिस्टल को बनने से रोकता और तोड़ता भी है। विटामिन बी-6, विटामिन बी के अन्य विटामिन के साथ सेवन करना किडनी में स्टोन के इलाज में काफी मददगार माना जाता है । मिश्री, सौंफ, सूखा धनिया लेकर 50-50 ग्राम मात्रा में लेकर डेढ लीटर पानी में रात को भिगोकर रख दीजिए। अगली शाम को इनको पानी से छानकर पीस लीजिए और फिर पानी में मिलाकर इसका घोल बना लीजिए, इस घोल को पीजिए।ऐसा नियमित रूप से करें शीघ्र ही पथरी निकल जाएगी। 📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
(कल का शेष)
अम्बरीष भगवान के बड़े भक्त थे और समस्त संसार के राजा भी। सब कुछ था उनके पास, पर वे सब कुछ भगवान का मान अपना कर्तव्य करते चले जाते। एक बार उन्होंने वर्ष भर के लिए द्वादशीप्रधान एकादशी व्रत लिया। व्रत की समाप्ति पर पूजा वगैरह करके ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करने की अनुमति मांगी। पारण मतलब व्रत के बाद स्वयं कुछ खाना, जिसे हम लोग आमभाषा में व्रत तोड़ना कहते हैं।
*वे जैसे ही खाने के लिए जाने वाले थे, स्वयं ऋषि दुर्वासा आ गए। अब इतने महान ऋषि के आने पर उनका स्वागत, उनकी पूजा तो करनी ही थी। राजा अम्बरीष ने उनका समुचित सम्मान किया और निवेदन किया कि मेरा व्रत समाप्त हुआ, आप भी आ गए तो पहले आप भोजन कर लें, फिर मैं भी अपना व्रत तोड़ूं। दुर्वासा मान गए और नहाने चले गए।
*दूर से थके आये होंगे, नदी में उतरे तो चित्त शांत हुआ होगा, या प्रभु का ध्यान करने लगे होंगे। कुल मिलाकर देर करने लगे। अब उधर द्वादशी समाप्त होने में थोड़ा ही समय बचा था। व्रत करने के नियम हैं तो व्रत तोड़ने के भी नियम हैं। समय पर व्रत तोड़ना जरूरी है। अम्बरीष को चिंता हुई कि ऐसे तो व्रत का कोई अर्थ ही न रह जायेगा। तो बाकी ब्राह्मणों से पूछा। ब्राह्मणों ने उपाय बताया कि आप पानी पी लीजिए। पानी पीकर पारण (व्रत टूटना) हो भी जाएगा, और पानी कोई अन्न तो है नहीं तो पारण नहीं भी होगा। जब दुर्वासा जी आ जाये तो उन्हें भोजन करा कर खुद भी भोजन कर लीजिएगा। अम्बरीष ने पानी पी लिया। *दुर्वासा अपना भरपूर समय लेकर, खूब देर तक स्नान-ध्यान करके लौटे तो देखा कि अम्बरीष भोजन की थालियां लगाकर खड़े हैं, पर वे समझ गए कि अगले ने मेरी प्रतीक्षा नहीं की। बिना मुझे भोजन कराए ही इसने व्रत तोड़ लिया। इतना अहंकार, ऐसी अमर्यादा कि अतिथि को भोजन कराए बिना ही पारण कर लिया। मुझे इतनी भूख लगी और इस दुष्ट ने मेरा ऐसा अपमान किया। क्रोध से कांपने लगे। आंखें चढ़ गई, मुँह विकृत हो गया, लगे सुनाने कि कैसा पापी है, धन और सत्ता का ऐसा मद, धर्म का ऐसा उल्लंघन, मुझे अतिथि बनाकर भोजन के लिए निमंत्रण दिया और मुझसे पहले ही खुद ठूँस लिया। रुक अभी तुझे मजा चखाता हूँ।
*और झट से अपनी एक जटा उखाड़ कर भूमि पर पटक दी। उससे एक महाभयंकर कृत्या उत्पन्न हुई और वह चींखती हुई तलवार हाथ में लेकर अम्बरीष को मारने के लिए झपटी। बस एक क्षण की बात थी कि अम्बरीष मरे पड़े होते, पर एकाएक ही जाने क्या हुआ कि स्वयं वह कृत्या ही कई टुकड़ों में कटी, भूमि पर पड़ी तड़पती दिखी और अगले ही पल जल कर भस्म हो गई। अम्बरीष, वहां उपस्थित सभी लोगों ने और स्वयं दुर्वासा ने देखा कि एक चक्र बड़ी तेजी से घूम रहा है और अब वह दुर्वासा की ओर बढ़ रहा है। *दुर्वासा, जिनसे संसार कांपता था, उन्होंने अपनी धोती उठाई और दौड़ लगा दी। आगे-आगे दुर्वासा, पीछे-पीछे सुदर्शन चक्र। नदी-नाला, जंगल-पहाड़, जिधर भी भागो, सुदर्शन पीछा न छोड़े। दुर्वासा भागते-भागते पहुंचे ब्रह्मा के पास और गिड़गिड़ाने लगे कि बचा लो मुझे। ब्रह्मा बोले कि मेरी भी एक आयु है, समय आने पर भगवान अपनी सृष्टि समेटेंगे तो मेरा यह लोक भी लीन हो जाएगा। मने कुल मिलाकर इधर-उधर की बातें ही की, क्यों न करते, बचा तो सकते नहीं थे।
*दुर्वासा ने फिर अपनी धोती उठाई और महादेव के पास पहुंच गए। महादेव भी ब्रह्मा जैसी ही बातें करने लगे कि भाई, हम तो उसी प्रभु के अंश भर हैं, अब वे ही तुम्हारे पीछे पड़े हैं तो हम इसमें क्या ही कर सकते हैं। *यहाँ भी कुछ न होता देख दुर्वासा लपके वैकुंठ और विष्णु जी के पैरों में लोट ही गए कि कम से कम आप तो बचा लो। अंतिम आसरा आप ही हो।
*विष्णु बोले कि अगर मुझमें तुम्हें बचाने की सामर्थ्य है तो वह तो ब्रह्मा जी और शंकर जी में भी है। अगर वे दोनों नहीं बचा पाए तो मैं भी क्या ही कर सकता हूँ। मैं भी तो उन्हीं के समान हूँ, उन्हीं की भांति परमेश्वर का एक अंश। *दुर्वासा ने सिर पीट लिया कि क्या गड़बड़झाला है भाई। ब्रह्मा कह रहे कि ईश्वर का अंश हूँ, तो महादेव के पास गया, उन्होंने भी कहा कि वे नहीं बचा सकते, ईश्वर के पास जाओ, अब विष्णु भी यही कह रहे। आखिर कौन किसका भाग है, कौन किससे निकला है, कौन सकल है, और कौन अंश है। और सबसे बड़ी बात कि जब ब्रह्मा, शंकर और विष्णु नहीं हैं ईश्वर तो कौन है? किसके पास जाऊं कि प्राण बचे। उधर वह सुदर्शन बढ़ा चला आ रहा। गर्दन कटे उससे पहले एक बार और प्रयास करता हूँ। विष्णु के चरण पकड़कर बोले कि अब जो हो, बचाइए मुझे। आप तीनों ही मुझे टाल रहे हैं, आप तीनों ही ईश्वर हैं, एक-दूसरे के अंश हैं, उसी ईश्वर के तीन रूप हैं। सुदर्शन हो या त्रिशूल, वह आपकी ही आज्ञा मानते हैं। आप सर्वशक्तिमान हैं, संसार आपकी इच्छा पर चलता है। आप बस उपाय बताइए।
*विष्णु हँसकर बोले कि यह तुम्हारा भ्रम है। मैं कत्तई स्वतन्त्र नहीं, अपितु भक्तों के अधीन हूँ। जो भक्त मुझमें आस्था रखता है, मैं उसमें आस्था रखता हूँ। जिनके हृदय में मैं हूँ, मेरे हृदय में वे हैं। आप इस विप्पति में किस कारण पड़े हैं, वह तो आपको ज्ञात ही है। उपाय तो बड़ा सरल सा है। *दुर्वासा को बात समझ आ गई और वे भागे-भागे अम्बरीष के पास आये और बहुत पछतावा दिखाते हुए अम्बरीष के पैर पकड़ लिए। बस, सुदर्शन गायब हो गया।
इति समाप्ति
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⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। आज प्रतिपदा तिथि को इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिए।



