
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 19 अप्रैल 2026
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 *रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है। *रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
*रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है। 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – रविवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 10:49 AM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीय तिथि (दूज) के स्वामी ब्रह्मा जी हैं, जिन्हें विधाता भी कहा जाता हैं, इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र भरणी 07:10 AM तक उपरांत कृत्तिका 04:35 AM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह है। तथा भरणी नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता यम हैं, जो मृत्यु या काल (समय) के देवता हैं।
⚜️ योग- आयुष्मान योग 08:01 PM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
⚡ प्रथम करण : कौलव 10:49 AM तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल 09:08 PM तक, बाद गर
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:43:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:27:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:23 ए एम से 05:08 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:45 ए एम से 05:52 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:55 ए एम से 12:46 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:22 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:48 पी एम से 07:10 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:49 पी एम से 07:55 पी एम
💧 अमृत काल : रात्रि 02:26 ए एम, अप्रैल 20 से 03:52 ए एम, अप्रैल 20
🗣️ निशिता मुहूर्त : दोपहर 11:58 पी एम से 12:42 ए एम, अप्रैल 20
🌸 त्रिपुष्कर योग : प्रातः 07:10 ए एम से 10:49 ए एम
❄️ रवि योग : प्रातः 04:35 ए एम, अप्रैल 20 से 05:51 ए एम, अप्रैल 20
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – परशुराम जयन्ती/ अक्षय तृतीया/ मासिक कार्तिगाई/ वर्षी तप पारण/ त्रेता युग दिवस/ त्रिपुष्कर योग/ रवि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ आर्य समाजी नेता महात्मा हंसराज जन्म दिवस, भारतीय क्रांतिकारी अनंत लक्ष्मण कान्हेरे शहादत दिवस, राष्ट्रीय लहसुन दिवस, पतंग उड़ाने का दिवस, भारतीय प्रवासी मुकेश धीरूभाई अंबानी जन्म दिवस, भारत के भूतपूर्व 19वें मुख्य चुनाव आयुक्त एच. एस. ब्रह्मा जन्म दिवस, प्रसिद्ध नेता सी. विजय राघवा चारियर स्मृति दिवस, शिक्षाविद् ताराबाई मोदकी जयन्ती, भारतीय उद्योगपति पीटर द नरोन्हा जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी डॉ. उत्तमराव पाटिल स्मृति दिवस, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल राजिंदर सिंह ‘स्पैरो’ पुण्य तिथि, विश्व साइकिल दिवस, विश्व लीवर दिवस, उद्योगपति श्रीमती. विमलाबाई गरवारे पुण्य तिथि, फ़ायर सर्विस सप्ताह, भारत द्वारा उपग्रह क्षेत्र में प्रवेश दिवस (1975), विश्व यकृत दिवस (World Liver Day) ✍🏼 *तिथि विशेष – द्वितीय तिथि को कटोरी फल का तथा तृतीया तिथि है नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। द्वितीय तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीय तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी को बताया गया है। यह द्वितीय की तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीय तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
पूर्व दिशा को सकारात्मकता और ज्ञान की दिशा माना जाता है। इस दिशा में सिर रखकर सोने से मन शांत रहता है और तनाव कम होता है। जो लोग अधिक सोचते हैं या मानसिक दबाव में रहते हैं, उनके लिए यह दिशा खासतौर पर फायदेमंद मानी जाती है। इससे फोकस और सोचने की क्षमता भी बेहतर होती है।
*उत्तर दिशा से क्यों बचने की सलाह आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, उत्तर दिशा में सिर रखकर सोना उचित नहीं माना जाता। ऐसा कहा जाता है कि इससे शरीर और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है। इसके कारण नींद में रुकावट, बेचैनी और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। छोटी आदत से बड़ा बदलाव सही दिशा में सोना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि एक सकारात्मक आदत भी है। जब व्यक्ति यह मानकर सोता है कि वह सही दिशा में है, तो उसका मन भी शांत रहता है। यह छोटा सा बदलाव लंबे समय में बेहतर नींद, अच्छी सेहत और संतुलित जीवनशैली देने में मदद कर सकता है। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ यह सरल घरेलू उपाय स्वाभाविक रूप से आपके होठों की सुंदरता और कोमलता को ठीक और पुनर्जीवित कर सकता है। चलिए इस रसोई के आवश्यक जानकारी के साथ फटे होंठों से मुक्ति पाते हैं।कभी-कभी ठंड का प्रभाव अधिक होनें पर होंठ इस सीमा तक फट जाते हैं। जो काफी कष्ट कारक होता है। *मैं आपको बताने जा रही हूँ, कि घी का उपयोग कैसे कर सकते हैं?
*1.फटे होंठों के लिए घी का उपयोग करने का सबसे अच्छा तरीका एक सरल घर का बना लिप बाम तैयार करना है। बस 5 चम्मच घी लें और इसे गर्म करें और इसमें 1 चम्मच मधुरस , इसे अच्छी तरह मिलाएं। इस मिश्रण को किसी कटोरी में डालें और चीनी और शहद के मिश्रण से अपने होंठों को धीरे से रगड़ने के बाद इसे लगाएं। *बस इतना ध्यान रखें कि ये मुंह के अंदर ना जाने पाए। क्योंकि घी और मधुरस (शहद) का सम्मिश्रण विष (जहर) तुल्य होता है।
*2. इस प्रयोग के अतिरिक्त ही नाभी में घी डालना सबसे श्रेयस्कर है। *_3. घी में एक चुटकी से नमक मिलाइए और इसे दिन में दो बार होंठो और नाभि पर आहिस्ता से लगाइए। 🥝 *आरोग्य संजीवनी* 🍋🟩 अगर आपको लगता है कि शुण्ठी यानी अपनी सूखी अदरक बस चाय का स्वाद बढ़ाने के लिए है, तो तू एकदम गलत ट्रैक पर गाड़ी दौड़ा रहा है। असल में यह जड़ी-बूटी नहीं, पेट के सिस्टम का ‘बाप’ है। आयुर्वेद में इसको ‘विश्वभेषज’ बोला गया है, जिसका मतलब है ऐसी दवा जो पूरी दुनिया की बीमारियों की वाट लगा दे। जब अदरक सूखकर सौंठ बनती है, तो यह ताजी अदरक से ज्यादा पावरफुल और ‘लघु’ यानी हल्की हो जाती है। इसका सबसे बड़ा सीन यह है कि यह तेरे पेट की ‘अग्नि’ को एकदम रॉकेट बना देती है। अगर तेरा हाजमा ढीला है, खट्टी डकारें आ रही हैं या पेट में गुब्बारे जैसा अफारा बन रहा है, तो समझ ले सौंठ ही तेरा असली मसीहा है। यह शरीर के अंदर जमे हुए ‘आम’ यानी उस चिपचिपे कचरे को जलाकर राख कर देती है जो सारी बीमारियों की जड़ होता है।अब बात करते हैं इसके उस स्वैग की जो तेरे जोड़ों के दर्द और सर्दी-जुकाम की बैंड बजा देता है। देख भाई, सौंठ में ऐसी ‘उष्ण’ यानी गरम तासीर होती है कि यह शरीर के कफ और वात दोष को पकड़कर धो डालती है। अगर ठंड के मारे तेरी छाती जाम है या नाक से गंगा-यमुना बह रही है, 📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
पौराणिक कथा: हाथी का सिर ही क्यों प्रचलित कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने अज्ञानतावश गणेश जी का मस्तक काट दिया था, तो माता पार्वती अत्यंत क्रोधित हो गईं। उन्हें शांत करने के लिए शिव जी ने देवताओं को आदेश दिया कि “उत्तर दिशा की ओर जाओ और जो भी माँ अपने बच्चे की तरफ पीठ करके सो रही हो, उसके बच्चे का सिर ले आओ।”
*देवताओं को सबसे पहले एक हथिनी मिली और वे हाथी के बच्चे का सिर (गजमुख) ले आए। शिव जी ने उसे गणेश जी के धड़ पर जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित किया।
*हाथी ही क्यों? कोई और जानवर क्यों नहीं हाथी का सिर लगाना कोई संयोग नहीं था, इसके पीछे गहरे गुण छिपे हैं जो एक ‘नायक’ या ‘देवता’ में होने चाहिए: *विशाल बुद्धि : हाथी का सिर बड़ा होता है, जो महान बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता का प्रतीक है। गणेश जी को ‘बुद्धि के देवता’ माना जाता है, इसलिए विशाल मस्तिष्क उनकी अपार ज्ञान शक्ति को दर्शाता है।
*सुनने की क्षमता : हाथी के कान पंखे जैसे बड़े होते हैं। यह सिखाता है कि एक सफल व्यक्ति को “सुनना ज्यादा और बोलना कम” चाहिए। वे अपने भक्तों की हर छोटी-से-छोटी पुकार सुनने में सक्षम हैं। *सूक्ष्म दृष्टि: हाथी की आँखें छोटी होती हैं, जो एकाग्रता और सूक्ष्म दृष्टि का प्रतीक हैं। यह दर्शाता है कि हमें हर परिस्थिति का बारीकी से निरीक्षण करना चाहिए।
*शक्ति और कोमलता (The Trunk): हाथी की सूंड में इतनी शक्ति होती है कि वह पेड़ उखाड़ सके और इतनी कोमलता भी कि एक छोटी सी सुई भी उठा सके। यह संतुलन एक आदर्श व्यक्तित्व की पहचान है *आध्यात्मिक विकल्प: ‘गज’ का अर्थ
*संस्कृत में ‘गज’ शब्द का अर्थ बहुत गहरा है: ‘ग’ (Ga): इसका अर्थ है ‘लक्ष्य’ या ‘गति’। *‘ज’ (Ja): इसका अर्थ है ‘जन्म’ या ‘उत्पत्ति’।
*इसका अर्थ है वह शक्ति जिससे पूरा ब्रह्मांड उत्पन्न होता है और अंत में उसी में विलीन हो जाता है। इसलिए ‘गजमुख’ होना उनके परब्रह्म होने का प्रतीक है। *क्या कोई और विकल्प था आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें तो नहीं। यदि कोई और सिर होता, तो शायद वे उन गुणों को प्रदर्शित नहीं कर पाते जो एक ‘विघ्नहर्ता’ के लिए आवश्यक हैं। हाथी निर्भयता, गरिमा और शांति का प्रतीक है। वह अपना रास्ता खुद बनाता है, और गणेश जी भी हमारे जीवन के विघ्नों को हटाकर रास्ता बनाने वाले देवता हैं।
*यही कारण है कि उनका स्वरूप इतना विशिष्ट और वंदनीय है। क्या आप गणेश जी के इस ‘गज’ रूप से जुड़ी किसी खास पूजा विधि के बारे में जानना चाहते हैं? •••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤•••• ⚜️ *प्रजापति व्रत दूज को ही मनाया जाता है तथा किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्मा जी का पूजन आवश्यक करना चाहिए। वैसे तो मूहूर्त चिंतामणि आदि ग्रंथों के अनुसार द्वितीय तिथि अत्यंत शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परंतु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिए श्रावण और भद्रपद की द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।



