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Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 30 नवम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 30 नवम्बर 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 *
रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है। *रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
*रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है। 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_

☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – रविवार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि 09:29 PM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी – दशमी के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 01:10 AM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है।उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुध्न्य हैं, जिन्हें जल सर्प या गहरे समुद्र का ड्रैगन भी कहा जाता है।
🔱 योग – वज्र योग 07:12 AM तक, उसके बाद सिद्धि योग 04:21 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
प्रथम करण : तैतिल – 10:27 ए एम तक
द्वितीय करण : गर – 09:29 पी एम तक वणिज
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:32:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:07:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:07 ए एम से 06:02 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:34 ए एम से 06:56 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:49 ए एम से 12:31 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:21 पी एम से 05:48 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:24 पी एम से 06:45 पी एम
💧 अमृत काल : 08:37 पी एम से 10:08 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:43 पी एम से 12:37 ए एम, दिसम्बर 01
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:56 ए एम से 01:11 ए एम, दिसम्बर 01
❄️ रवि योग : 06:56 ए एम से 01:11 ए एम, दिसम्बर 01
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ पंचक जारी/ राष्ट्रीय व्यक्तिगत स्थान दिवस, भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु जयन्ती, राष्ट्रीय मूस दिवस, राष्ट्रीय मेसन जार दिवस, राष्ट्रीय मेथ जागरूकता दिवस, भारतीय प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल स्मृति दिवस, भारतीय तैराक भक्ति शर्मा जन्म दिवस, भारतीय वैज्ञानिक प्रणेता राजीव दीक्षित स्मृति दिवस, राजनीतिक जानकी रामचंद्रन जन्म दिवस, पत्रकार रमेशचंद्र अग्रवाल जन्म दिवस, भारतीय फ़िल्म अभिनेता गिरीश कुमार तौरानी जन्म दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🗼 Vastu tips 🗽
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार पश्चिम दिशा लाभ, अवसर और इच्छा-पूर्ति की दिशा है। यदि यह दिशा दोषपूर्ण हो, तो व्यापार में बढ़ोतरी रुक सकती है और मुनाफा हाथ नहीं लगता। कई बार सौदे होते-होते रुक जाते हैं या लागत के बराबर ही लाभ मिलता है। ऐसे में पश्चिम दिशा का साफ और संतुलित होना जरूरी है।
*किस प्रकार के दोष बढ़ाते हैं नुकसान पश्चिम दिशा में टॉयलेट होना, लाल या हरा रंग अधिक होना या स्टील और तांबे का अत्यधिक प्रयोग व्यापार को प्रभावित करता है। इससे व्यापार में रुकावटें, गलत फैसले और लगातार नुकसान की स्थिति बन सकती है। दिशा दूषित होने पर अवसर होने के बावजूद लाभ प्राप्त नहीं होता। *पश्चिम दिशा में किचन होना वास्तु दोष नहीं माना जाता, लेकिन इसका स्लैब पीले पत्थर का होना चाहिए। पीली स्लैब इस दिशा को ऊर्जा प्रदान करती है और व्यापार में वृद्धि करती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
मकोय हृदय रोग में भी लाभकारी है, इसके पत्तो, फल और तनो का रस निकालकर दो से आठ एमएल तक की मात्रा दिन में दो या तीन बार प्रयोग करने से सभी प्रकार के हृदय रोग का नाश होता है।
*मकोय का काढ़ा पचास से साठ एमएल में दो ग्राम पीपल का चूर्ण डालकर सुबह शाम भोजन के बाद पिलाने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है। मकोय का उपयोग पीलिया (जौंडिस) रोग के उपचार में भी किया जाता है | इसका चालीस से साठ ग्राम काढ़ा में हल्दी दो से पांच ग्राम चूर्ण मिलाकर प्रयोग करने से पीलिया रोग समाप्त होजाता है। *मकोय सभी प्रकार के सुजन के लिए एक उत्तम औषधी है,मकोय के फलों का पेस्ट बनाकर सुजन पर लेप करने से काफी लाभ होता है। मकोय का रस चूहे के विष में भी उत्तम औषधी है,मकोय का ताजा रस निकालकर लेप करने से चूहे का विष शीघ्र ही उतर जाता है।
*मकोय के पत्ते और कोमल तना का प्रयोग साग के रूप में भी किया जा सकता है,तथा पका हुआ फल को खाया भी जा सकता है। *इस प्रकार मकोय एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसे हम लोग खरपतवार समझकर उखाड़ फेकते है,अगर हम इसके गुण धर्म को जाने तो हमलोग इसका औषधीय लाभ ले सकते है |
🥝 आरोग्य संजीवनी 🍈
बहेड़ा के उपयोग व फायदे
*बहेड़े को थोड़े से घी में पकाकर खाने से गले के रोग दूर होते हैं *बहेड़े का छिलका और मिश्री युक्त पेय पीने से आंखों की रोशनी बढ़ जाती है
*हाथ-पैर की जलन में बहेड़े के बीज को पानी के साथ पीसकर लगाने से लाभ मिलता है *बहेड़ा के चूर्ण का लेप बनाकर बालों की जड़ों पर लगाने से असमय सफेद होना रुक जाता है
*बहेड़े के आधे पके हुए फल को पीसकर पानी के साथ सेवन करने से कब्ज से छुटकारा मिलता है *बहेड़े के पत्ते और चीनी का काढ़ा बनाकर पीने से कफ से निजात मिलती है। छाल का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसते रहने से भी खांसी और बलगम से छुटकारा मिलता है
*संस्कृत में बहेड़ा को करशफल, कलीदरूमा व विभीताकी नाम से जाना जाता है। यह पतझड़ वाला वृक्ष है और इसकी औसतन ऊंचाई 30 मीटर होती है। इसके पत्ते अंडाकार और 10-12 सेमी लंबे होते हैं। इसके बीज स्वाद में मीठे होते हैं। बहेड़ा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सभी प्रकार की मिट्टी में इसकी पैदावार की जा सकती है। हालांकि सबसे अच्छी पैदावार नम, रेतीली और चिकनी बलुई मिट्टी में होती है। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ भगवान शिव के बारे में कुछ बातें…..
💫ऋग्वेद में तूफ़ान, युद्ध, मृत्यु, विनाश और क्रूरता के देवता रुद्र, यजुर्वेद में शांति और ज्ञान के देवता शिव बन जाते हैं, अर्थात ऋग्वेद के रुद्र यजुर्वेद में शिव बन जाते हैं। रुद्र का अर्थ है प्रकृति में विनाश की प्रक्रिया, प्राकृतिक तूफ़ान, पृथ्वी और ब्रह्मांड में उथल-पुथल या विस्फोटक घटनाएँ, समुद्र के तूफ़ान, भूकंप, आग, युद्ध और प्रकृति का कोई भी हिंसक रूप और शिव का अर्थ है प्रकृति की शांत अवस्था, पूर्ण शांति, स्थिरता, सुख की स्थिति और पूर्ण सकारात्मक शांत अवस्था। इस प्रकार, हिंसा और शांति का संयोजन महादेव है। लेकिन लिंग आदिवासी लोगों द्वारा की जाने वाली एक प्रतीकात्मक पूजा है, जिनका ऋग्वेद में लिंग पूजकों द्वारा पुरुष जननांगों के उपासक के रूप में उपहास किया गया है। लेकिन बाद में यह लिंग, शिव और रुद्र तीनों एक हो गए या बनाए गए। चूँकि आर्य प्रकृति पूजक थे, इसलिए यहाँ के मूल निवासी प्रतीक पूजक थे, लेकिन समय के साथ प्रतीक और प्रकृति के मेल से इसमें कई नवीनताएँ आईं। सौराष्ट्र के प्रसिद्ध विद्वान शंभूप्रसाद हरप्रसाद देसाई ने अपनी पुस्तक “प्रभास के सोमनाथ” में कहा है कि प्रभास मूलतः एक सूर्य मंदिर था और प्रभास का अर्थ सूर्य की किरणों से भी जुड़ा है।
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इस प्रकार, हमारे आज के शिव ऋग्वेद में तूफान के जनक रुद्र, यजुर्वेद में शांति के जनक शिव और मूल निवासियों की प्रतीक पूजा के मेल से अस्तित्व में आए हैं। लेकिन एक अमेरिकी सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में चालीस प्रतिशत हिंदू अपनी पूजा की शुरुआत सबसे पहले शिव की पूजा से करते हैं, यानी भारत में सबसे अधिक पूजे जाने वाले देवता के रूप में शिव सबसे पहले आते हैं। ऋग्वेद संहिता और यजुर्वेद संहिता में उल्लेख के बाद, एक संपूर्ण पुराण, यानी शिव पुराण, शिव को समर्पित है और भारत भर में बारह ज्योतिर्लिंग शिव मंदिरों को समर्पित हैं। पूरा श्रावण मास और वर्ष की बारह शिवरात्रिएँ शिव आराधना के लिए निर्धारित दिन हैं। मूलतः, शिव प्रकृति, तत्वों और प्रतीकों का समन्वय हैं। संक्षेप में, शिव ब्रह्मांड में व्याप्त अराजकता और शांति या शून्यता का समन्वय हैं।।
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⚜️ *_दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।।

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