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Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 04 दिसम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 04 दिसम्बर 2025
04 दिसम्बर 2025 दिन गुरुवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष कि चतुर्दशी उपरान्त पुण्यतमा पूर्णिमा तिथि है। आज स्नान – दान एवं व्रत आदि की पुण्यतमा पूर्णिमा भी है। आज भगवान श्रीदत्तात्रेय जी की जयन्ती भी है। आज ही प्रदोष काल में नगर भ्रमण अर्थात भगवान दत्त के लिए नगर की परिक्रमा भी किया जाएगा। आज ही दक्षिण भारत में वैखानस दिपम् का त्यौहार भी है, जो प्रदोष काल में ही मनाया जाएगा। आज षोडशी माता त्रिपुरसुंदरी जी की भी जन्म जयन्ती है। आज से ही हुर्थीप्रारंभ (कुर्ग) हो जाएगा। आज यायीजयोग एवं पू्र्वयमघंट योग भी है। आप सभी स्नातनियों को “श्रीदत्तात्रेय जयन्ती, पूर्णिमा व्रत एवं षोडशी माता त्रिपुरसुंदरी जी की जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
*मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। *मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ *दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) *गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
*गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । *गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
*इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_

✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि 08:37 AM तक उपरांत पूर्णिमा तिथि 04:43 AM तक उपरांत प्रतिपदा
🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र कृत्तिका 02:54 PM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – कृतिका नक्षत्र के देवता अग्नि देव हैं, जो अग्नि तत्व के देवता हैं। इसके अतिरिक्त, यह नक्षत्र भगवान कार्तिकेय जिन्हें भगवान मुरुगन या स्कंद भी कहा जाता है।
⚜️ योग – शिव योग 12:34 PM तक, उसके बाद सिद्ध योग
प्रथम करण : वणिज – 08:37 ए एम तक विष्टि – 06:40 पी एम तक
द्वितीय करण : बव – 04:43 ए एम, दिसम्बर 05 तक बालव
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:36:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:07:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:10 ए एम से 06:04 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:37 ए एम से 06:59 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:50 ए एम से 12:32 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:21 पी एम से 05:49 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:24 पी एम से 06:45 पी एम
💧 अमृत काल : 12:48 पी एम से 02:12 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:45 पी एम से 12:39 ए एम, दिसम्बर 05
❄️ रवि योग : 06:59 ए एम से 02:54 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ दत्तात्रेय जयंती/ अन्नपूर्णा जयंती/ षोडशी माता त्रिपुरसुंदरी प्राकट्योत्सव/ त्रिपुर भैरवी जयंती/ कार्तिगाई दीपम्/ मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत/ मार्गशीर्ष पूर्णिमा प्रारम्भ सुबह 08. 37/ पूर्णिमा समाप्ति उ.रात्री 04.43/ भारतीय नौसेना दिवस, राष्ट्रीय मोजा दिवस, इतिहासकार रमेश चंद्र मजूमदार जन्म दिवस, भौतिक वैज्ञानिक श्रीनिवास कृष्णन जन्म दिवस, भारतीय महिला खिलाड़ी सुनीता रानी जन्म दिवस, राष्ट्रपति रामस्वामी वेंकटरमण जयन्ती, पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल जन्म दिवस, अभिनेता जावेद जाफ़री जन्म दिवस, रासायनिक दुर्घटनाओं रोकथाम दिवस ✍🏼 * तिथि विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🏝️ Vastu tips 🏖️
*मरे हुए चूहे का दिखना: संकेत या संयोग शास्त्र के अनुसार मरे हुए चूहे को देखना महज संयोग नहीं, बल्कि कई गहरे संकेत देता है। चूंकि चूहा भगवान गणेश की सवारी माना जाता है, इसलिए इसे अनदेखा करना या नुकसान पहुंचाना सही नहीं माना जाता। इसे अनहोनी के संकेत के रूप में देखा जाता है। ऐसी स्थिति में गणेश स्तोत्र का पाठ और भगवान गणेश को पीले गेंदे के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। *अगर मरा हुआ चूहा आपके रास्ते में दिख जाए तो यह आपके जीवन की यात्रा में आने वाली बाधाओं, चुनौतियों और गलत दिशा की ओर इशारा करता है। वहीं, कार्य स्थल पर इसका मिलना ऑफिस में तनाव, सहकर्मियों से टकराव या अचानक उभरने वाली समस्याओं का प्रतीक होता है। चूहा नया या फूला हुआ हो तो उसके आधार पर संकेत अलग-अलग माने जाते हैं, नया चूहा नई समस्याओं का संकेत है, जबकि फूला हुआ चूहा दबी हुई भावनाओं या लंबे समय से चल रहे तनाव का प्रतीक होता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आंवला या नींबू क्या है ज्यादा फायदेमंद
*आंवला में नींबू से कहीं ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। रोजाना 1 आंवला खाने से डेली की विटामिन सी की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। वहीं नींबू में आंवला से 20 गुना कम विटामिन सी पाया जाता है। आंवला खाने से इम्यूनिटी मजबूत होती है। इससे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। आंवला फैट को पचाने और कंट्रोल करने में मदद करता है। इससे ब्लड शुगर कंट्रोल करना भी आसान हो जाता है। फैट स्टोरेज में भी आंवला मदद करता है। बालों को त्वचा के लिए आंवला को सबसे बेहतरीन फल माना जाता है। आंवला खाने से नज़र तेज होती है और बुढ़ापा दूर रहता है। वहीं नींबू खाने से पाचन में सुधार आता है और पेट फूलने की समस्या कम होती है। मोटापा घटाने में नींबू पानी असरदार काम करता है। रोजाना नींबू खाने से मेटाबॉलिज्म में सुधार आता है। नींबू बॉडी को डिटॉक्स करता है और खराब पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है। नींबू शरीर को तुंरत एनर्जी देने और एक्टिव रखने का काम करता है। इससे आप खुद को कहीं ज्यादा रिफ्रेश फील करते हैं। 🩸 *आरोग्य संजीवनी* 💊
*आइये जानते हैं कि बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज क्या होता है और इस बीमारी से कैसे छुटकारा पा सकते हैं। *दूध और नींबू-रोजाना सुबह खाली पेट एक बड़ा कप गाय का ताजा ठंडा दूध या दूध को गर्म कर लें और ठंडा होने के लिए छोड़ दे जब दूध हल्का गरम रह जाये तो उसमे 1 नीबू निचोड़ ले और तुरंत पी जाये। ऐसा रोजाना करने से बवासीर हफ्ते भर में ही जड़ से खत्म हो सकती है।
*भीमसेनी कपूर और केला-सुबह खाली पेट एक केले का छोटा सा टुकड़ा ले और उसमें भीमसेनी कपूर (एक चने के बराबर) केले के अंदर डाल कर निगल जाए।यह बवासीर के लिए रामबाण इलाज हो सकता है। *नागदोन के पत्ते-रोजाना सुबह-शाम 3-4 नागदोन के पत्ते और 1 या 2 काली मिर्च मिलाकर चबाने से 3 से 4 दिन में ही बवासीर जड़ से खत्म हो सकती है। नागदोन के पत्तों को बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
*काला मुनक्का एक गिलास पानी में 8 से 10 काला मुनक्का लें और उसको रात में भिगोकर छोड़ दे और सुबह खाली पेट मुनक्के को चबा-चबा कर खा जाएं और ध्यान रहे की मुनक्के की बीज को निकल कर फेक देना है और पूरा पानी पि लेना है। ऐसा रोजाना करने से कुछ ही दिनों में बवासीर से छुटकारा पा सकते हैं। 🌹 *गुरु भक्ति योग* 🌷 अर्धनारीश्वर शिव और शक्ति -: पौरोणिक कथाओं के जनुसार सप्तऋषियों में एक ऋषि भृगु थे, वो स्त्रियों को तुच्छ समझते थे। *वो शिवजी को गुरुतुल्य मानते थे, किन्तु माँ पार्वती को वो अनदेखा करते थे। एक तरह से वो माँ को भी आम स्त्रियों की तरह साधारण और तुच्छ ही समझते थे। महादेव भृगु के इस स्वभाव से चिंतित और खिन्न थे। एक दिन शिव जी ने माता से कहा, आज ज्ञान सभा में आप भी चले। माँ ने शिव जी के इस प्रस्ताव को स्वीकार की और ज्ञान सभा में शिव जी के साथ विराजमान हो गई। सभी ऋषिगण और देवताओ ने माँ और परमपिता को नमन किया और उनकी प्रदक्षिणा की और अपना अपना स्थान ग्रहण किया।
*किन्तु भृगु माँ और शिव जी को साथ देख कर थोड़े चिंतित थे, उन्हें समझ नही आ रहा था कि वो शिव जी की प्रदक्षिणा कैसे करे। *बहुत विचारने के बाद भृगु ने महादेव जी से कहा कि वो पृथक खड़े हो जाये।
*शिव जी जानते थे भृगु के मन की बात। वो माँ को देखे, माता ने उनके मन की बात पढ़ ली और वो शिव जी के आधे अंग से जुड़ गई और अर्धनारीश्वर रूप में विराजमान हो गई। *अब तो भृगु और परेशान, कुछ पल सोचने के बाद भृगु ने एक राह निकाली।
*भवरें का रूप लेकर शिवजी के जटा की परिक्रमा की और अपने स्थान पर खड़े हो गए। *माता को भृगु के ओछी सोच पे क्रोध आ गया। उन्होंने भृगु से कहा, भृगु तुम्हे स्त्रियों से इतना ही परहेज है तो क्यूँ न तुम्हारे में से स्त्री शक्ति को पृथक कर दिया जाये। और माँ ने भृगु से स्त्रीत्व को अलग कर दिया। अब भृगु न तो जीवितों में थे न मृत थे। उन्हें आपार पीड़ा हो रही थी। वो माँ से क्षमा याचना करने लगे। तब शिव जी ने माँ से भृगु को क्षमा करने को कहा। माँ ने उन्हें क्षमा किया और बोली, संसार में स्त्री शक्ति के बिना कुछ भी नही। बिना स्त्री के प्रकृति भी नही पुरुष भी नही। दोनों का होना अनिवार्य है और जो स्त्रियों को सम्मान नही देता वो जीने का अधिकारी नही। आज संसार में अनेकों ऐसे सोच वाले लोग हैं। उन्हें इस प्रसंग से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। वो स्त्रियों से उनका सम्मान न छीने। खुद जिए और स्त्रियों के लिए भी सुखद संसार की व्यवस्था बनाए रखने में योगदान दें।
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⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा के दिन उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।।
*_पूर्णिमा माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।

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