ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 13 नवम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 13 नवम्बर 2025
13 नवम्बर 2025 दिन गुरुवार को मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष कि नवमी तिथि है। आज की नवमी को उड़ीसा में कांजी अनला नवमी व्रत मनाया जाता है। आज जैन लोगों का णमोकार 35 व्रत 35 उपवास है। आज सभी सनातनियों को “अनला नवमी व्रत” की हार्दिक शुभकामनाऐं।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
*मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। *मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
*गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए। *गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
*गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । *इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष नवमी तिथि 11:34 PM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मघा 07:38 PM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – मघा नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है, मघा नक्षत्र के देवता पितर हैं, जो पूर्वजों का प्रतिनिधित्व करते हैं। तथा राशि स्वामी सूर्य है।
⚜️ योग – ब्रह्म योग 06:57 AM तक, उसके बाद इन्द्र योग 06:27 AM तक, उसके बाद वैधृति योग
प्रथम करण : तैतिल – 11:10 ए एम तक
द्वितीय करण : गर – 11:33 पी एम तक वणिज
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:21:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:11:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:56 ए एम से 05:49 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:23 ए एम से 06:42 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:44 ए एम से 12:27 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:53 पी एम से 02:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:28 पी एम से 05:55 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:28 पी एम से 06:48 पी एम
💧 अमृत काल : 05:08 पी एम से 06:48 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:32 ए एम, नवम्बर 14
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – पारसी तीर मासारंभ/ कानजी अनला नवमी (उड़ीसा)/ पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह जयन्ती, विश्व दयालुता दिवस, भारतीय अभिनेत्री जूही चावला जन्म दिवस, विश्व दयालुता दिवस, भारतीय क्रिकेटर कोमादुर पद्मनाभन जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय टेम्प्रानिलो दिवस, राष्ट्रीय भारतीय पुडिंग दिवस, राष्ट्रीय माँ और पिता दिवस, भारतीय अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि जन्म दिवस, राजस्थान सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री जय नारायण पूनिया स्मृति दिवस, राष्ट्रीय भारतीय पुडिंग दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🥥 Vastu tips 🌳
मेन गेट पर लगाएं नारियल या शंख इसे आसान लेकिन अचूक उपाय माना जाता है। मुख्य दरवाजे पर नारियल या समुद्री शंख लगाने से घर में समृद्धि और शुद्धता बनी रहती है। यह मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। इसे लाल कपड़े में बांधकर दरवाजे पर टांगें और रोजाना धूप दिखाएं। शंख को गंगाजल से साफ रखें। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं करती और रिश्तों में मधुरता बनी रहती है।
* *स्वास्तिक या ओम का चिन्ह लगाएं हिंदू धर्म में स्वास्तिक और ओम के चिन्ह शुभता और सकारात्मकता के प्रतीक हैं। इन्हें लाल या पीले कपड़े में बांधकर गेट पर लटकाएं और हर दिन रोली का टीका लगाकर पूजा करें। इसे दरवाजे के दाईं ओर लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से नेगेटिव एनर्जी दूर होती है और घर में शुभ शक्ति का वास होता है।
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*वास्तव में —जब इंसान अस्पताल में ज़िन्दगी और मौत के बीच झूल रहा होता है,तब न कोई पूछता है कि “खून देने वाला किस धर्म या जाति का है”,न कोई परवाह करता है कि उसका नाम क्या है या पूजा किससे करता है। *उस समय सिर्फ एक ही बात मायने रखती है — “इंसानियत”।खून का रंग सबका एक होता है — लाल,और वही याद दिलाता है कि हम सब मूल रूप से एक ही मानवता के हिस्से हैं।
*🌿 कुछ छोटे कोट और शायरी के रूप मे:::::::: *धर्म और जाति का नशा उसी पल उतर जाता है,जब ज़रूरत खून की होती है, और पहचान सिर्फ इंसान की रह जाती है।
*मंदिर–मस्जिद सब भूल जाता है इंसान, *जब ज़िन्दगी बचाने को चाहिए किसी का जानदान।
*न धर्म पूछता है, न जात-पात, *बस इंसानियत देती है उस वक़्त साथ।🍀
*🍁 खून का रंग सबका लाल है, फर्क सिर्फ सोच का है। 🍃 *आरोग्य संजीवनी* ☘️ अब आइए जानते हैं कि कैसे करें इसका प्रयोग *सबसे पहले आप एक आक के पत्ता ले लीजिये और अब इसके ऊपर के हल्की लकड़ी को काट लें फिर अब आप आक के चिकने वाले हिस्से को अपने तलवो पर बांध ले। आक का पत्ता आपके तलवो पर टीका रहना चाहिए इसलिए ध्‍यान रहे कि इसे अच्छे से बांध लीजिये।
*इसके बाद आप आक के पत्ते को रात भर बांध इसी प्रकार से अपने तलवे से बंधे रहने दें जैसा कि आप तस्‍वीरों में भी देख सकते होंगे और फिर सुबह इस पत्‍ते को खोल दीजिये। इस प्रक्रिया को लगातार 20 दिनों तक करे। ऐसा करने से आपकी शुगर की समस्या जल्द ही खत्म हो जाएगी। *इसके अलावा ये भी बता दें कि जिन व्यक्तियों को हाइ ब्लड शुगर हो उन्हें, ये सब खाद्य पदार्थ और अन्य कोई भी खाद्य पदार्थ, जिनमें फाइबर अधिक और फैट कम हो, लेने चाहिये। हर उस व्यक्ति, जिसे हाइ ब्लड
*शुगर हो, के लिये खड़ा अनाज उचित नहीं हो सकता । 📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
√●●इस चराचर जगत की माता, जनक, पिता एवं गुरु यही प्रकृति है। त्रिदेव इसके गर्भ में रहते हैं और जो स्वयं सर्वरूप त्रिदेव है, ऐसी शक्ति को मैं जीव रूप से बारंबार नमन करता हूँ। जिससे सब कुछ है, जो सबमें है तथा जिसमें सब है, ऐसी अद्भुत मा से उत्पन्न ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र का मैं स्मरण करता हूँ। इस चिरन्तन शक्ति के उपासक ऋषियों को प्रणाम करता हूँ तथा वर्तमान ऋषि श्री महाराज जी की वन्दना करता हूँ ।
*√●यह ऋत है कि क्रियास्थल का फल वहाँ न होकर अन्यत्र होता है। किसी विशेष काल में जो क्रिया की जाती है, उसका प्रभाव दूसरे काल (उसी क्षण/काल में नहीं) में घटित होता है। एक व्यक्ति जो क्रिया करता है, उसकी उस क्रिया का परिणाम अन्य व्यक्ति (यों) को मिलता है। इसे कुण्डली के माध्यम से यों समझना चाहिये। *√●●पुरुष की कुण्डली में, वह सप्तम भाव में मैथुन क्रिया करता है, गर्भ धारण वहाँ न होकर एकादश भाव में होता है। इस गर्भ की उत्पत्ति अन्यत्र भाव लग्न में होती है। पुत्र के रूप में मान्यता मिलती है, पञ्चम भाव में रोग की उत्पत्ति भाव ६ में होती है। इस रोग से होने वाले कष्ट की प्राप्ति भाव 8 में होती है। इस कष्ट के कारण मृत्यु की प्राप्ति वा अन्त्येष्टि भाव 12 में सम्पन्न होती है। यज्ञ कर्म का आयोजन भाव 12 में होता है। इस यज्ञ से प्राप्त होने वाला सुख भाव 4 में मिलता है। भाग्योदय नवम भाव में होता है। इसके परिणामस्वरूप धनागम होता है, द्वितीय भाव में। धनवान् होने से जो फल मिलता है, उसकी अनुभूति तृतीय भाग में होती है। तृतीय भाव बल है। धन से व्यक्ति अपने को बली समझता है। उसकी भुजाओं में शक्ति आती है। कार्य कहाँ । फल कहाँ । अद्भुत सत्य है।
*√●इस जन्म के कर्मों का फल इसी जन्म में फिर कैसे मिले ? अगला जन्म अनिवार्य है, इस जन्म के फल को पाने के लिये। पिछले जन्म के फल के लिये वर्तमान जन्म मिला है। इस सत्य को कौन नकारेगा ? *√●सभी भाव परस्पर निबद्ध हैं। कोई भाव अपने बल सामर्थ्य से फल नहीं देता। एक विशेष भाव के फल पर अन्य ग्यारह भावों का प्रभाव होता है। अतः किसी भाव के फल कथन में समस्त भावों को देखना आवश्यक है। यह कठिन कार्य है। अतएव फल कहना कठिन कार्य है। इस कठिन कर्म को मैं भलीभाँति कैसे कर सकता हूँ। इसके लिये मैं भाव की शरण में जाता हूँ। भाव भगवान् है। भावाय नमः ।
*√●किसी भाव के मारक होने के मूल में क्या सिद्धान्त है ? कोई भाव मारक क्यों है ? श्री महाराज जी की इच्छा से मैं इस पर विचार करता हूँ। *√●●मुख्य रूप से मारक भाव तीन है-द्वितीय, सप्तम एवं अष्टम मारकता में प्रथम स्थान द्वितीय भाव का, दूसरा स्थान सप्तम भाव का तथा तीसरा स्थान अष्टम भाव का होना पूर्णतः युक्तिसंगत है। कैसे ?
*√★द्वितीय भाव में नाक के दो छिद्र, कान के दो छिद्र, आँख के दो छिद्र तथा मुख का एक छिद्र- ये 7 छिद्र हैं। *√★ सप्तम भाव में एक छिद्र है। पुरुष में इस छिद्र से मूत्र एवं वीर्य बाहर निकलता है, स्त्री में इस छिद्र से मूत्र एवं रजोधर्म का रक्त बाहर निकलता है।
*√★अष्टम भाव में एक छिद्र है। इस छिद्र से मल एवं अपान वायु बाहर निकलती है। *√●छिद्र का अर्थ है- दरार, कटाव, रन्ध्र गर्त, विवर, दोष, त्रुटि, दूषण। छिद् (छेदने) + रक्= छिद्र । जो किसी वस्तु को फाड़ दे, छेद दे, खरोंच दे, खराब कर दे, वह छिद्र है। जिसमें छिद्र होता, वह शुभ नहीं माना जाता। छिद्रयुक्त वस्त्र अशुभ है, छिद्रयुक्त पात्र/ बर्तन अशुभ है, छिद्रयुक्त दीवार अशुभ है, छिद्रयुक्त घर की छत अशुभ है, छिद्रयुक्त छतरी / छाता अशुभ है, छिद्रयुक्त अंग अशुभ है। जो अशुभ है, वह दुःखद है। मारक का अर्थ है-पीडादायक, कष्टकारक, अपमानकर, हानिकर, अशान्तिप्रद, सुखहर, दारिद्रयद तथा प्राणहर जिस भाव में 7 छिद्र हो, वह मारक क्यों न हो ? पर 9 छिद्रों वाली पुरी में 7 छिद्र एक ही भाव में हैं और यह भाव द्वितीय वा धन है। इन छिद्रों से दोष बाहर निकलते हैं। दोष = मल। नाक से नक्टी, कान से खूंट, आँख से कीचड़ तथा मुख से खखार निकलता है। सप्तम भाव में, स्त्री में एक छिद्र में दो छिद्र (मूत्र एवं रजोधर्म का अलग-अलग) होता है तथा पुरुष में एक छिद्र, दो छिद्र का कार्य करता है अर्थात् इस एक छिद्र से मूत्र एवं वीर्य अलग-अलग समयों में निकलता है। अतः मारक क्षमता की दृष्टि से द्वितीय, सप्तम और अष्टम में क्रमश= 4, 2, 1 का अनुपात आता है। स्पष्टता के लिये,4 + 2 + 1 = 7। शरीर में से ये 7 दोष बाहर आते रहते है। इन दोषों से दूषित ये अंग/ भाव कैसे शुभ हो सकते हैं ? यही कारण है कि द्वितीय भाव, सप्तम भाव एवं अष्टम भाव के स्वामी तथा इन भावों में स्थित ग्रह अशुभ फल देते हैं। सबको इनका फल भोगना पड़ता है। अष्टमेश जितना अशुभ फल देता है, उसका दूना सप्तमेश और सप्तमेश का दूना द्वितीयेश अशुभ फल देता है।
*√●अब मैं अल्पमारक भावों की चर्चा करता हूँ। ये भाव हैं- तृतीय, द्वादश एवं षष्ठ। ये भाव भी छिद्रयुक्त हैं। इन भावों के छिद्र अल्पदोषमय हैं, अतः अल्पमारक हैं। *√.★ तृतीय भाव हाथ/कर है। कर में पाँच अंगुलियों के बीच छिद्र/दरार विद्यमान रहती है।
√★ द्वादश भाव पाद/चरण है। पैर में पाँच अंगुलियाँ हैं। इन अंगुलियां के बीच में भी दरार / छिद्र पाये जाते हैं। √★षष्ठ भाव नाभि है। नाभि एक बन्द छिद्र है।
*√●●इस प्रकार करांगुलि के चार छिद्र + पादांगुलि के चार छिद्र तथा नाभि का एक छिद्र-कुल नव छिद्र हुए। इन नव छिद्रों वाले ये तीनों भाव उपमारक हैं। इन छिद्रों से कोई मल नहीं निकलता। इसलिये ये अल्पमारक हैं तथा समानरूप से मारक हैं। *√●कुण्डली के 12 भावों में से 3+3 =6 भाव तो मारक हो गये। बचे 12-6 = 6 भाव । ये भाव मारक नहीं हैं शुभ हैं। इनमें से 1,5,9 भाव अतिशुभ/ नितान्त अमारक हैं तथा 5, 10, 11 भाव सामान्य शुभ हैं। ये छवों भाव सदा शुभफल देते हैं।
*√●●कुण्डलीगत ग्रहों का फल दशा के माध्यम से कहा जाता है। दशा क्या है ? दंश् (दशने दशति)+ अङ + नि. टाप् = दशा। जो मनुष्य की आयु को काटती है, मनुष्य की देह में डंक मारती है, मनुष्य जीवन को प्रभावित करती है, मनुष्य को अपने अधिकार में रख कर उस पर शासन करती है, उसका नाम दशा है। यह दुर्गम है। इसलिये इसे दुर्गा कहते हैं। दशा = दुर्गा। दशाएँ 9 हैं। इसलिये 9 दुर्गाएँ हैं। ये दशाएँ 9 प्रसिद्ध छिद्रों में रहती हैं तथा 9 उपछिद्रों में रहती हैं। ये सभी 9 ग्रहों में प्रविष्ट होकर मनुष्य के जीवन का नियमन करती हैं। इसलिये इनकी संख्या 9 है । 9 मह, दुर्गा (दशा) की 9 मूर्तियाँ हैं। । इन मूर्तियों को मेरा प्रणाम । *√●लग्नेश की दशा सदा शुभ फल देती है। 1, 5, 9 भावों के स्वामियों की दशा नितान्त शुभ फल देती है। 4, 10, 11 भावों के स्वामी भी अपनी दशा में शुभफल देते हैं । 1, 4, 5, 9, 10, 11 भावों में स्थित ग्रह अपनी नैसर्गिक प्रकृति के अनुकूल फल देते हैं। 2, 7, 8 भावों के स्वामियों की दशा में नेष्ट फल मिलता है। 3, 6, 12 भावों के स्वामी भी नेष्ट फल करते हैं। मारक भावों में स्थित ग्रह अपनी दशा में अपने नैसर्गिक स्वभाव के अनुसार कष्ट देते हैं। नाना दशाओं में विशोत्तरी दशा प्रशस्त है।
√●जगत् में 9 अंकों का खेल चल रहा है। आकाश में नवग्रह खेल रहे हैं। बात एक ही है। इस खेल को समझने वाले श्री महाराज जी नित्य प्रणम्य हैं। अंकों की मैत्री ग्रहों के अनुरूप ही होती है। अंकों की मैत्री वा एक रूपता शुभ है जबकी इनकी शत्रुत्रा वा विषमता अशुभ है। उदाहरण के लिये श्री महाराज जी का नाम सकार से है। अतः नाम राशि कुम्भ = 11 = 1 + 1 = 2 अंक होने पर दिल्ली के ‘अपोलो’ में कक्ष संख्या 3602 में स्थान पाये। 3602= 3+6+0+2 = 11 = 1 + – 1 = 2 अंक उन्हें देखने के लिये मैं गया। मेरी राशि भी कुम्भ = 11 = 2 अंक। मैं अकेले न जाकर राजेश्वर को साथ में रखा 1 व्यक्ति + 1 व्यक्ति = 2 अंक में अपने हाथ में 2 आम के सुन्दर फल ले गया । 2 फल = 2 अंक मित्र अंक के मेल से शुभ होना ध्रुव है। यह सब श्री महाराज जी के लिये शुभ हुआ। श्री महाराज जी का शुभत्व सबके लिये शुभ है। बिना उनके सत्यवाक् कैसे लिखा जा सकता है ?
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⚜️ *नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है। *आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।

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