ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 11 नवम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 11 नवम्बर 2025
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 *दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए । *मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
*मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352_

☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि 11:09 PM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 06:18 PM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र के देवता गुरु बृहस्पति हैं, जिन्हें देव गुरु भी कहा जाता है। इसके अलावा, पुष्य नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनिदेव है।
⚜️ योग – शुभ योग 09:44 AM तक, उसके बाद शुक्ल योग
प्रथम करण : विष्टि – 11:32 ए एम तक
द्वितीय करण : बव – 11:08 पी एम तक बालव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:19:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:12:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:55 ए एम से 05:48 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:21 ए एम से 06:41 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:27 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:53 पी एम से 02:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:29 पी एम से 05:56 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:29 पी एम से 06:49 पी एम
💧 अमृत काल : 12:01 पी एम से 01:35 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:32 ए एम, नवम्बर 12
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:17 पी एम से 06:41 ए एम, नवम्बर 12
❄️ रवि योग : 06:41 ए एम से 06:17 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ गण्ड मूल/ रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद जयन्ती, राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, वयोवृद्ध दिवस, प्रसिद्ध अभिनेत्री माला सिन्हा जन्म दिवस, भारतीय रिज़र्व बैंक गवर्नर आई. जी. पटेल जन्म दिवस, भारतीय परमाणु वैज्ञानिक अनिल काकोदकर जन्म दिवस, शिक्षा मंत्री अबुलकलाम आज़ाद जन्म दिवस, भारतीय परमाणु वैज्ञानिक अनिल काकोदकर जन्म दिवस, गुरु गोबिंद सिंह गुरता गद्दी दिवस, युद्धविराम दिवस, अंगोला स्वतंत्रता दिवस, भारतीय वकिल जीवतराम भगवानदास कृपलानी जन्म दिवस, राजनीतिज्ञ सुंदरलाल पटवा जयन्ती ✍🏼 *तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗼 Vastu tips 🛕
*दीपक हमारे घर में प्रतिदिन जलाया जाता है। दीपक का प्रयोग हम भगवान् की पूजा के लिए करते है। कभी गलती से भी दीपक को ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। *शिवलिंग की पूजा हम प्रतिदिन करते है ,पर क्या आप जानते है कभी शिवलिंग ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। कई लोग मंदिर साफ़ करते समय कई बार शिवलिंग ज़मीन पर रखते है। ऐसा कभी न करे। शालिग्राम की पूजा तो सभी करते है। पर आचार्य श्री गोपी राम की एक बात हमेशा ध्यान में रखे कि कभी भी शालिग्राम को ज़मीन पर न रखे। इससे आप के घर कि आर्थिक स्थिति ख़राब हो सकती है।जनेऊ को बहुत पवित्र माना गया है। इसलिए इसे कभी ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। न ही फेकना चाहिए। अगर आप का जनेऊ ख़राब है तो उसे पेड़ की टहनी से बाँध दे या पेड़ की जड़ में डाल दे। शंख का प्रयोग हर रोज पूजा पाठ में किया जाता है। इसलिए कभी भी शंख को ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। शंख बजाने के बाद हमेशा उसे धोकर रखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार भोजन की थाली को भी कभी जमीन पर नहीं रखना चाहिए ऐसा करना भी दुर्भाग्य की वजह बन जाता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
*जोड़ों के दर्द को कम करता है: अगर आपको जोड़ों में दर्द या अकड़न की समस्या है, तो घी के साथ एक कप गर्म दूध पीने से कुछ राहत मिल सकती है। घी ओमेगा-3 फैटी एसिड और सूजन-रोधी यौगिकों से भरपूर होता है, जो सूजन को कम करने और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। *नींद में सुधार: सोने से पहले घी के साथ गर्म दूध पीने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है। दूध और घी दोनों में ट्रिप्टोफैन होता है, जो एक एमिनो एसिड है जो नींद लाने में मदद करता है। दूध की गर्माहट आपके शरीर और मन को आराम देने में मदद कर सकती है, जिससे नींद आने में आसानी होगी
🧋 आरोग्य संजीवनी 🩸
*सर्दियों के मौसम में होंठों का फटना आम है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो यहां बताए गए टिप्स को फॉलो कर आप फटे होंठों को ठीक कर सकते हैं। *फटे होंठों से छुटकारा दिलाने में नारियल तेल भी बेहद कारगर माना जाता है। यह एक बेहतरीन नेचुरल मॉइस्चराइज़र है। ऐसे में दिन में 2-3 बार इसे होंठों पर लगाएं।
*देसी घी या दूध की मलाई रात को सोने से पहले लगाने से होंठ मुलायम होते हैं और ड्राईनेस दूर होती है। *फटे होंठों को ठीक करने के लिए आप दिन में दो से तीन बार एक अच्छे हाइड्रेटिंग लिप बाम या पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल करें। इसके लिए सोने से पहले इसे लिप्स पर अप्लाई करें। शिया बटर या नारियल तेल वाले बाम बेहतर होते हैं।
*अगर होंठों में जलन या दर्द है, तो एलोवेरा जेल लगाएं, यह होंठों को आराम देता है। *शहद एक नेचुरल मॉइस्चराइज़र है और इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। इसे सीधे होंठों पर लगाएं, खासकर रात को सोते समय।
🌸 गुरु भक्ति योग 🌹
*पुरी के जगन्‍नाथजी मंदिर का नाम सुन‍ते ही रहस्‍यों से भरे मंद‍िर की तस्‍वीर सामने आ जाती है। इस मंदिर में अधूरी बनी लकड़ी की मूर्तियों की बात हो या फ‍िर मंद‍िर के ऊपर से क‍िसी भी व‍िमान या पक्षी के न जाने की। ये सारी बातें हैरान करने वाली है। यह मंदिर ही नहीं बल्कि इसके आस-पास भी कुछ ऐसे रहस्‍य हैं जिनके बारे में लोग जानकर हैरान रह जाते हैं। इन्हीं में से एक रहस्‍य है हनुमान जी का। भगवान ने स्‍वयं अपने परम भक्‍त को समुद्रतट पर बांध कर रखा है। *भगवान जब पृथ्‍वी पर अवतर‍ित होते हैं तब देवता-नर-गंधर्व सभी की चाहत होती है क‍ि ईश्‍वर के दर्शन करें। ऐसा ही हुआ जब भगवान जगन्‍नाथजी की मूर्ति स्‍थापना हुई तो पास बहने वाले समुद्र की भी दर्शन की लालसा बढ़ी। पौराण‍िक कथा के अनुसार प्रभु दर्शन की इच्‍छा ल‍िए समुद्र ने कई बार मंदिर में प्रवेश क‍िया। इससे काफी क्षति भी हुई। समुद्र ने यह धृष्‍टता लगातार तीन बार की।
*समुद्र ने जब कई बार मंदिर में प्रवेश क‍िया क्षत‍ि पहुंचाई तो भक्‍तों ने भगवान जगन्‍नाथजी से मदद की गुहार लगाई। क्‍योंक‍ि समुद्र के चलते भक्‍तों का दर्शन कर पाना संभव नहीं हो पा रहा था। तब भगवान जगन्‍नाथजी ने हनुमानजी को समुद्र को न‍ियंत्रित करने के ल‍िए न‍ियुक्‍त क‍िया। पवनसुत ने भी समुद्र को बांध द‍िया। यही वजह है क‍ि पुरी का समुद्र हमेशा शांत रहता है। लेकिन तभी उसने चतुराई दिखाई। *समुद्र को बांधने के बाद हनुमानजी रात-द‍िन वहीं पहरा देते रहते। तब एक द‍िन सागर ने चतुराई द‍िखाई और हनुमानजी की भक्ति को ललकारा। उन्‍होंने कहा क‍ि तुम प्रभु के कैसे भक्‍त हो जो कभी दर्शन के ल‍िए ही नहीं जाते। तुम्‍हारा मन नहीं करता प्रभु जगन्‍नाथ के अनुपम सौंदर्य को निहारने का। तब हनुमानजी ने भी सोचा क‍ि बहुत द‍िन हो गए हैं क्‍यों न आज प्रभु के दर्शन कर ही लें।
*समुद्र से प्रभु के दर्शनों की बात सुनकर हनुमानजी भी जगन्‍नाथजी के दर्शनों को चल पड़ें। तभी उनके पीछे-पीछे समुद्र भी चल पड़ा। इस तरह जब भी पवनसुत मंदिर जाते तो सागर भी उनके पीछे चल पड़ता। इस तरह मंद‍िर में फिर से क्षति होनी शुरू हो गई। तब जगन्‍नाथजी ने हनुमान की इस आदत से परेशान होकर उन्‍हें स्‍वर्ण बेड़ी से आबद्ध कर द‍िया। बता दें क‍ि जगन्‍नाथपुरी में सागरतट पर बेड़ी हनुमानजी का जो प्राचीन मंदिर वही है जहां उन्‍हें भगवानजी ने उन्‍हें बांधा था। *बेड़ी हनुमान मंदिर भक्त और भगवान के बीच अनूठे संबंध की कहानी है. जगन्नाथ स्वामी के दर्शन करने वाले हर भक्त बेड़ी हनुमान जरूर जाते हैं.। इसकी भी वजह बताई जाती है कि जो भक्त जगन्नाथ स्वामी के दर्शन करके आते हैं, हनुमान जी उनकी ही आंखों में झांक कर प्रभु के दर्शन करते हैं.।
*_मंदिर में हनुमान जी का मुख कुछ टेढ़ा है और आंखें चौड़ी हैं. कहते हैं कि जब भगवान उन्हें बांधकर यहां से गए तो वह उसी ओर देखते रहे, जिधर से भगवान गए. शांत स्थल पर बना यह मंदिर मन को भी बेहद शांति देता है।
🙏जय जगन्नाथ 🙏
⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।

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