
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 24 दिसम्बर 2025
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ *दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। *बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
*बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – बुधवार पौष माह के शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि 01:11 PM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – धनिष्ठा नक्षत्र पूर्ण रात्रि तक
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता वसु हैं, तथा धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है।
⚜️ योग – हर्षण योग 04:01 PM तक, उसके बाद वज्र योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 01:11 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 01:30 ए एम, दिसम्बर 25 तक बालव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:48:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:22 ए एम से 06:16 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:49 ए एम से 07:11 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:04 पी एम से 02:45 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:28 पी एम से 05:55 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:30 पी एम से 06:53 पी एम
💧 अमृत काल : 09:23 पी एम से 11:04 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:54 पी एम से 12:48 ए एम, दिसम्बर 25
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को सवाकिलो साबुत मूंग परिपूरित कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – पंचक प्रारम्भ 19.45/ वीर बाल दिवस, राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस, विश्व भारती विश्वविद्यालय स्थापना दिवस, भारतीय पार्श्व गायक मोहम्मद रफी जन्म दिवस, हजरत मोहम्मद साहब जन्म दिवस, प्रसिद्ध हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव जन्म दिवस, भारतीय अभिनेता अनिल कपूर जन्म दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी नारायण भाई देसाई जयन्ती, सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आम्टे जन्म दिवस, असमिया कवि नलिनीबाला देवी पुण्य तिथि
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🗽 Vastu tips ⛲
अगर आप कभी सपने में जलता हुआ दीपक देखते हैं तो यह सपना कई शुभ परिणाम दिलाने वाला साबित हो सकता है। इस सपने का अर्थ होता है कि ज्ञान का प्रकाश आपके जीवन में फैलेगा, साथ ही आपको धन-धान्य की प्राप्ति भी ऐसा सपना देखने के बाद हो सकती है।
*आपको अगर सपने में कभी अनाज का ढेर दिखाई दे तो समझ जाइए आपकी धन से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं। वहीं किसी अनजान स्रोत से धनलाभ का संकेत भी यह सपना माना जाता है। ऐसा सपना आने के बाद आपके जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। *सपने में जल से भरा पात्र दिखना भी शुभ संकेत माना जाता है। पानी का घड़ा या फिर पानी का कोई भी भरा हुआ पात्र अगर आप सपने में देखें तो समझ जाइए आपकी आर्थिक उन्नति होने वाली है। ऐसा सपना आने के बाद करियर के क्षेत्र में भी आपको शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
इन मसालों का करें सेवन:
*जीरा: जीरा अपने पाचन गुणों के लिए जाना जाता है। यह डाइजेस्टिव एंजाइम के प्रोडक्शन को बढ़ाता है, जिससे पाचन तेज़ होता है और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है। एंटीऑक्सीडेंट और थाइमोल से भरपूर यह मसाला जो ब्लोटिंग और गैस की समस्या से बचाव करता है। *सौंफ: सौंफ गैस, ब्लोटिंग और अपच से राहत दिलाने के लिए जान जाता है। इसमें एनेथोल होता है, यह एक ऐसा कंपाउंड जो पेट की सूजन को कम करने और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम की मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है। पाचन में मदद करने और सांसों को ताज़ा करने के लिए खाने के बाद सौंफ चबाई जाती है।
*हल्दी: हल्दी, पेट की सूजन को कम करके पाचन में मदद करती है। इसमें करक्यूमिन नामक एक्टिव कंपाउंड होता है जो पाचन के लिए पित्त को उत्तेजित करके, पेट फूलने और गैस में मदद करती है. आप इसे गर्म पानी/दूध में पाउडर के रूप में या सप्लीमेंट के तौर पर ले सकते हैं। *दालचीनी: दालचीनी, गैस को कम करके पाचन को आसान बनाता है। इसके गुण डाइजेस्टिव एंजाइम को एक्टिवेट करने, बेहतर पाचन को बढ़ाने और अपच को रोकने में मदद करते हैं। दालचीनी डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी बहुत अच्छी है। खाने के बाद शुगर स्पाइक्स को कंट्रोल करता है।
*अजवाइन: पाचन को बेहतर बनाने में अजवाइन का सेवन बेहद फायदेमंद है। इसमें थाइमोल होता है, यह एक ऐसा कंपाउंड जो पेट को ज़्यादा एसिड बनाने से रोकता है। अजवाइन में हल्के एंटीमाइक्रोबियल गुण भी होते हैं जो पेट के संतुलन को बनाए रखते हैं। 💉 *आरोग्य संजीवनी* 💊 बालों में लगाएं दही और कॉफी दही एक शक्तिशाली कंडीशनर है जो बालों को मुलायम बनाने का भी काम करता है। कॉफी के साथ दही मिलाने से बाल रेशमी, चिकने हो सकते हैं। एक कप सादा दही एक बड़ा चम्मच कॉफी पाउडर और नींबू के रस की कुछ बूंदें सभी को एक साथ मिला लें। अब इस मास्क को बालों की जड़ों पर लगाएं और 30 से 40 मिनट के लिए छोड़ दें। थोड़ी देर बार बालों को वॉश कर लें। *बालों में दही और कॉफी लगाने के फायदे बालों में दही और कॉफी लगाना इनकी चमक बढ़ाने में मददगार है। ये पहले तो बालों को हाइड्रेट करता है और फिर इन्हें अंदर के पोषित करता है। इसके अलावा ये बालों में नमी पहुंचाता है और फिर इनके टैक्सचर को बेहतर बनाता है। इसके अलावा ये स्कैल्प के लिए भी फायदेमंद है जो कि बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन को कम करता है। इतना ही नहीं ये कोलेजन और मेलेनिन बूस्टर भी है जो कि बालों में चमक बढ़ाता है। तो, बस इन तमाम कारणों से आपको अपने बालों में दही और कॉफी लगाना चाहिए।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
एक बार देवर्षि नारद भ्रमण करते हुए स्वर्गलोक के नंदनवन पहुंचे, जहां उनकी भेंट देवराज इंद्र से हुई। नारदजी को आते देख इंद्र सम्मान में खड़े हो गए और आदरपूर्वक अपना सिंहासन उन्हें समर्पित कर दिया। वहाँ उपस्थित अप्सराएँ भी विनम्र भाव से उनका अभिवादन करने लगीं।
*कुछ समय बाद इंद्र ने मुस्कराते हुए नारदजी से कहा, “देवर्षे! यहाँ उपस्थित अप्सराओं में से जो भी आपको सबसे सुंदर और प्रिय लगे, उसे आज्ञा दीजिए कि वह आपके समक्ष नृत्य करे। रम्भा, उर्वशी, तिलोत्तमा, मेनका, मिश्रकेशी अथवा घृताची—जिसकी सुंदरता और कला आपको भाए, उसी का नृत्य देखिए।” *इंद्र की बात सुनकर नारदजी ने अप्सराओं की ओर देखा और हल्की मुस्कान के साथ कहा, “तुम सबमें से जो स्वयं को रूप और गुणों में सबसे श्रेष्ठ मानती हो, वही मेरे सामने नृत्य करे।”
*नारदजी की बात सुनते ही अप्सराओं के बीच वाद-विवाद शुरू हो गया। सभी स्वयं को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करने में लग गईं। देवराज इंद्र समझ गए कि उन्होंने व्यर्थ ही यह प्रश्न कर दिया, क्योंकि अब यहाँ नृत्य नहीं, बल्कि विवाद होगा। *नारदजी का उपाय* *तब नारदजी ने शांत भाव से कहा, “इस समस्या का एक उपाय है। यहाँ से कुछ दूरी पर महान तपस्वी ऋषि दुर्वासा आए हुए हैं। जो भी अप्सरा अपने नृत्य से उन्हें प्रसन्न कर लेगी, वही स्वयं को सर्वश्रेष्ठ मान सकती है।”
*नारदजी की यह बात सुनकर सभी अप्सराएँ घबरा गईं, क्योंकि ऋषि दुर्वासा अपने क्रोध और कठोर तपस्या के लिए प्रसिद्ध थे। कोई भी उनकी परीक्षा लेने का साहस नहीं कर पाया। लेकिन “वपु” नामक एक अप्सरा ने इस चुनौती को स्वीकार कर लिया और ऋषि दुर्वासा के पास चली गई। दुर्वासा ऋषि का श्राप
वपु ने ऋषि दुर्वासा के समक्ष नृत्य करना आरंभ किया और उन्हें रिझाने का प्रयास करने लगी। परंतु उसकी हरकतें देख ऋषि दुर्वासा अत्यंत कुपित हो गए। उन्होंने क्रोधपूर्वक उसे श्राप दिया “हे मूर्ख अप्सरा! तेरा अहंकार और चंचल स्वभाव तुझे श्राप का पात्र बनाता है। मैं तुझे सोलह वर्षों तक पक्षी बनने का श्राप देता हूँ। इस अवधि में तेरे चार संतानें होंगी, परंतु एक दिन एक दिव्य शस्त्र के द्वारा तेरा अंत होगा और तब ही तू इस श्राप से मुक्त हो सकेगी!” श्राप सुनते ही वपु विलाप करने लगी, किंतु ऋषि दुर्वासा का क्रोध शांत नहीं हुआ शाप की पूर्णता
*_समय बीता, और वपु अप्सरा एक पक्षी के रूप में परिवर्तित हो गई। उसके चार बच्चे हुए, जो आगे चलकर धर्मपक्षी के नाम से विख्यात हुए। अंततः महाभारत के युद्ध में अर्जुन के बाणों से उस पक्षी का वध हुआ, जिससे वह अपने बच्चों से बिछड़ गई। परंतु इसी बाण द्वारा मरने के पश्चात ही वह दुर्वासा ऋषि के श्राप से मुक्त हो पाई और पुनः अपने दिव्य रूप को प्राप्त कर सकी।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।



