धार्मिकमध्य प्रदेश

Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 11 जुलाई 2025
11 जुलाई 2025 दिन शुक्रवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष कि प्रतिपदा तिथि है। आज से श्रावण मास के व्रत – नियम आरंभ हो जाएगा। श्रावणेवर्जचछाकम् अर्थात श्रावण मास में शाक वर्जित बताया गया है शक का त्याग करना चाहिए श्रावण मास में। आज से मैथिली लोगों का नववर्ष आरम्भ माना जाता है। परन्तु श्रावण मास में नित्य ही कांशी विश्वनाथ भगवान का बिल्वपत्र से अर्चन का नियम बना लेना चाहिए। बल्कि आज से नित्य ही पार्थिव लिंग अपने स्वय के हाथों से निर्मित करके अर्चना करना सर्वश्रेष्ठ होता है। आज से पूर्णतः चातुर्मास्य व्रत के भी सभी नियम पालन आरम्भ हो जाएगा। आज जैन लोग का वीरशाशन जी की जयन्ती है। आप सभी सनातनियों को “श्रावण मास” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
☀️ मास – श्रावण मास प्रारंभ
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि 02:08 AM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 05:56 AM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है।और इसका वैदिक देवता अपस अर्थात् जल देवता है।
🔱 योग – वैधृति योग 08:44 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
प्रथम करण : बालव – 02:10 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 02:08 ए एम, जुलाई 12 तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:45:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:10 ए एम से 04:51 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:30 ए एम से 05:31 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:54 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:41 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:22 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 12:01 ए एम, जुलाई 12 से 01:40 ए एम, जुलाई 12
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, जुलाई 12 से 12:47 ए एम, जुलाई 12
🚕 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – शिव अभिषेक-पूजन प्रारंभ/ श्रावण मास प्रारम्भ/ साईं बाबा उत्सव समाप्ति् (शिर्डी)/ पारसी अस्पंदामर्द मासारंभ/ राष्ट्रीय समुद्री दिवस, विश्व जनसंख्या दिवस, राष्ट्रीय मोजिटो दिवस, विश्व वैदिक दिवस, साहित्यकार अमिताभ घोष जन्म दिवस, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सरदार बलदेव सिंह जयंती, राजस्थान के भूतपूर्व मुख्यमंत्री सी. एस. वेंकटाचार जन्म दिवस, अभिनेत्री उमा देवी खत्री (टून टून ) जन्म दिवस, भारतीय अभिनेता कुमार गौरव जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रांतिकारी साहित्यकार बाबा कांशीराम (मृ.15/10/1943) जयन्ती, भारतीय न्यायाधीश सी. शंकरन नायर जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया गया है। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।।
🗺️ Vastu tips_ 🗽
क्या जीवित कछुआ रख सकते हैं घर में? धार्मिक और वास्तु के नियमों के अनुसार, घर में जीवित कछुआ रखना शुभ हीं होता। धार्मिक मत के अनुसार हर प्राणी स्वतंत्र है और किसी को भी बंधनों में बांधकर आप जीवन में सुख नहीं पा सकते। इसके साथ ही वास्तु के मतानुसार घर में जिंदा कछुआ रखने से नकारात्मकता आ सकती है। इसलिए गलती से भी घर में जिंदा कछुआ न रखें।_
धातु का कछुआ घर में रखें या नहीं? वास्तु के नियमों के अनुसार घर में आप धातु का कछुआ रख सकते हैं। इसे रखने से सकारात्मक ऊर्जा आपके जीवन में आती है। धातु के कछुए को आप उत्तर दिशा में रख सकते हैं। इस दिशा में रखा गया धातु का कछुआ घर में सुख-समृद्धि लाता है।
लकड़ी का कछुआ रखने के नियम आप लकड़ी से बना कछुआ भी अपने घर में रख सकते हैं। हालांकि ये आपको फायदा तभी देगा जब आप इसे घर की पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखेंगे। वास्तु के अनुसार ऐसा करने से सौभाग्य और सफलता जीवन में प्राप्त होती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
छाछ किन्हें पीनी चाहिए? छाछ लगभग सभी के लिए फायदेमंद होती है, लेकिन यह विशेष रूप से लाभकारी है:
पाचन तंत्र की समस्या वाले लोगों को – छाछ में प्रोबायोटिक बैक्टीरिया होते हैं जो आंतों की सेहत सुधारते हैं।
गर्मी के मौसम में – शरीर को ठंडा रखने के लिए यह उत्तम है।
एसिडिटी या अपच की समस्या वाले – छाछ गैस, अपच और जलन को कम करती है।
वजन घटाने वाले लोगों को – यह लो-कैलोरी होती है और पेट भरा हुआ महसूस होता है।
❌ किन्हें नहीं पीनी चाहिए या सावधानी बरतनी चाहिए: सर्दी, खांसी या अस्थमा वाले व्यक्ति – छाछ ठंडी होती है, जिससे परेशानी बढ़ सकती है।
जिन्हें लैक्टोज इन्टॉलरेंस है – उन्हें बचना चाहिए या डॉक्टर की सलाह से पीना चाहिए।
सर्द मौसम में – ठंड में अधिक मात्रा में छाछ नहीं लेनी चाहिए।
🧋 आरोग्य संजीवनी 🍶
त्रिफला चूर्ण लेने के तुरंत बाद खांसी क्यों शुरू हो जाती है?
दरअसल, त्रिफला चूर्ण लेने और खांसी के बीच बहुत ज़्यादा संबंध नहीं है। लेकिन कभी-कभी एक से ज़्यादा चीज़ों के एक साथ आने पर ऐसा हो सकता है।
त्रिफला में मौजूद तीन फल (हरड़, बहेड़ा और आंवला) थोड़े तीखे हो सकते हैं। कुछ संवेदनशील लोगों के लिए, यह तीखापन गले में खराश पैदा कर सकता है, जिससे खांसी हो सकती है।
कुछ लोगों को त्रिफला में मौजूद किसी भी तत्व से एलर्जी हो सकती है। एलर्जी की वजह से गले में सूजन या खुजली हो सकती है, जिससे खांसी हो सकती है।
अगर पाउडर सांस की नली में चला जाए, तो इससे जलन और खांसी हो सकती है। ऐसा खास तौर पर तब हो सकता है, जब आप पाउडर लेने के तुरंत बाद पानी न पिएं।
आयुर्वेद के अनुसार, त्रिफला पित्त दोष को संतुलित करने में मदद करता है। अगर आपके शरीर में पित्त दोष का असंतुलन है, तो त्रिफला लेने से शुरुआत में थोड़ी परेशानी हो सकती है, जिसमें खांसी भी शामिल हो सकती है।
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
गुडाकेश किसे कहा गया है और इसका क्या मतलब है ?
महाभारत में अर्जुन एक ऐसा योद्धा था जिसे नींद नहीं आती थी। उसने अपने नींद पर विजय पा ली थी, जिसके कारण उसका नाम गुडाकेश भी पड़ा था।
गुडाकेशेन’–‘गुडाकेश’ शब्द के दो अर्थ होते हैं
गुडा’ नाम मुड़े हुए का है और ‘केश’ नाम बालों का है। जिसके सिर के बाल मुड़े हुए अर्थात् घुँघराले हैं, उसका नाम ‘गुडाकेश’ है।
गुडाका’ नाम निद्रा का है और ‘ईश’ नाम स्वामी का है। जो निद्रा का स्वामी है अर्थात् निद्रा ले चाहे न ले–ऐसा जिसका निद्रा पर अधिकार है, उसका नाम ‘गुडाकेश’ है।
अर्जुन के केश घुँघराले थे और उनका निद्रा पर आधिपत्य था; अतः उनको ‘गुडाकेश’ कहा गया है।
पौराणिक कथाओं में कुछ धनुर्धरों का जिक्र मिलता है जिन्होंने नींद पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया था या जो कई सालों तक नहीं सोये थे। लेकिन सबके नींद को नियंत्रित कर पाने का कारण अलग-अलग था। जैसे कि लक्ष्मण भी 14 वर्षों के वनवास में एक बार भी नहीं सोये थे लेकिन उन्होंने इसके लिए निंद्रा देवी से वरदान माँगा था। उनके बदले उनकी पत्नी उर्मिला 14 वर्षों तक सोयी थीं। उसी तरह अर्जुन ने भी अपनी नींद पर विजय पा ली थी। नींद पर विजय पाने के कारण अर्जुन को गुडाकेश कहा गया। गुडाकेश का अर्थ होता है – नींद का स्वामी यानि जिसने नींद को अपने वश में कर लिया हो। लेकिन अर्जुन ने नींद पर विजय कैसे पाई और क्यों पाई!!
महाभारत में अर्जुन को नींद न आने का एक प्रमुख कारण था उनकी तीव्र एकाग्रता और उनके लक्ष्यों के प्रति समर्पण। महाभारत के युद्ध के दौरान भी अर्जुन न के बराबर सोया था और नींद न आने के लिए वो आध्यात्मिक योग निद्रा का अभ्यास करता था। योग निद्रा में कोई भी व्यक्ति न पूरी तरह सोता है और न पूरी तरह जागता है, बल्कि वो अपने मस्तिष्क को इतना आराम दे देता है कि उसे नींद की आवश्यकता नहीं होती। सभी देवतागण भी इसी नींद की अवस्था में रहते हैं।
अर्जुन एक महत्वाकांक्षी योद्धा था। उसका मन सदैव अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहता था। वो कभी भी अपने अभ्यास में कमी नहीं छोड़ता था। यहाँ तक कि रात में भी वो अपना अभ्यास जारी रखता था। कहते हैं कि धर्म और अधर्म की लड़ाई, अपनों से युद्ध करने का बोझ और अपने कर्तव्यों की गंभीरता उनके मन को विचलित करती थी। इसलिए, अर्जुन ने स्वयं को इतना अनुशासित कर लिया था कि उसे नींद एक बाधा के समान लगती थी।
अर्जुन ने अपनी नींद पर नियंत्रण पाने के लिए अपने अभ्यास और ध्यान को अपने जीवन का मुख्य हिस्सा बनाया। एक कथा के अनुसार, उसने अंधकार में अभ्यास करना शुरू किया, जिससे वो अंधेरे में भी निशाना साधने में पारंगत हो गया था। लेकिन रात के अँधेरे में भी अभ्यास करने के लिए उसे जागने की आवश्यकता थी। इसलिए, उसने नींद के लिए योग निद्रा का अभ्यास करना शुरू किया, ताकि वो अपना मानसिक संतुलन को बनाए रखने में सफल रहे। योग निद्रा उसे आराम और सक्रियता का संतुलन देता था। इस प्रकार अर्जुन ने धीरे-धीरे अपनी नींद पर विजय पा ली।
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⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। आज प्रतिपदा तिथि को इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।।

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