धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 22 फरवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 22 फरवरी 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष नवमी तिथि 01:19 PM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र ज्येष्ठा 05:40 PM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी – ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है। ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता देवराज इंद्र हैं।
⚜️ योग – हर्षण योग 11:55 AM तक, उसके बाद वज्र योग
प्रथम करण : गर – 01:19 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 01:43 ए एम, फरवरी 23 तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:21:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:39:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:12 ए एम से 06:03 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:37 ए एम से 06:53 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:12 पी एम से 12:57 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:29 पी एम से 03:14 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:14 पी एम से 06:39 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:16 पी एम से 07:32 पी एम
💧 अमृत काल : 08:13 ए एम से 09:56 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 23 से 12:59 ए एम, फरवरी 23
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷 आज का उपाय-मछलियों को काले तिल मिश्रित आटा डालें।
🪵 *वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार : भद्रा/समर्थ रामदास नवमी/ मूल प्रारम्भ/ स्वतंत्रता सेनानी नरसिम्हा रेड्डी स्मृति दिवस, विश्व विचार दिवस, कस्तूरबा गांधी स्मृति दिवस, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर एच. वी. आर. आयंगर स्मृति दिवस, हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री भगवत दयाल शर्मा स्मृति दिवस, मुग़ल सम्राट नसीरुद्दीन हुमायूँ स्मृति दिवस, भारतीय अभिनेता कमल कपूर जन्म दिवस, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानन्द जन्म दिवस, प्रसिद्ध कवि सोहन लाल द्विवेदी जन्म दिवस, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी सहजानंद सरस्वती जयन्ती, मौलाना आज़ाद स्मृति दिवस, सेंट लूसिया स्वतंत्रता दिवस, महेश चंद्र न्य्यरत्ना भट्टाचार्य जन्म दिवस ✍🏼 तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है। 🗺️ *_Vastu tips* 🗽
वास्तु शास्त्र के मुताबिक परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए नए घर में जाने से पहले गृह प्रवेश पूजा जरूर करनी चाहिए। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त पर गृह प्रवेश की पूजा करने से बुरी शक्तियां घर से दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा आती है। इसके साथ ही परिवारवालों पर देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है। गृह प्रवेश करने के बाद ग्रहों का पूजन करना चाहिए। फिर वास्तु देवता का पूजन करना चाहिए। वास्तु पूजन के लिए कुछ शुभ समय भी बताए गए हैं- चित्रा, शतभिषा, स्वाती, हस्त, पुष्य, पुनर्वसु, रोहिणी, रेवती, मूल, श्रवण, उत्तरा फाल्गुनी, धनिष्ठा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, अश्विनी, मृगशिरा और अनुराधा नक्षत्रों में वास्तु पूजन करना शुभ होता है।
इन नक्षत्रों में से किसी भी एक में वास्तु पूजन करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। वास्तु देवता के पूजन के बाद अपने देवी- देवताओं का पूजन करके ब्राह्मणों का पूजन करना चाहिए और उन्हें कुछ दक्षिणा देनी चाहिए। अगर आप सक्षम हैं तो गृह प्रवेश के दिन किसी ब्राह्मण को गाय का दान भी करना चाहिए। इस प्रकार ब्राह्मण आदि की पूजा के बाद जरूरतमंदों को, साधु-संतों को और अपने बंधु-बांधवों को भोजन खिलाना चाहिए। फिर अंत में स्वयं भोजन करके आराम से अपने घर में निवास करना चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गंथोड़ा चूर्ण के क्या फायदे हैं? गंथोड़ा, जिसे सूरन, गुंजन, या पिपर भी कहा जाता है, एक आयुर्वेदिक औषधि है जो औषधीय गुणों से भरपूर है। यह विशेष रूप से शरीर को बल और ऊर्जा प्रदान करने, हड्डियों को मजबूत बनाने और जोड़ों के दर्द में राहत देने के लिए उपयोगी है। गंथोड़ा चूर्ण का उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से होता आ रहा है और इसे प्राकृतिक उपचार के रूप में माना जाता है।
गंथोड़ा चूर्ण के मुख्य फायदे
हड्डियों को मजबूत बनाना गंथोड़ा चूर्ण कैल्शियम और मिनरल्स से भरपूर होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) और जोड़ों की समस्याओं के लिए फायदेमंद है।
🍃 आरोग्य संजीवनी 🍃
कास (खाँसी) में कारगर अश्वगन्धा की 10 ग्राम जड़ों को कूट लें, इसमें 10 ग्राम मिश्री मिलाकर 400 मिली जल में पकाएं, जब आठवां हिस्सा रह जाय तो इसे थोड़ा-थोड़ा पिलाने से कुकुर खाँसी या वात जन्य कास पर विशेष लाभ होता है।
असाध्य कफ विकार_

अश्वगन्धा के पत्तों के 40 मिली घन क्वाथ में 20 ग्राम बहेड़े का चूर्ण, 10 ग्राम कत्था चूर्ण, 5 ग्राम काली मिर्च तथा ढाई ग्राम सैंधानमक मिलाकर 500 मिग्रा की गोलियां बना लें। इन गोलियों को चूसने से सब प्रकार की खाँसी दूर होती है। क्षयजकास में भी यह विशेष लाभदायक है।
हृदय रोग : हृदय-शूल में – 2 ग्राम अश्वगंधा मूल चूर्ण को जल के साथ सेवन करने से वातज-शूल में लाभ होता है।
अश्वगन्धा चूर्ण में बहेड़े के चूर्ण को समान मात्रा में मिलाकर 2-4 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ लेने से उदरकृमियों यानि पेट के कीड़े का शमन होता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
दूल्हा हमेशा घोड़ी पर ही क्यों बैठता है घोड़े पर क्यों नहीं बैठता?
शादी में दूल्हे के घोड़ी पर बैठने की परंपरा सदियों पुरानी है और इसके पीछे कई मान्यताएं और कारण बताए जाते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में:
शक्ति और संयम का प्रतीक: घोड़ी को शक्ति और संयम का प्रतीक माना जाता है। दूल्हे का घोड़ी पर बैठना यह दर्शाता है कि वह अपने भावी जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है और वह अपनी पत्नी और परिवार की जिम्मेदारी निभाने में सक्षम है।
चंचलता और बुद्धि: घोड़ी को घोड़े की तुलना में अधिक चंचल और बुद्धिमान माना जाता है। दूल्हे का घोड़ी पर बैठना यह दर्शाता है कि वह अपनी पत्नी की चंचलता और बुद्धि को समझ सकता है और उसका साथ निभा सकता है।
नई शुरुआत: घोड़ी पर बैठना एक नई शुरुआत का प्रतीक है। दूल्हा घोड़ी पर बैठकर यह संदेश देता है कि वह अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू करने के लिए तैयार है।
समाज में भूमिका: शादी एक सामाजिक आयोजन है और दूल्हे का घोड़ी पर बैठना समाज में उसकी भूमिका को दर्शाता है। यह एक संकेत है कि वह अब एक जिम्मेदार व्यक्ति बन गया है।
ऐतिहासिक कारण: प्राचीन समय में शादी के समय युद्ध भी होते थे। ऐसे में दूल्हे को वीर योद्धा के रूप में दिखाया जाता था और वह घोड़े पर सवार होकर युद्ध के लिए जाता था। धीरे-धीरे समय के साथ युद्ध बंद हो गए लेकिन घोड़े पर बैठने की परंपरा बनी रही।
अन्य कारण: सुविधा: घोड़ी को संभालना घोड़े की तुलना में आसान होता है।
सौंदर्य: सफेद घोड़ी शादी के शुभ अवसर के लिए एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत करती है।
निष्कर्ष: दूल्हे का घोड़ी पर बैठना एक पुरानी परंपरा है जिसके पीछे कई सांस्कृतिक, सामाजिक और प्रतीकात्मक कारण हैं। यह परंपरा दूल्हे की शक्ति, संयम, बुद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है।
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⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।

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