धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 27 सितम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 27 सितम्बर 2025
27 सितम्बर 2025 दिन शनिवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि पंचमी तिथि है। आज की पंचमी को नटपंचमी उड़िसा में कहा जाता है। आज माता स्कंदमाता की उपासना का दिन है। उनके लिए लिखा है – “पंचम्याम् अंगरागन्ध एवं शंकत्यालंकरणानि च” अर्थात आज माता के भक्तों को चाहिए कि वो आज माता को अंगराग एवं अपने सामर्थ्य के अनुसार माता का अलंकार से शृंगार करें। आज बिल्वाभिमंत्रण व्रत भी है। अर्थात आज प्रातः काल बेलवृक्ष को साक्षात् दुर्गा देवी मानकर देवी को शयन से जगाने हेतु मंत्रों द्वारा बोधन किया जाता है। आज उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र से सूर्य देवता हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे।जिसका फल इस प्रकार है – हूं.सू.नपू.स्त्री योग, चालक वाहन, चन्डा नाड़ी, सुन्दर वर्षा का योग है। आज समस्त दिवस रवियोग है। आज यायीजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “माता स्कंदमाता के उपासना” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शनिवार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि 12:04 PM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अनुराधा 01:08 AM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं, जबकि इसके अधिष्ठाता देवता मित्र हैं, जो निष्ठा, सहयोग और सद्भाव के प्रतीक हैं।
⚜️ योग – प्रीति योग 11:45 PM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
⚡ *प्रथम करण : बालव – 12:03 पी एम तक ✨ *द्वितीय करण : कौलव – 01:16 ए एम, सितम्बर 28 तक तैतिल* 🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:12:00_

🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:59:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:36 ए एम से 05:24 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:00 ए एम से 06:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:48 ए एम से 12:36 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:12 पी एम से 03:00 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:12 पी एम से 06:36 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:12 पी एम से 07:24 पी एम
💧 अमृत काल : 01:26 पी एम से 03:14 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:48 पी एम से 12:36 ए एम, सितम्बर 28
❄️ रवि योग : 06:12 ए एम से 07:15 ए एम 01:08 ए एम, सितम्बर 28 से 06:12 ए एम, सितम्बर 28
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मन्दिर में सवाकिलो इमरती चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सूर्य का हस्त नक्षत्र प्रवेश/ नत पंचमी (उड़ीसा)/विश्व पर्यटन दिवस, महान क्रांतिकारी भगत सिंह जयन्ती, राष्ट्रीय क्षमा दिवस, राष्ट्रीय चॉकलेट दूध दिवस, Google जन्म वर्षगाँठ, भारतीय निर्देशक यश चोपड़ा जन्म दिवस, निर्देशक रवि चोपड़ा जन्म दिवस, समाज सुधारक राजा राममोहन राय स्मृति दिवस, प्रसिद्ध पार्श्वगायक महेन्द्र कपूर स्मृति दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
भूमि या भवन खरीदते समय आपको कुंडली भी अवश्य दिखानी चाहिए, क्योंकि कुंजली में शनि और गुरु की स्थिति से पता चल जाता है कि, ली जाने वाली जमीन आपके लिए कैसी रहेगी। अगर भूमि में दोष है तो नीच दिए गए लक्षणों से आप पता कर सकते हैं।
अगर भूमि पर कांटेदार वृक्ष, पेड़-पौधे स्वयं उगे हुए है तो समझ जाइए भूमि जागृत अवस्था में नहीं है। ऐसी जमीन को खरीदने से दिक्कतों का सामना आपको जीवन में करना पड़ सकता है।
जमीन पूरी तरह से बंजर है और उसके आसपास की जगह हरी-भरी है तो ऐसी जमीन को खरीदे से भी आपको बचना चाहिए। भूमि दोष के कारण ही भूमि बंजर रहती है।
अगर किसी भूमि पर स्वयं फूलो के पौधे उगे हैं, हरी-हरी घास भूमि पर है तो इस तरह की जमीन को वास्तु में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसी जमीन पर भवन लगाने से परिवार में समृद्धि आती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
चंद्रमा को जल अर्पण करने का तरीका
समय – चंद्रमा के उदय होने पर (रात को जब चंद्रमा साफ दिखाई देने लगे)। उपवास या व्रत खोलने के समय (जैसे करवा चौथ पर)। सोमवार व्रत में रात्रि को चंद्रमा को जल दिया जाता है।* विधि – पहले साफ जल (गंगाजल या शुद्ध जल) एक तांबे/पीतल के लोटे में भरें। उसमें अक्षत (चावल), सफेद फूल, और कभी-कभी दूध या मिश्री भी डाल सकते हैं। खुले आकाश में खड़े होकर दोनों हाथ जोड़कर लोटे से धीरे-धीरे चंद्रमा की ओर जल अर्पण करें। जल गिरते समय ध्यान रहे कि वह सीधे धरती पर गिरे। अर्घ्य देते समय मंत्र उच्चारण करें – “ॐ चंद्राय नमः” या “ॐ सोमाय नमः”।
भावना – मन में प्रार्थना करें कि चंद्रदेव शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन प्रदान करें। श्रद्धा और आस्था सबसे महत्वपूर्ण है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
🌱 अप्पा मार्ग (चिरचिट्टा/लठजीरा) – जादुई पौधा
आयुर्वेद में दांतों और मसूड़ों की समस्याओं के लिए अप्पा मार्ग का ज़िक्र सदियों से है।
यह पौधा गांवों और सड़कों के किनारे झाड़ियों में आसानी से मिलता है।
➤ इस्तेमाल के 3 तरीके
पत्तियां चबाना:
सुबह 3-4 पत्तियां अच्छी तरह धोकर चबाएं और गम्स पर मसाज करें।
माउथवॉश बनाना:
_1 कप पानी में 4-5 पत्तियां 3-4 मिनट उबालें।

ठंडा करके सुबह-शाम कुल्ला करें।
मंजन या पेस्ट:
सूखी पत्तियों को पीसकर पाउडर बना लें।
इसे सरसों के तेल या शहद के साथ मिलाकर मसूड़ों पर मसाज करें।
लाभ:
गम्स ब्लीडिंग रोकता है।
मुंह की बदबू और कैविटी कम करता है।
दांतों की सेंसिटिविटी घटाता है।
इनफेक्शन को ठीक करने में मदद करता है।
⚠️ सावधानियां
प्रेग्नेंट महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं या गंभीर बीमारी वाले लोग इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
हर 6 महीने में दांतों की डेंटल चेकअप ज़रूर करवाएं।
यह नुस्खा इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि सपोर्टिव उपाय है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक बार भगवान् श्री कृष्ण ने सुदामा जी को तीनों लोकों का स्वामी बना दिया तो, सुदामा जी की संपत्ति देखकर यमराज से रहा न गया? और यम भगवान् को नियम कानूनों का पाठ पढ़ाने के लिए अपने बहीखाते लेकर द्वारिका पहुंच गये। और भगवान् से कहने लगे कि- अपराध क्षमा करें भगवन लेकिन सत्य तो ये है कि यमपुरी में शायद अब मेरी कोई आवश्यकता नही रह गयी है. इसलिए में पृथ्वी लोक के प्राणियों के कर्मों का बही खाता आपको सौंपने आया हूँ और इस प्रकार यमराज ने सारे बहीखाते भगवान् के सामने रख दिये. भगवान् मुस्कुराए और बोले यमराज जी आखिर ऐसी क्या बात है जो इतना चिंतित लग रहे हो. यमराज कहने लगे कि प्रभु आपके क्षमा कर देने से अनेक पापी एक तो यमपुरी आते ही नही है वे सीधे ही आपके धाम को चले जाते हैं और.. फिर आपने अभी अभी सुदामा जी को तीनों लोक दान दे दिए हैं सो अब हम कहाँ जाएं.
यमराज भगवान् से कहने लगे कि प्रभु सुदामा जी के प्रारब्ध में तो जीवन भर दरिद्रता ही लिखी हुई थी. लेकिन आपने उन्हें तीनों लोकों की संपत्ति देकर विधि के बनाये हुए विधान को ही बदलकर रख दिया है अब कर्मों की प्रधानता तो लगभग समाप्त ही हो गयी है. भगवान् बोले कि यम तुमने कैसे जाना कि सुदामा के भाग्य में आजीवन दरिद्रता का योग है. यमराज ने अपना बही खाता खोला तो सुदामा जी के भाग्य वाले स्थान पर देखा तो चकित रह गए. देखते हैं कि जहां ‘श्रीक्षय’ सम्पत्ति का क्षय लिखा हुआ था, वहां स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण ने उन्ही अक्षरों को उलटकर उनके स्थान पर ‘यक्षश्री’ लिख दिया अर्थात कुबेर की संपत्ति,भगवान् बोले कि यमराज जी शायद आपकी जानकारी पूरी नही है..
क्या आप जानते हैं कि सुदामा ने मुझे अपना सर्वस्व अपर्ण कर दिया था तो मैने तो सुदामा के केवल उसी उपकार का प्रतिफल उसे दिया है, यमराज बोले कि भगवान् ऐसी कोन सी सम्पत्ति सुदामा ने आपको अर्पण कर दी उसके पास तो कुछ भी नही. भगवान् बोले कि सुदामा ने अपनी कुल पूंजी के रूप में बड़े ही प्रेम से मुझे चावल अर्पण किये थे जो मैंने और देवी लक्ष्मी ने बड़े प्रेम से खाये थे, और जो मुझे प्रेम से कुछ खिलाता है उसे सम्पूर्ण विश्व को भोजन कराने जितना पुण्य प्राप्त होता है, बस उसी का प्रतिफल सुदामा को मैंने दिया है। राधे-राधे
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।

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