Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 24 अगस्त 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 24 अगस्त 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – रविवार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 11:48 AM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी 02:05 AM तक उपरांत उत्तर फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है। और इसका देवता भग है. पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र को सौंदर्य, प्रेम, और रचनात्मकता का प्रतीक माना जाता है.
⚜️ योग – शिव योग 12:29 PM तक, उसके बाद सिद्ध योग
⚡ प्रथम करण : बव – 11:48 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 12:07 ए एम, अगस्त 25 तक कौलव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:38:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:22:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:27 ए एम से 05:11 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:49 ए एम से 05:55 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:49 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:33 पी एम से 03:24 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:51 पी एम से 07:13 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:51 पी एम से 07:58 पी एम
💧 अमृत काल : 07:22 पी एम से 09:03 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, अगस्त 25 से 12:46 ए एम, अगस्त 25
🌸 त्रिपुष्कर योग : 02:05 ए एम, अगस्त 25 से 05:56 ए एम, अगस्त 25
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 02:05 ए एम, अगस्त 25 से 05:56 ए एम, अगस्त 25
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-विष्णु मंदिर में केसर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार -सर्वार्थ सिद्धि योग/ त्रिपुष्कर योग/ चन्द्र दर्शन/ कलकत्ता शहर स्थापना दिवस, राष्ट्रीय मैरीलैंड दिवस, प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक बसवराज राजगुरु जन्म दिवस, राष्ट्रीय वफ़ल दिवस, कोबे ब्रायंट दिवस, वेसुवियस दिवस, राष्ट्रीय चाकू दिवस, विलियम विल्बरफोर्स दिवस, यूक्रेन स्वतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता सेनानी शिवराम राजगुरु जयन्ती, अभिनेत्री अंजलि देवी जन्म दिवस, अभिनेता मुकेश तिवारी जन्म दिवस, साहित्यकार नरसिंह चिन्तामन केलकर जन्म दिवस, भारत के राष्ट्रीय नेता बाल गंगाधर खेर जन्म दिवस, समाज सुधारक रामकृष्ण गोपाल भंडारकर स्मृति दिवस, समाजशास्त्र के विद्वान राधा कमल मुखर्जी स्मृति दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया गया है। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।।
🏘️ Vastu tips_ 🏚️
भगवान गणेश की चौकी से जुड़े वास्तु टिप्स वास्तु शास्त्र में पूजा पाठ से जुड़े नियमों के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। ऐसे में गणेश जी की पूजा से जुड़े नियमों का पालन आपको गणेश चतुर्थी के दिन करना चाहिए। गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करने के लिए लकड़ी से बनी चौकी आपको घर लानी चाहिए। गणेश जी की चौकी आपको घर के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में रखनी चाहिए और इस दिशा में रखी चौकी पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। चौकी के आसपास के स्थान को फूल, केले के पत्ते आदि से आपको सजाना चाहिए। इस तरह घर में गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना करने से सुख-समृद्धि आपके जीवन में आती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
हल्दी वाला दूध पिएं: हल्दी एंटी-वायरल और उपचार गुणों के लिए जानी जाती है, जो इसे खांसी-ज़ुकाम के मौसम में राहत देने के लिए एक आदर्श विकल्प बनाते हैं। हल्दी में सूजन-रोधी और जीवाणु-रोधी गुण होते हैं, जो फ्लू से लड़ने के लिए ज़रूरी हैं। ऐसे में हल्दी वाला दूध आपको बीमारी से जल्दी और प्राकृतिक रूप से उबरने में मदद करता है।
गर्म पानी का करें सेवन: पीने के लिए हमेशा गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। दिन भर गुनगुना पानी पीने से गले को आराम मिलता है और शरीर से टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) आसानी से बाहर निकल जाता है।
भाप लें: बंद नाक, गले की खराश और जकड़न से राहत पाने के लिए गुनगुने पानी का भाप लेना चाहिए। आप इसमें पुदीने के पत्ते या अजवाइन भी मिला सकते हैं। भाप के साथ आप अपनी डाइट में काढ़ा को भी शामिल करें। अजवायन लहसुन का काढ़ा या फिर अदरक-तुलसी का काढ़ा रोजाना पिएं। इन उपायों को अपनाकर आप मौसम बदलने पर होने वाले सर्दी-जुकाम की समस्या से काफी हद तक बच सकते हैं।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
आयुर्वेद में अश्वगंधा को एक बेहतरीन स्ट्रेस रिलीवर और नींद लाने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है।
उपयोग: एक चम्मच अश्वगंधा पाउडर को एक गिलास गर्म दूध में डालकर सोने से पहले पिएं। यह मानसिक शांति लाने और गहरी नींद में मदद कर सकता है।
जटामांसी को नींद और मानसिक शांति के लिए आयुर्वेद में उपयोग किया जाता है। यह तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।
उपयोग: जटामांसी पाउडर को शहद के साथ मिलाकर लें। आप इसे पानी में भी मिला सकते हैं।
सारिवा तनाव और चिंता को कम करती है और नींद को सुधारती है।
उपयोग: सारिवा का काढ़ा बनाकर सोने से पहले पिएं। यह आपको शांति और आराम देता है।
चंद्रप्रभा वटी यह आयुर्वेदिक औषधि नींद की समस्या को दूर करने और शरीर को आराम देने में मदद करती है।
👉🏼 उपयोग: सोने से पहले 1-2 गोलियां ले सकते हैं, लेकिन इसके उपयोग से पहले एक आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर होगा।
📖 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
एक बार ऋषि दुर्वासा वन में भ्रमण करने को निकले। अचानक उन्हें एक बहुत तेज व अनोखी सुगंध का अनुभव हुआ। वो सुगंध इतनी अच्छी थी कि दुर्वासा स्वयं को रोक नहीं पाए एवं सुगंध की दिशा में बढ़ने लगे। थोड़ी दूर चलने के पश्चात उन्होंने देखा कि एक बहुत रूपवती नारी वहीं सरोवर के तट पर बैठी हुई है। उसके गले में एक अद्भभुत पुष्प हार था जो प्रकाश की भांति जगमगा रहा था और ये मनभावन सुगंध उसी हार से निकल रही थी।
दुर्वासा ने विस्मित स्वर में पूछा कि “हे देवी आप कौन है और इस घने वन में एकाकी क्या कर रही हैं?” इसपर उस कन्या ने उन्हें बताया कि उनका नाम विद्याधरी है और वे वायु की देवी हैं। दुर्वासा ने उनका अभिवादन किया और अपना परिचय देते हुए कहा कि “आपने ये जो पुष्पों की माला पहनी है वो अत्यंत दुर्लभ प्रतीत होती है। इतनी मनभावन सुगंध और इतना तेज प्रकाश तो पृथ्वी के किसी पुष्प में होना असंभव है। आपको ये पुष्पों की माला कहाँ से प्राप्त हुई?”
उनके इस प्रश्न पर उस देवी ने कहा कि “आपका कथन सत्य है। ये साधारण पुष्प नहीं अपितु अति दुर्लभ पारिजात के पुष्पों की माला है जो केवल स्वर्ग लोक में ही मिलते हैं। मेरी सेवा से प्रसन्न होकर स्वयं पवनदेव ने मुझे ये अद्वितीय हार उपहार स्वरुप दिया है।” उस हार के बारे में जानने के पश्चात दुर्वासा ने उसे प्राप्त करने की इच्छा जताई जिसपर विद्याधरी सहर्ष उन्हें वो हार उपहार स्वरुप प्रदान कर अपने लोक लौट गयी।
कुछ समय पश्चात दुर्वासा अपने पिता एवं सप्तर्षियों से मिलने स्वर्गलोक गए जहाँ उन्हें देवराज के दर्शन हुए। ये सोच कर कि पारिजात पुष्पों का वो हार पृथ्वी पर रहने के योग्य नहीं है, दुर्वासा ने वो हार देवराज को उपहार स्वरुप दे दिया। उन्होंने सोचा कि इस अद्वितीय हार को पा कर इंद्रदेव प्रसन्न होंगे किन्तु देवराज ने उस उपहार का उपहास करना प्रारम्भ कर दिया।
उन्होंने कहा कि “हे महर्षि। आप पृथ्वी के वासी हैं इसी कारण कदाचित आपको ये हार अद्भभुत प्रतीत हो रहा है किन्तु ये तो स्वर्ग लोक है और इस प्रकार के असंख्य पुष्प हमारे पारिजात उपवन में हैं। इसका मैं क्या करूँगा? किन्तु अब आपने मुझे उपहार स्वरुप दे ही दिया है तो मैं ये पारिजात माला ऐरावत को ही भेंट कर देता हूँ।” ये कहकर इंद्र ने वो माला ऐरावत के मस्तक पर रख दी। इस प्रकार माला रखे जानें और उसकी तीव्र गंध से ऐरावत को बड़ी असुविधा हुई और उस मादक गंध के मद में आकर ऐरावत ने उस माला को क्षत-विक्षत कर दिया।
अपने ही द्वारा दिए गए उपहार का स्वयं अपने ही सामने इस प्रकार अपमान होता देख कर दुर्वासा को बड़ा क्रोध आया। उन्होंने क्रोधित स्वर में इंद्र से कहा “हे इंद्र! आपने अपनी सम्पदा और ऐश्वर्य के मद में मेरे द्वारा दिए गए उपहार का ऐसा अपमान किया। आप ये भी भूल गए कि उपहार का मूल्य नहीं देखा जाता और वो हमेशा अमूल्य ही होता है। मैं आपको श्राप देता हूँ कि जिस ऐश्वर्य के अभिमान में आपने मेरा इतना अपमान किया वो आपसे सदा के लिए छिन जाएगा और आपके द्वारा शासित तीनों लोक श्रीहीन हो जाएंगे।”
इस प्रकार के श्राप को पाकर इंद्र बड़े भयभीत हुए और उन्होंने बार बार दुर्वासा से क्षमा याचना की किन्तु क्रोधित दुर्वासा ने उन्हें क्षमा नहीं किया एवं स्वर्ग लोक से प्रस्थान कर गए। उनके जाते ही इंद्र एवं अन्य देवता अपनी सारी सम्पदा खो कर श्रीहीन हो गए। जैसे ही शुक्राचार्य को ये समाचार मिला, उन्होंने दैत्यों को स्वर्ग लोक पर आक्रमण करने को कहा। दैत्यराज बलि के नेतृत्व में उन्होंने स्वर्ग लोक पर आक्रमण कर देवराज इंद्र को उनके पद से च्युत कर दिया। विवश हो इंद्र को अन्य देवों के साथ प्राण बचाने के लिए छुपना पड़ा।
स्वर्ग लोक से निकले जाने के पश्चात देवराज परमपिता ब्रह्मा के पास पहुँचे और उन्हें अपनी रक्षा करने को कहा। ब्रह्मदेव ने इंद्र से कहा कि तुमने स्वयं अपने अहंकार के कारण अपनी सम्पदा को खोया है अतः अब तुम्हे अपने सामर्थ्य से उसे पुनः प्राप्त करना होगा। इसपर इंद्र ने अपनी संपत्ति को पुनः प्राप्त करने का उपाय पूछा तब ब्रह्मदेव ने नारायण के साथ परामर्श कर देवों और दानवों को समुद्र मंथन करने का सुझाव दिया जिससे उन्हें उनकी संपत्ति पुनः प्राप्त हो सके।
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⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। आज प्रतिपदा तिथि को इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।।



