धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 08 जुलाई 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 08 जुलाई 2025
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
☀️ मास – आषाढ़ मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 12:38 AM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र ज्येष्ठा 03:15 AM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी – ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है और देवता इंद्र हैं।इसके साथ ही, ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी ग्रह बुध हैं।
⚜️ योग – शुक्ल योग 10:17 PM तक, उसके बाद ब्रह्म योग
प्रथम करण : कौलव – 11:57 ए एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 12:38 ए एम, जुलाई 09 तक गर
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:14:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:46:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:09 ए एम से 04:49 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:29 ए एम से 05:30 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:58 ए एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:42 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:23 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 05:42 पी एम से 07:26 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, जुलाई 09 से 12:47 ए एम, जुलाई 09
❄️ रवि योग : 03:15 ए एम, जुलाई 09 से 05:30 ए एम, जुलाई 09
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवजी का सन्तरे के रस से अभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भौम प्रदोष/रवियोग/ सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खिलाड़ि सौरभ गांगुली जन्म दिवस, राष्ट्रीय फ्रीज़र पॉप दिवस, राष्ट्रीय रास्पबेरी दिवस, राष्ट्रीय ब्लूबेरी दिवस, राष्ट्रीय वीडियो गेम दिवस, गाय प्रशंसा दिवस, राष्ट्रीय एससीयूडी दिवस, राष्ट्रीय फ्रीजर पॉप दिवस, राष्ट्रीय आइसक्रीम संडे दिवस, राष्ट्रीय बादाम के साथ मिल्क चॉकलेट दिवस, SCUD दिवस, प्रधानमंत्री चंद्रशेखर स्मृति दिवस, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बनारसी दास जयन्ती
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🗺️ Vastu Tips
सूर्य देव को जल चढ़ाने का सही तरीका
वास्तु के अनुसार सूर्य देव को जल चढ़ाने के लिए हमेशा तांबे के लोटे का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
इस बात का खास ध्यान रखें कि जल हमेशा सूर्योदय के दौरान ही चढ़ाएं। क्योंकि इस समय जल अर्पित करना काफी लाभदायक माना जाता है।
सूर्य को जल देते समय अपना मुख पूर्व दिशा की ओर रखें।
सूर्य देव को जल अर्पित करते से पहले लोटे में अक्षत, रोली, फूल इत्यादि डाल दें। उसके बाद सूर्य भगवान को जल चढ़ाएं।
सूर्य को जल देते समय ‘ऊं आदित्य नम: मंत्र या ऊं घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।
सूर्य देव को जल चढ़ाने के बाद जो जल जमीन पर गिरता है उसे लेकर अपने मस्तक पर लगा लें। कहा जाता है कि ऐसा करने से सूर्य देव आपकी सारी इच्छाएं पूरी करेंगे।
अगर आपका सूर्य कमजोर है तो नियमित रूप से सूर्य देव को जल दें। ऐसा करने से काफी लाभ मिलेगा।
लाल फूल भी सूर्य देव को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
🚍 सफर में उल्टी? अब नहीं!
कभी बस या ट्रेन में सफर करते हुए आपको अचानक मिचली या उल्टी जैसा महसूस हुआ है? या बार-बार ऐसा होता है कि यात्रा की सोचते ही घबराहट होने लगती है?
तो आप अकेले नहीं हैं। ये एक आम समस्या है, लेकिन इसका हल उतना ही आसान है — खट्टा-मीठा नींबू का अचार।
🤔 उल्टी क्यों होती है यात्रा में?
यात्रा करते समय शरीर के अंदर कुछ प्राकृतिक बदलाव होते हैं जो इस परेशानी को जन्म देते हैं: लगातार गति (घूमना या झटका लगना) दिमाग और कानों के संतुलन को बिगाड़ देती है।
ऑक्सीजन का लेवल गिर सकता है, जिससे चक्कर या मिचली आने लगती है।
पेट में गैस इकट्ठा हो जाती है, जिससे उल्टी जैसा महसूस होता है। लगातार उछलने से अमाशय (stomach) पर दबाव बनता है।
🍋 नींबू का अचार – छोटा लेकिन असरदार उपाय अब बात करते हैं उस देसी जादू की – नींबू का अचार, जो सफर में सबसे बड़ा साथी बन सकता है।
💉 आरोग्य संजीवनी 💊
सिर दर्द के प्रकार
सिर दर्द को मुख्य रूप से दो बड़े वर्गों में बांटा जा सकता है — प्राथमिक सिर दर्द और माध्यमिक सिर दर्द।
प्राथमिक सिर दर्द ये सिर दर्द सीधे मस्तिष्क या सिर की संरचनाओं से नहीं होते, बल्कि वे स्वयं एक बीमारी के रूप में होते हैं। इसके मुख्य प्रकार हैं:
माइग्रेन यह तीव्र और अक्सर एक तरफा सिर दर्द होता है, जिसमें तेज धड़कन जैसी दर्द होती है। इसके साथ मतली, उल्टी, और प्रकाश या आवाज़ के प्रति संवेदनशीलता हो सकती है। माइग्रेन के दर्द में कई घंटे से लेकर दिनों तक दर्द बना रह सकता है।
टेंशन टाइप सिर दर्द यह सबसे सामान्य प्रकार का सिर दर्द है, जिसमें सिर के दोनों ओर दबाव या कसाव जैसा महसूस होता है। यह तनाव, थकान, और मानसिक दबाव की वजह से होता है।
क्लस्टर सिर दर्द यह बहुत ही तेज़ और तीव्र सिर दर्द होता है, जो आमतौर पर एक तरफ आंख के पास या आसपास होता है। यह कुछ हफ्तों या महीनों तक लगातार हो सकता है।
माध्यमिक सिर दर्द यह सिर दर्द किसी अन्य बीमारी या समस्या के कारण होता है, जैसे:
साइनसाइटिस (Sinusitis): नाक के आसपास के साइनस की सूजन की वजह से।
उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure): बहुत तेज़ सिर दर्द का कारण बन सकता है।
सिर में चोट (Head Injury): कोई दुर्घटना या चोट लगने के बाद।
मस्तिष्क संक्रमण या ट्यूमर: बहुत गंभीर मामलों में।
📖 गुरु भक्ति योग_
🕯️
मृत्यु के देवता यम को श्री राम तक पहुंचने की हिम्मत कैसे होती, जब उनके महल का प्रहरी, उनका अनन्य भक्त हनुमान, वज्र सरीखी भुजाएं लिए खड़ा थे? यम का अयोध्या में प्रवेश मानो सिंह के गुफा में घुसने जैसा था। तब लीलाधर राम ने एक अद्भुत योजना बनाई।एक दिन, जब प्रभु राम जान गए कि उनके लौकिक लीला का समापन निकट है, उन्होंने हनुमान से कहा – ‘हे पवनपुत्र, अब यमराज को मेरे पास आने दो। मेरे वैकुंठ धाम जाने का समय आ गया है।’ पर भक्ति के सागर में डूबे हनुमान भला यह कैसे स्वीकार करते?’लेकिन हनुमान जी नहीं मान रहे थे
यम के प्रवेश के लिए श्री हनुमान को हटाना जरुरी था।इसलिए तब भगवान राम ने अपनी मुद्रिका, अपनी प्रिय अंगूठी, महल की धरती के एक छोटे से छिद्र में गिरा दी। व्याकुलता का नाटक करते हुए उन्होंने हनुमान से उसे ढूंढ लाने का आग्रह किया। प्रभु की आज्ञा शिरोधार्य कर, हनुमान पल भर में भौंरे के समान छोटे हो गए और उस रहस्यमय छेद में उतर गए।यह छिद्र मात्र एक बिल नहीं था, बल्कि नागों के लोक, नागलोक की ओर जाने वाली एक लंबी सुरंग थी! वहां हनुमान की भेंट नागों के राजा वासुकी से हुई, जिन्हें उन्होंने अपने आने का कारण बताया। वासुकी हनुमान को नागलोक के मध्य में ले गए, जहां अंगूठियों का एक विशाल पर्वत खड़ा था!
‘यहां आपको श्री राम की अंगूठी अवश्य मिल जाएगी,’ वासुकी ने कहा। हनुमान उस अथाह ढेर को देखकर सोच में पड़ गए – भूसे के ढेर में सुई ढूंढना भी इतना मुश्किल न होगा! किस्मत ने साथ दिया, और पहली जो अंगूठी हनुमान के हाथ लगी, वह भगवान श्री राम की ही थी! आश्चर्य तब और गहरा गया, जब दूसरी अंगूठी भी वही निकली। वास्तव में, उस पूरे पर्वत पर जितनी भी अंगूठियां थीं, सब एक समान थीं! हनुमान का मस्तिष्क चकरा गया – ‘इसका क्या अर्थ है?’
वासुकी मंद-मंद मुस्कुराए और बोले, ‘हे वानरश्रेष्ठ, यह संसार सृष्टि और विनाश के चक्र में घूमता रहता है, और इसके मध्य में कर्म का पहिया चलता है। भगवान राम ने अवतार लेकर यही सिखाया है कि कर्म को कैसे जिया जाए। हर सृष्टि चक्र एक कल्प कहलाता है, और हर कल्प में चार युग होते हैं।’
वासुकी ने आगे कहा, ‘दूसरे युग, त्रेता युग में, भगवान राम अयोध्या में जन्म लेते हैं। एक वानर उनकी अंगूठी का पीछा करता है, और पृथ्वी पर राम मृत्यु को प्राप्त होते हैं। यह अंगूठियों का ढेर ऐसे ही सैकड़ों-हजारों कल्पों से बनता आ रहा है। सभी अंगूठियां सत्य हैं। गिरती रहीं और इनका अंबार बढ़ता रहा। भविष्य के रामों की अंगूठियों के लिए भी यहां पर्याप्त स्थान है।’
अब हनुमान समझ गए कि उनका नागलोक में आना और अंगूठियों के पर्वत से मिलना कोई साधारण घटना नहीं थी। यह स्वयं श्री राम का तरीका था उन्हें यह समझाने का कि मृत्यु एक अटल सत्य है, जिसे कोई रोक नहीं सकता। भगवान राम मृत्यु को प्राप्त होंगे और फिर से जन्म लेंगे।
हे मनुष्य! तुम्हें भवसागर से पार होने के लिए यह सुंदर मानव शरीर रूपी नौका मिली है। कर्म की पतवार को ठीक से थामना होगा। जरा सी चूक, और वासना, अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष के भंवर में पड़कर यह नौका डूब जाएगी! सतर्क रहो, कहीं ऐसा न हो कि तुम स्वयं ही अपनी मुक्ति के मार्ग में बाधा बन जाओ!
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।

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