धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 16 अप्रैल 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 16 अप्रैल 2025
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार बैशाख माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 01:17 PM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अनुराधा 05:55 AM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र के स्वामी शनि हैं। अनुराधा नक्षत्र के देवता मित्र हैं, जो 12 आदित्यों में से एक हैं।
⚜️ योग – व्यातीपात योग 12:18 AM तक, उसके बाद वरीयान योग
प्रथम करण : विष्टि – 01:16 पी एम तक
द्वितीय करण : बव – 02:22 ए एम, अप्रैल 17 तक बालव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:42:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:18:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:26 ए एम से 05:10 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:48 ए एम से 05:55 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:46 पी एम से 07:09 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:47 पी एम से 07:54 पी एम
💧 अमृत काल : 06:20 पी एम से 08:06 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:58 पी एम से 12:43 ए एम, अप्रैल 17
सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
💦 अमृत सिद्धि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-गणेश मंदिर में मूंग के लड्डू चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ श्री गणेश चतुर्थी (चंद्रोदय रात्रि 10:11 मि.)/भद्रा/ विश्व आवाज़ दिवस, पुलिस दिवस, विजय दिवस, मुक्ति दिवस (वाशिंगटन डीसी) फोरस्क्वेयर दिवस, राष्ट्रीय बीन काउंटर दिवस, हॉलीवुड के दिग्गज चार्ली चैपलिन जन्म दिवस, प्रसिद्ध सिख नेता और क्रांतिकारी रणबीर सिंह स्मृति दिवस, प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस पुण्यतिथि, भारतीय अभिनेत्री लारा दत्ता जन्म दिवस, भारतीय राजनयिक मदनजीत सिंह जन्म दिवस, रेल सप्ताह, फ़ायर सर्विस सप्ताह, भारतीय रेल परिवहन दिवस (1853)
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🛫 Vastu tips_ 🏚️
राधा-कृष्ण की ऐसी तस्वीर लगाएंअपने बेडरूम में भगवान कृष्ण और राधा रानी की ऐसी तस्वीर लगाएं जिसमें दोनों एक दूसरे को प्रेम भाव से देख रहे हों। इस प्रकार की तस्वीर पति-पत्नी को अपने कमरे में जरूर लगानी चाहिए। ऐसा करने से जीवनसाथी के साथ रिश्ता मजबूत होता है और पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है।समुद्री नमक कमरे से नकारात्मकता रखेगा दूरएक छोटी कटोरी में थोड़ा सा समुद्री नमक रखकर इसे अपने कमरे के बेड के नीचे रख लें। साथ ही, इसे सप्ताह में एक बार जरूर बदलें। इस नमक के उपाय को करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और कमरे में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा, इस उपाय से वैवाहिक जीवन में भी खुशहाली आती है।ताजे फूल रखेंपति-पत्नी के रिश्ते में मिठास और प्रेम बढ़ाने के लिए आप बेडरूम में ताजे फूल भी रख सकते हैं। लेकिन इस बात का ख्याल रखें की इन फूलों को रोज जरूर बदलना चाहिए। मुरझाए हुए फूल बेडरूम में रखने से अशुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। अगर आप रोज कमरे में ताजे फूल रखती हैं, तो इनकी महक से कमरे में खुशनुमा माहौल बना रहता है और पति-पत्नी के जीवन में प्रेम बढ़ता है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
वृद्धावस्था में इन बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए,
अपने स्वंय के स्थायी आवास पर रहें ताकि स्वतंत्र जीवन जीने का आनंद ले सकें !
अपना बैंक बैलेंस और भौतिक संपति अपने पास रखें , अति प्रेम में पड़कर किसी के नाम करने की ना सोंचे !
अपने बच्चों के इस वादे पर निर्भर ना रहें कि वो वृद्धावस्था में आपकी सेवा करेंगे , क्योंकि समय बदलने के साथ उनकी प्राथमिकता भी बदल जाती है और कभी-कभी न चाहते हुए भी वे कुछ नहीं कर पाते हैं !
उन लोगों को अपने मित्र समूह में शामिल करें जो आपके जीवन को प्रसन्न देखना चाहते हों , यानी सच्चे हितैषी हों ! ….
किसी के साथ अपनी तुलना ना करें और ना ही किसी से कोई उम्मीद रखें !
अपनी संतानों के जीवन में दखल अन्दाजी ना करे , उन्हें अपने तरीके से अपना जीवन जीने दें और आप अपने तरीके से जीवन व्यतीत करें !
आप अपनी वृद्धावस्था का आधार बनाकर किसी से सेवा करवाने तथा सम्मान पाने का प्रयास कभी ना करें !
लोगों की बातें सुनें लेकिन अपने स्वतंत्र विचारों के आधार पर निर्णय लें !
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
सफेद मूसली के गुण, लाभ और प्रयोग –
यह शीत, लघु, स्नेहन एवं उत्तम बल्य है। इसमें स्टार्च न होने के कारण इसको मधुमेह में दिया जा सकता है। सभी प्रकार के दौर्बल्य में १ तोला चूर्ण १ तोला चीनी मिलाकर दूध के साथ देते हैं।
मात्रा – चूर्ण ३ से 5 ग्राम
बाजार में सफेद मूसली की जगह हल्की क्वालिटी की शतावरी का चूर्ण बेचा जा रहा है।
शतावरी के इन कन्दों को कुछ लोग सफेद मुसली मानते हैं तथा पहले जिस सफेद मुसली का वर्णन किया जा चुका है उसे शतावरी भेद मानते हैं। इसका भी उपयोग सफेद मुसली के समान किया जाता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
भीष्म पितामह ने महाभारत के युद्ध में कौरवों की तरफ से हिस्सा लिया था। पांडवों के लिए उनकी तरफ से लड़ना आसान नहीं था। वे उम्र में काफी बड़े थे और सम्मानित भी थे।
उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान भी प्राप्त था। यानी जब तक वे चाहेंगे तब तक उनकी मृत्यु नहीं होगी। युद्ध में भीष्म पितामह को अर्जुन ने अपने बाणों से घायल कर दिया और उन्हें बाणों की शय्या पर लिटा दिया। वे कई दिनों तक बाणों की शय्या पर लेटे रहे।
क्या थी भीष्म पितामह की अंतिम इच्छा
भीष्म पितामह के पिता ने उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान दिया था। अपनी अंतिम इच्छा के कारण वे 58 दिनों तक शरशय्या पर लेटे रहे। उन्होंने अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण काल का इंतजार किया जो 58 दिनों के बाद शुरू हुआ। उन्होंने उत्तरायण काल में अपनी इच्छा से प्राण त्याग दिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण काल को बहुत ही शुभ माना जाता है। इस समय मृत्यु को सबसे उच्च स्थान प्राप्त होता है।
क्या है इसके पीछे की कहानी भीष्म पितामह ने 58 दिनों के बाद अपने प्राण त्याग दिए जब वे बाणों की शय्या पर लेटे थे। उस समय सभी लोग उनसे मिलने आए, तभी श्री कृष्ण भी आए, तब भीष्म पितामह ने श्री कृष्ण से पूछा कि आप तो सबके ज्ञाता हैं। सब जानते हैं, बताओ मैंने ऐसा कौन सा पाप किया था जिसकी इतनी भयंकर सजा मिली, तब श्री कृष्ण ने कहा पितामह! आपके पास वह शक्ति है, जिससे आप अपना पिछला जन्म देख सकते हैं। आपको स्वयं देखना चाहिए था।
इस पर भीष्म पितामह ने कहा, हे देवकी नंदन! मैं यहाँ अकेला पड़ा क्या कर रहा हूँ? मैंने सब कुछ देख लिया है, मैंने अब तक 100 जन्म देख लिए हैं। मैंने उन 100 जन्मों में एक भी ऐसा कर्म नहीं किया, जिसका परिणाम यह हो कि मेरा पूरा शरीर बंधा हुआ है, हर आने वाला क्षण और अधिक पीड़ा लेकर आता है। श्री कृष्ण ने उत्तर दिया, तुम एक भाव और पीछे जाओ, तुम्हें उत्तर मिल जाएगा।
भीष्म को याद आया 101 वर्ष पुराना जन्म भीष्म ने ध्यान किया और देखा कि 101 भाव पहले वे एक नगर के राजा थे। वह अपने सैनिकों की एक टुकड़ी के साथ सड़क पर कहीं जा रहा था। एक सैनिक दौड़ता हुआ आया और बोला, “हे राजन! सड़क पर एक साँप पड़ा है। अगर हमारी सेना उसके ऊपर से गुजरेगी, तो वह मर जाएगा।” भीष्म ने कहा, “एक काम करो। इसे लकड़ी के टुकड़े में लपेटो और झाड़ियों में फेंक दो।” सैनिक ने वैसा ही किया। उसने साँप को लकड़ी के टुकड़े में लपेटा और झाड़ियों में फेंक दिया। दुर्भाग्य से, झाड़ियाँ काँटेदार थीं। साँप उनमें फंस गया। जितना वह उनसे निकलने की कोशिश करता, उतना ही फंसता जाता। काँटे उसके शरीर में चुभते गए। खून बहने लगा। धीरे-धीरे वह मौत की ओर बढ़ने लगा। 18 दिनों की पीड़ा के बाद उसने अंतिम साँस ली।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।

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