Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 19 फरवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 19 फ़रवरी 2025
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि 07:32 AM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र स्वाति 10:39 AM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी – स्वाति नक्षत्र इसका स्वामी राहु यानि अधंकार है।इसका रंग काला है। इसके देवता वायु और सरस्वती हैं।
⚜️ योग – वृद्धि योग 10:48 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 07:32 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 08:47 पी एम तक बव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:22:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:38:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:14 ए एम से 06:05 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:40 ए एम से 06:56 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:28 पी एम से 03:13 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:12 पी एम से 06:37 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:14 पी एम से 07:30 पी एम
💧 अमृत काल : 03:40 ए एम, फरवरी 20 से 05:27 ए एम, फरवरी 20
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 20 से 01:00 ए एम, फरवरी 20
❄️ रवि योग : 06:56 ए एम से 10:40 ए एम 12:34 पी एम से 06:55 ए एम, फरवरी 20
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को धर्मशास्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : रवि योग/ महानतम मराठा शासक और गुरिल्ला युद्ध के जन्म दाता छत्रपति शिवाजी महाराज जयन्ती, सुप्रसिद्ध शिल्पकार राम वी. सुतार जन्म दिवस, फ़िल्म अभिनेत्री सोनू बलिया जन्म दिवस, पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह जयन्ती, राजस्थान के प्रसिद्ध क्रांतिकारी गोकुलभाई भट्ट जयन्ती, स्वतंत्रता सेनानी गोपाल कृष्ण गोखले शहीद दिवस, अभिनेता निर्मल पांडे स्मृति दिवस, दिल्ली के सुल्तान गयासुद्दीन तुग़लक़ स्मृति दिवस, मुगल शासक फर्रुख सियर स्मृति दिवस, हिन्दी के जाने माने प्रकाशक मुंशी नवलकिशोर पुण्य तिथि, वैज्ञानिक पी बलराम जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
बना है और उसमें कुछ वास्तु दोष रह गए हैं तो गेट के पास तुलसी का पौधा लगाएं। तुलसी का पौधा घर से निगेटिविटी को दूर रखता है। तुलसी के स्थान पर आप चमेली के फूल की बेल भी लगा सकते हैं।
इसके अलावा आप रोज सूर्यास्त के समय गेट के पास क्रिस्टल भी रख सकते हैं। यदि आपके घर का मेन गेट उत्तर दिशा में बना है तो गेट पर वाइट या पर्ल ब्लू कलर करवाना चाहिए।
इसके अलावा भी मेन गेट के वास्तु दोष दूर करने के लिए कई उपाय हैं। मेन गेट के दोनों तरफ हरे और लम्बे पौधे लगाने चाहिए। साथ ही गेट पर ऊं श्रीगणेश, स्वस्तिक, शुभ-लाभ जैसे चिन्ह बनाने से भी वास्तु दोष दूर होते हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अगर रात में दही खाना ही हो तो क्या करें?
यदि किसी को दही खाना आवश्यक हो, तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
✔ गुनगुने पानी में थोड़ा सा शहद या काली मिर्च मिलाकर खाएं, ताकि कफ दोष को संतुलित किया जा सके।
✔ छाछ (मठ्ठा) या ताजा दही का सेवन करें, जमाया हुआ खट्टा दही न खाएँ।
✔ दही में हल्दी, मेथी पाउडर, अदरक या काला नमक मिलाने से इसके दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं।
🔹 दिन में दही के फायदे: दिन के समय दही का सेवन बहुत लाभकारी होता है। यह पाचन में मदद करता है, पेट के लिए फायदेमंद बैक्टीरिया प्रदान करता है, और शरीर को ठंडक देता है। खासतौर पर गर्मी के मौसम में दही और छाछ अमृत के समान माने जाते हैं।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
कचनार की ताजी छाल 25-30 ग्राम (सुखी छाल 15 ग्राम ) को मोटा मोटा कूट ले। 1 गिलास पानी मे उबाले। जब 2 मिनट उबल जाए तब इसमे 1 चम्मच गोरखमुंडी (मोटी कुटी या पीसी हुई ) डाले। इसे 1 मिनट तक उबलने दे। छान ले। हल्का गरम रह जाए तब पी ले। ध्यान दे यह कड़वा है परंतु चमत्कारी है।
गांठ कैसी ही हो, प्रोस्टेट बढ़ी हुई हो, जांघ के पास की गांठ हो, काँख की गांठ हो गले के बाहर की गांठ हो , गर्भाशय की गांठ हो, स्त्री पुरुष के स्तनो मे गांठ हो या टॉन्सिल हो, गले मे थायराइड ग्लैण्ड बढ़ गई हो (Goiter) या LIPOMA (फैट की गांठ ) हो लाभ जरूर करती है। कभी भी असफल नहीं होती। अधिक लाभ के लिए दिन मे 2 बार ले। लंबे समय तक लेने से ही लाभ होगा। 20-25 दिन तक कोई लाभ नहीं होगा निराश होकर बीच मे न छोड़े।
गाँठ को घोलने में कचनार पेड़ की छाल बहुत अच्छा काम करती है. आयुर्वेद में कांचनार गुग्गुल इसी मक़सद के लिये दी जाती है जबकि ऐलोपैथी में ओप्रेशन के सिवाय कोई और चारा नहीं है।
आकड़े के दूध में मिट्टी भिगोकर लेप करने से तथा निर्गुण्डी के 20 से 50 मि.ली. काढ़े में 1 से 5 मि.ली अरण्डी का तेल डालकर पीने से लाभ होता है।
गेहूँ के आटे में पापड़खार तथा पानी डालकर पुल्टिस बनाकर लगाने से न पकने वाली गाँठ पककर फूट जाती है तथा दर्द कम हो जाता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
परुष भाषण अर्थात् कठोर वाणीः कभी-भी कड़वी बात नहीं बोलनी चाहिए। किसी भी बात को मृदुता से, मधुरता से एवं अपने हृदय का प्रेम उसमें मिलाकर फिर कहना चाहिए। कठोर वाणी का सर्वथा त्याग कर देना चाहिए।
गुरु ने शिष्य को किसी घर के मालिक की तलाश करने के लिए भेजा। शिष्य जरा ऐसा ही था – अधूरे लक्षणवाला। उसने घर की महिला से पूछाः
ये माई ! तेरा आदमी कहाँ है ?”
महिला क्रोधित हो गयी और उसने चेले को भगा दिया। फिर गुरुजी स्वयं गये एवं बोलेः
माता जी ! आपके श्रीमान् पतिदेव कहाँ है ?”
उस महिला ने आदर के साथ उन्हें बिठाया एवं कहाः “पतिदेव अभी घर आयेंगे।” दोनों ने एक ही बात पूछी किन्तु पूछने का ढंग अलग था। इस प्रकार कठोर बोलना यह वाणी का एक पाप है। वाणी का यह दोष मानवता से पतित करवाता है।
अनृत वाणी अर्थात् अपनी जानकारी से विपरीत बोलनाः हम जो जानते हैं वह न बोलें, मौन रहें तो चल सकता है किन्तु जो बोलें वह सत्य ही होना चाहिए, अपने ज्ञान के अनुसार ही होना चाहिए। अपने ज्ञान का कभी अनादर न करें, तिरस्कार न करें। जब हम किसी के सामने झूठ बोलते हैं तब उसे नहीं ठगते, वरन् अपने ज्ञान को ही ठगते हैं, अपने ज्ञान का ही अपमान करते हैं। इससे ज्ञान रूठ जाता है, नाराज हो जाता है। ज्ञान कहता है कि ‘यह तो मेरे पर झूठ का परदा ढाँक देता है, मुझे दबा देता है तो इसके पास क्यों रहूँ ?’ ज्ञान दब जाता है।इस प्रकार असत्य बोलना यह वाणी का पाप है।
पैशुन्य वाणी अर्थात् चुगली करनाः इधर की बात उधर और उधर की बात इधर करना। क्या आप किसी के दूत हैं कि इस प्रकार संदेशवाहक का कार्य करते हैं ? चुगली करना आसुरी संपत्ति के अंतर्गत आता है। इससे कलह पैदा होता है, दुर्भावना जन्म लेती है। चुगली करना यह वाणी का तीसरा पाप है।
असम्बद्ध प्रलाप अर्थात् असंगत भाषणः प्रसंग के विपरीत बात करना। यदि शादी-विवाह की बात चल रही हो तो वहाँ मृत्यु की बात नहीं करनी चाहिए।
यदि मृत्यु के प्रसंग की चर्चा चल रही हो तो वहाँ शादी-विवाह की बात नहीं करनी चाहिए।
इस प्रकार मानव की वाणी में कठोरता, असत्यता, चुगली एवं प्रसंग के विरुद्ध वाणी
ये चार दोष नहीं होने चाहिए। इन चार दोषों से युक्त वचन बोलने से बोलने वाले को पाप लगता है।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।



