धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 29 जनवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 29 जनवरी 2025
आप सभी सनातनियों को माघ माह की स्नान-दान श्राद्धादि अति पुण्यदायक मौनी अमावस्या की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – माघ मास
🌘 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार माघ माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 06:05 PM तक उपरांत प्रतिपदा
🖍️ तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 08:20 AM तक उपरांत श्रवण
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है।
⚜️ योग – सिद्धि योग 09:21 PM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
प्रथम करण : नाग – 06:05 पी एम तक
द्वितीय करण : किंस्तुघ्न – 05:10 ए एम, जनवरी 30 तक बव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 11:34 से 01:55 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:36:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:24:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:25 ए एम से 06:18 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:51 ए एम से 07:11 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:22 पी एम से 03:05 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:55 पी एम से 06:22 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:58 पी एम से 07:17 पी एम
💧 अमृत काल : 09:19 पी एम से 10:51 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:08 ए एम, जनवरी 30 से 01:01 ए एम, जनवरी 30
🚕 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंदिर ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – दर्श अमावस्या/ मौनी अमावस्या (जैन)/ त्रिवेणी अमावस्या (उड़ीसा)/ अमावस्या समाप्ति शाम 06.05/ अक्षय बैंसला, छात्र नेता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय जन्म दिवस, जनवादी कवि गोरख पाण्डेय पुण्य तिथि, अभिनेत्री मीरा वासुदेवन, शिशोदिया राजवंश के राजा महाराणा प्रताप स्मृति दिवस, भारतीय अभिनेता अरविंद जोशी पुण्यतिथि, भारत के प्रसिद्ध निशानेबाज़ तथा एथेंस ओलम्पिक-2004 के रजत पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जन्म दिवस, स्वामी प्रणबानंद महाराज जयन्ती, बीटिंग द रिट्रीट
✍🏼 तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आपको आपके के आंगन में लगे पेड़ या फिर बालकनी पर चिड़िया का घोंसला दिखे तो यह एक अच्छा संकेत है. खासकर तब जब यह घोंसला कबूतर का हो तो यह और भी शुभ होता है. यह सुख, समृद्धि और खुशहाली की तरफ इशारा करता है. अगर आपको घोंसला दिखाई दे तो यह इस बात की ओर इशारा करता है कि पैसों से जुड़ी सभी समस्याएं जल्द दूर हो सकती हैं.
वास्तु शास्त्र में छिपकली का दिखना काफी निगेटिव बताया गया है. लेकिन ऐसा तब नहीं है जब आपको एक साथ तीन-तीन छिपकलियां दिखाई दे. एक साथ तीन छिपकलियों का दिखाई देना काफी शुभ माना जाता है. माना जाता है कि अगर आपको अपने घर पर तीन छिपकलियां साथ दिखाई दे रही हैं तो यह मां लक्ष्मी के आगमन की तरफ इशारा करते हैं. तीन छिपकलियों का एक साथ दिखाई देना पैसों से भरपूर जीवन और सुख शांति की तरफ भी इशारा करता है.
🔑 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सफ़ेद बालों को काला बनाएँ : करी पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें।इसमें थोड़ा दही मिलाएं और अपने बालों पर लगाएं। अब मिश्रण को बालों में 20-25मिनट के लिए छोड़ दें, फिर शैंपू से बालों को धो दें। ऐसा नियमित रूप से करने पर बाल काले और घने हो होने लगेंगे।
करी पत्ते को पानी में उबाल लें। अब इसमें एक नींबू निचोड़ लें और चीनी मिलाएं। इस तरह चाय बनाकर एक हफ्ते तक पिएं। यह चाय आपके बालों लंबा, घना, बनाएगी। साथ ही, बालों को सफ़ेद होने से बचाएगी। साथ ही, डायजेस्टिव सिस्टम को भी स्वस्थ रखेगी। करी पत्तों को पहले सूखा लें।
अब नारियल का तेल लें उसे गरम करें। फिर सुखे हुए करी पत्तों को गरम नारियल तेल में डालें और इसे तब तक गरम होने दें जब तक नारियल तेल का रंग न बदलने लगे। अब इसे ठंडा कर लें। और करी पत्तों को इस तेल में हाथों से मैश करें। इस तेल को छानकर आप इसे किसी बोतल में रख लें। और इसका इस्तेमाल करें।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
औषधीय गुण 🍾👌
तेजपत्ता मधुमेह, अल्ज़ाइमर्स, बांझपन, गर्भस्त्राव, स्तनवर्धक, खांसी जुकाम, जोड़ो का दर्द, रक्तपित्त, रक्तस्त्राव, दाँतो की सफाई, सर्दी जैसे अनेक रोगो में अत्यंत उपयोगी है।
तेजपत्ता में दर्दनाशक, एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं। आयुर्वेद में अनेक गंभीर रोगो में इसके उपयोग किये जाते रहे हैं।
चाय-पत्ती की जगह तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से सर्दी-जुकाम, छींकें आना, बुखार, नाक बहना, जलन, सिरदर्द आदि में शीघ्र लाभ मिलता है।
तेजपात के पत्तों का बारीक चूर्ण सुबह शाम दांतों पर मलने से दांतों पर चमक आ जाती है।
तेजपात के पत्रों को नियमित रूप से चूंसते रहने से हकलाहट में लाभ होता है।
एक चम्मच तेजपात चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है।
तेजपात के पत्तों का क्वाथ (काढ़ा) बनाकर पीने से पेट का फूलना व अतिसार आदि में लाभ होता है।
कपड़ों के बीच में तेजपात के पत्ते रख दीजिये, ऊनी, सूती, रेशमी कपडे कीड़ों से बचे रहेंगे।
अनाजों के बीच में 4-5 पत्ते डाल दीजिए तो अनाज में भी कीड़े नहीं लगेंगे लेकिन उनमें एक दिव्य सुगंध जरूर बस जायेगी।
अनेक लोगों के मोजों से दुर्गन्ध आती है, वे लोग तेजपात का चूर्ण पैर के तलुवों में मल कर मोज़े पहना करें। पर इसका मतलब ये नहीं कि आप महीनों तक मोज़े धुलें ही न.!
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक बुजुर्ग दरिया के किनारे पर जा रहे थे। एक जगह देखा कि दरिया की सतह से एक कछुआ निकला और पानी के किनारे पर आ गया।
उसी किनारे से एक बड़े ही जहरीले बिच्छु ने दरिया के अन्दर छलांग लगाई और कछुए की पीठ पर सवार हो गया। कछुए ने तैरना शुरू कर दिया। वह बुजुर्ग बड़े हैरान हुए।
उन्होंने उस कछुए का पीछा करने की ठान ली। इसलिए दरिया में तैर कर उस कछुए का पीछा किया।
वह कछुआ दरिया के दूसरे किनारे पर जाकर रूक गया। और बिच्छू उसकी पीठ से छलांग लगाकर दूसरे किनारे पर चढ़ गया और आगे चलना शुरू कर दिया।
वह बुजुर्ग भी उसके पीछे चलते रहे। आगे जाकर देखा कि जिस तरफ बिच्छू जा रहा था उसके रास्ते में एक भगवान् का भक्त ध्यान साधना में आँखे बन्द कर भगवान् की भक्ति कर रहा था।
उस बुजुर्ग ने सोचा कि अगर यह बिच्छू उस भक्त को काटना चाहेगा तो मैं करीब पहुँचने से पहले ही उसे अपनी लाठी से मार डालूँगा।
लेकिन वह कुछ कदम आगे बढे ही थे कि उन्होंने देखा दूसरी तरफ से एक काला जहरीला साँप तेजी से उस भक्त को डसने के लिए आगे बढ़ रहा था। इतने में बिच्छू भी वहाँ पहुँच गया।
उस बिच्छू ने उसी समय सांप डंक के ऊपर डंक मार दिया, जिसकी वजह से बिच्छू का जहर सांप के जिस्म में दाखिल हो गया और वह सांप वहीं अचेत हो कर गिर पड़ा था। इसके बाद वह बिच्छू अपने रास्ते पर वापस चला गया।
थोड़ी देर बाद जब वह भक्त उठा, तब उस बुजुर्ग ने उसे बताया कि भगवान् ने उसकी रक्षा के लिए कैसे उस कछुवे को दरिया के किनारे लाया, फिर कैसे उस बिच्छु को कछुए की पीठ पर बैठा कर साँप से तेरी रक्षा के लिए भेजा।
वह भक्त उस अचेत पड़े सांप को देखकर हैरान रह गया। उसकी आँखों से आँसू निकल आए, और वह आँखें बन्द कर प्रभु को याद कर उनका धन्यवाद करने लगा।
तभी “प्रभु” ने अपने उस भक्त से कहा, जब वो बुजुर्ग जो तुम्हे जानता तक नहीं, वो तुम्हारी जान बचाने के लिए लाठी उठा सकता है, तो फिर तू तो मेरी भक्ति में लगा हुआ था, तो फिर तुझे बचाने के लिये मेरी लाठी तो हमेशा से ही तैयार रहती है…!
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⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।।

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