
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 20 जनवरी 2026
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
*मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
*मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है। 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352_
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – मंगलवार माघ माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 02:42 AM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीय तिथि (दूज) के स्वामी ब्रह्मा जी हैं, जिन्हें विधाता भी कहा जाता हैं, इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र श्रवण 01:06 PM तक उपरांत धनिष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – श्रवण नक्षत्र का स्वामी ग्रह चंद्रमा है, जबकि इसके अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु हैं।
⚜️ योग – सिद्धि योग 08:00 PM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
⚡ प्रथम करण : बालव 02:31 PM तक, बाद कौलव 02:43 AM तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:54:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:31:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 05:27 ए एम से 06:21 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त – 12:11 पी एम से 12:53 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त – 02:18 पी एम से 03:01 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 05:48 पी एम से 06:15 पी एम
💧 अमृत काल – 03:12 ए एम से 04:51 ए एम, जनवरी 21
🗣️ निशिता मुहूर्त – 12:05 ए एम से 12:59 ए एम, जनवरी 21
🌸 द्विपुष्कर योग – 01:06 पी एम से 02:42 ए एम, जनवरी 21
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – चन्द्र दर्शन/ पञ्चक/ द्विपुष्कर योग/ विडाल योग/ पंचक प्रारम्भ 25.34/ भारतीय उद्योगपति कस्तूरभाई लालभाई जन्म दिवस, भारतीय उद्योगपति सर रतनजी जमशेदजी टाटा जन्म दिवस, बिहार के मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे स्मृति दिवस, (परमवीर चक्र सम्मानित भूतपूर्व भारतीय सेनिक) लांस नायक करम सिंह शहिद दिवस, भारतीय अभिनेत्री परवीन बॉबी स्मृति दिवस, राष्ट्रीय लोक दल के प्रसिद्ध राजनेता सोमपाल शास्त्री जयन्ती, मिलिन्द केशव जन्म दिवस, हिंदी साहित्यकार स्वयं प्रकाश जन्म दिवस, राष्ट्रीय पनीर प्रेमी दिवस, सिखों के गुरु गुरु गोविंद सिंह जयन्ती, नादिरा बब्बर जन्म दिवस, विश्व अहिंसा दिवस, राष्ट्रीय मतदाता दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी सर तेज बहादुर सप्रू जयन्ती, अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह दिवस (10 दिवसीय)
✍🏼 तिथि विशेष – द्वितीय तिथि को कटोरी फल का तथा तृतीया तिथि है नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। द्वितीय तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीय तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी को बताया गया है। यह द्वितीय की तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीय तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, घर का वो कमरा जिसमें हम सोते हैं, उसका सीधा संबंध हमारी भावनाओं से जुड़ा होता है। सोते समय अपने सिर को दक्षिण या पूर्व दिशा में रखना चाहिएय इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि, बिस्तर के सामने कोई दर्पण न लगा हो।
*घर के वास्तु शास्त्र पर घर के मुख्य द्वार का बहुत प्रभाव पड़ता है। घर के मुख्य पर गंदगी नहीं होनी चाहिए ऐसा होने पर मां लक्ष्मी रूष्ट हो जाती है। घर के मुख्य द्वार को हमेशा तोरण और बंदनवार से सजाकर रखना चाहिए। मुख्य द्वार पर तुलसी, मनी प्लांट, अशोक, या चमेली जैसे पौधे लगाना शुभ है। इन्हें उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में रखें। *घर में नकारात्मक शक्तियां हावी हैं, तो इसके लिए आप अपने घर मे थोड़ा सा सेंधा नमक घर के सभी कोने में थोड़ा-थोड़ा रख दें और हर माह इसे बदल दें। इस उपाय को करने से घर में हमेशा सकारात्मकता बनी रहती है और परिवार मे शांति का माहौल बना रहता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आयुर्वेद में अर्जुन की छाल का इस्तेमाल प्राचीन काल से हृदय संबंधी समस्याओं के लिए एक पारंपरिक औषधि है।इसकी तासीर ठंडी और खुश्क होती है।
*हृदय की दुर्बलता और हृदय की कार्य प्रणाली को सामान्य करने और रक्त शोधक जैसे गुणों के कारण अर्जुन की छाल का चूर्ण, काढ़ा, और अरिष्ठ, पारंपरिक तौर से इस्तेमाल की जाती है। *अर्जुन की छाल को व्यक्ति की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अनुपान के तौर पर,,घी या शहद, या गुड़ के साथ इस्तेमाल किया जाता है।
*अर्जुन की छाल के बदल के तौर पर ढाक की छाल का इस्तेमाल किया जाता है। *अर्जुन की छाल का इस्तेमाल किसी अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में ही अपना चाहिए।
🫗 आरोग्य संजीवनी 🥠
मानक आयुर्वेदिक तरीका क्या है?
लगभग सभी आयुर्वेदिक स्रोतों और विशेषज्ञों की सलाह यही है कि उबालने के बाद मिश्रण को अच्छी तरह छान लें और केवल साफ वाला तरल (काढ़ा) ही गरम-गरम पिएं। तलछट को जानबूझकर छोड़ दिया जाता है।
*कब तलछट पी सकते हैं?
*बहुत कम मामलों में (केवल आयुर्वेदिक डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह पर) अगर: *चूर्ण बहुत बारीक और उच्च गुणवत्ता वाला हो
*मात्रा बहुत कम हो *आपका पेट बहुत मजबूत हो और कोई पाचन समस्या न हो
*तो थोड़ी-सी तलछट लेने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन यह सामान्य नियम नहीं है। *सबसे सुरक्षित सलाह (ज्यादातर लोगों के लिए)
*दूध + पानी + अर्जुन चूर्ण को उबालें, जब आधा रह जाए तो अच्छी तरह छान लें। *केवल साफ काढ़ा ही पिएं।
🌷 *गुरु भक्ति योग* 🌹
रावण की बेटी का उल्लेख थाईलैंड की रामकियेन रामायण और कंबोडिया की रामकेर रामायण में किया गया है, जबकि वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास के रामचरित मानस में इसका उल्लेख नहीं किया गया है।
*रामकियेन और रामकेर रामायण के मुताबिक, रावण के तीन पत्नियों से 7 बेटे थे। इनमें पहली पत्नी मंदोदरी से दो बेटे मेघनाद और अक्षय कुमार थे। *वहीं, दूसरी पत्नी धन्यमालिनी से अतिकाय और त्रिशिरा नाम के दो बेटे थे। तीसरी पत्नी से प्रहस्थ, नरांतक और देवांतक नाम के तीन बेटे थे। दोनों रामायण में बताया गया है कि सात बेटों के अलावा रावण की एक बेटी भी थी, जिसका नाम सुवर्णमछा या सुवर्णमत्स्य था। कहा जाता है कि सुवर्णमत्स्य देखने में बहुत सुंदर थी। उसे स्वर्ण जलपरी भी कहा जाता है।
*एक अन्य रामायण ‘अद्भुत रामायण’ में राम जी की पत्नी सीता जी को भी रावण की बेटी बताया गया है। दशानन रावण की बेटी सुवर्णमत्स्य का शरीर सोने की तरह दमकता था। इसीलिए उसको सुवर्णमछा भी कहा जाता था। इसका शाब्दिक अर्थ होता है, सोने की मछली। इसीलिए थाईलैंड और कंबोडिया में सुनहरी मछली को ठीक उसी तरह से पूजा जाता है, जैसे चीन में ड्रैगन की पूजा होती है *राम जी ने लंका पर विजय अभियान के दौरान समुद्र पार करने के लिए नल और नील को सेतु बनाने का काम सौंपा। राम जी के आदेश पर जब नल और नील लंका तक समुद्र पर सेतु बना रहे थे, तब रावण ने अपनी बेटी सुवर्णमत्स्य को ही ये योजना नाकाम करने का काम सौंपा था।
*पिता की आज्ञा पाकर सुवर्णमछा ने वानरसेना की ओर से समुद्र में फेंके जाने वाले पत्थरों और चट्टानों को गायब करना शुरू कर दिया। उसने इस काम के लिए समुद्र में रहने वाले अपने पूरे दल की मदद ली। *रामकियेन और रामकेर रामायण में लिखा गया है कि जब वानरसेना की ओर से डाले जाने वाले पत्थर गायब होने लगे तो हनुमानजी ने समुद्र में उतरकर देखा कि आखिर ये चट्टानें जा कहां रही हैं? उन्होंने देखा कि पानी के अंदर रहने वाले लोग पत्थर और चट्टानें उठाकर कहीं ले जा रहे हैं। उन्होंने उनका पीछा किया तो देखा कि एक मत्स्य कन्या उनको इस कार्य के लिए निर्देश दे रही है।
*_कथा में कहा गया है कि सुवर्णमछा ने जैसे ही हनुमानजी को देखा, उनसे प्रेम हो गया। हनुमानजी उसके मन की स्थिति भांप लेते हैं और समुद्रतल पर ले जाकर पूछते हैं कि आप कौन हैं देवी ? वह बताती हैं कि मैं रावण की बेटी हूं।
फिर हनुमान जी उसे समझाते हैं कि रावण क्या गलत कार्य कर रहा है। हनुमानजी के समझाने पर सुवर्णमछा सभी चट्टानें लौटा देती हैं, तब रामसेतु के निर्माण का कार्य पूरा हो पाता है। थाई रामायण रामकियेन के अनुसार महाबली हनुमान जी के आशीर्वाद से स्वर्णमछा को एक पुत्र की प्राप्ति भी हुई थी जिसका नाम मैकचनू (मछानु) था।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही मनाया जाता है तथा किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्मा जी का पूजन आवश्यक करना चाहिए। वैसे तो मूहूर्त चिंतामणि आदि ग्रंथों के अनुसार द्वितीय तिथि अत्यंत शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परंतु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिए श्रावण और भद्रपद की द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।



