ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 11 मार्च 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 11 मार्च 2026_
11 मार्च 2026 दिन बुधवार को क्षेत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। आज कालाष्टमी का महा पर्व है। आज शीतला अष्टमी में भैरव देवता माता शीतला की पूजा का दिन भी है। आज माता शीतला की पूजा शीतल शीतल प्रसाद अर्थात एक दिन पहले का वासी पकवान भोग के लिए चढ़ाया जाता है। आज -कहीं कहीं यात्रा एवं उत्सव आदि भी मनाया जाता है। आज वर्षीतपारंम्भ: (जैन लोगों का व्रत) है। आप सभी सनातनियों को “शीतलाष्टमी के महान व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ *दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। *बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
*बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_

✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – चैत्र मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 04:19 AM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र ज्येष्ठा 10:00 PM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी – ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी ग्रह बुध हैं। जबकि इसके अधिष्ठाता (शासक) देवता इंद्र देव हैं।
⚜️ योग : वज्र योग 09:11 AM तक, उसके बाद सिद्धि योग
प्रथम करण : बालव 03:08 PM तक
द्वितीय करण : कौलव 04:19 AM तक, बाद तैतिल
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:21:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:04:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:58 ए एम से 05:47 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:23 ए एम से 06:36 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:17 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त 06:25 पी एम से 06:49 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:27 पी एम से 07:40 पी एम
💧 अमृत काल 12:08 पी एम से 01:55 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, मार्च 12 से 12:55 ए एम, मार्च 12
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को सवाकिलो साबुत मूंग परिपूरित कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – शीतला अष्टमी/ बसोड़ा/ वर्षी तप आरम्भ/ कालाष्टमी/ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी/ विंछुड़ो, गण्ड मूल/ आडल योग/सहादते हज़रत अली, राष्ट्रीय कोविड-19 दिवस, औजारों की राष्ट्रीय पूजा दिवस, जॉनी एप्पलसीड दिवस, की हिरण जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय अंतिम संस्कार निदेशक और शव प्रबंधक मान्यता दिवस, राष्ट्रीय प्रतिरक्षा प्रणाली दिवस, अमर बलिदानी छत्रपति सम्भाजी जयन्ती, स्वामी सहजानंद सरस्वती जयन्ती, राष्ट्रीय जॉनी एप्पलसीड दिवस, स्वतंत्रता सेनानी संभाजी भोसले पुण्य तिथि, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी चन्द्रभानु गुप्त स्मृति दिवस, पंजाब के मुख्यमंत्री अरविंदर सिंह जयन्ती, अंडमान-निकोबार दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips 🌹
प्रतिष्ठा, सम्मान और अलग पहचान क्यों नहीं मिल रही?
++++++++++++++++++++
*उसी क्रम में यह दूसरी पोस्ट है। पहले सूर्य को जांचा और उसके बाद लगन को देखना। *लग्न – आप समाज के सामने स्वयं को कैसे प्रस्तुत कर रहे हैं?
*लग्न वह माध्यम है जिससे समाज आपको देखता है। *यह आपकी बाहरी छवि और मंच का प्रतीक है।
*सिंह लग्न वाले स्वाभाविक रूप से पहचान चाहते हैं। *मकर और कुंभ लग्न वाले व्यवस्थित, नेटवर्किंग और मार्केटिंग में अधिक सक्रिय रहते हैं।
*लेकिन समस्या तब आती है जब: *सिंह लग्न हो और सूर्य 6, 8 या 12वें भाव में चला जाए।
*या सूर्य शनि/राहु से पीड़ित हो। *तब जातक बार-बार यही कहेगा —
*मुझे मौका ही नहीं मिल रहा… मुझे मंच ही नहीं दिया जा रहा… *यहाँ समस्या क्षमता की नहीं, बल्कि मंच की है
*अब यहाँ पर 2 बातें हैं – पहली कि लगन आपको कैसे दिखाना चाहता है लेकिन आप उस शैली में खुद को नहीं दिखा रहे तो वहाँ उपाय काम नहीं करेगे *हलाकि उपाय हर किसी के लिए एक समान नहीं होते। पहले यह समझना आवश्यक है कि आप स्वयं किस अनुभव से गुजर रहे हैं।
*यदि सहज लगे, तो अपना अनुभव साझा करें। उसी आधार पर आगे की दिशा स्पष्ट की जा सकती है। *लेकिन ध्यान रखें यह सेवा नहीं हमारा कर्म है
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आजकल देसी किकर (बबूल) की फलियां आ गई हैं। मैं कल किकर की फलियां इकट्ठा करने गया था, लेकिन एक हफ्ते तक किकर की फलियां पूरी तरह तैयार हो जाएंगी। इसलिए आपके आसपास भी जहां कहीं देसी किकर (बबूल) हो, आप भी उसकी फलियां इकट्ठा कर लें।
ध्यान रखें कि जमीन पर गिरी हुई फलियां न उठाएं, अपने साथ कोई डंडा या हुक जैसी चीज ले जाएं। अब इन फलियों को तोड़कर बिना बीज वाली साफ और अच्छी फलियां (टुकड़े) अलग कर लें, जो बिल्कुल सही और स्वस्थ हों। अब इन्हें छांव में सुखाने के लिए रख दें।
*ध्यान रखें कि अगर घुटनों में दर्द या चलने पर टक-टक की आवाज आती हो तो उसके लिए बीज वाली फलियां ज्यादा फायदेमंद होती हैं। *लेकिन अगर इसे धात रोग, स्वप्नदोष, पुरुष शक्ति बढ़ाने या वीर्य को गाढ़ा करने के लिए इस्तेमाल करना हो तो बिना बीज वाली फलियां लें।
कुछ दिनों बाद ये फलियां पूरी तरह सूख जाएंगी।
*अगर इनका वजन 200 ग्राम हो जाए तो 200 ग्राम किकर का गोंद और 200 ग्राम धागे वाली मिश्री पंसारी से ले आएं। *अब गोंद को तवे पर हल्का सा भून लें और अलग पीस लें। मिश्री और किकर की फलियां भी अलग-अलग पीस लें। पहले इन्हें हमामदस्ते में मोटा-मोटा कूट लें, फिर मिक्सर ग्राइंडर से पीस सकते हैं।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
हृदय के लिए अर्जुन की छाल कैसे फायदेमंद है?
*हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है अर्जुन की छाल को आयुर्वेद में “हृदय बल्य” कहा जाता है, यानी यह दिल की मांसपेशियों को ताकत देने में मदद करती है। *कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करने में मदद कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि अर्जुन की छाल खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने में मदद कर सकती है।
*ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक नियमित रूप से सही मात्रा में लेने से यह रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद कर सकती है। *रक्त संचार बेहतर करती है अर्जुन की छाल रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करती है, जिससे दिल तक रक्त का प्रवाह बेहतर होता है।
*अर्जुन की छाल का सेवन कैसे किया जाता है? *आयुर्वेद में इसे कई तरीकों से लिया जाता है:
*अर्जुन की छाल का काढ़ा *अर्जुन चूर्ण
*अर्जुन की छाल को दूध में उबालकर *बहुत से लोग सुबह या शाम इसका काढ़ा पीते हैं।
*एक जरूरी सावधानी : हालांकि अर्जुन की छाल प्राकृतिक औषधि है, लेकिन किसी भी औषधि का सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर होता है, खासकर अगर कोई पहले से हृदय से जुड़ी दवाइयाँ ले रहा हो। 📚 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ गौतम बुद्ध की मृत्यु सूअर का मांस खाने से हुई या फिर किसी कवक के खाने से इस बात को लेकर के भले ही दो पक्षों में विवाद😆 हो जाए लेकिन इस बात पर सभी सहमत हैं कि उनकी मृत्यु भोजन विषाक्तता से हुई l *गौतम बुद्ध की मूल उपदेश पाली भाषा में ही संकलित हुए थे जो कि संस्कृत की ही बोली थी l
*संस्कृत एक काव्यात्मक भाषा भी थी क्योंकि बहुत से संस्कृत साहित्य, महाकाव्य, अभिज्ञान शाकुंतलम् आदि काव्य के रूप में ही है l और किसी भी काव्यात्मक भाषा में बहु आयामी और बहू अर्थी शब्दों का होना संभव ही है क्योंकि पाली भाषा भी संस्कृत की ही एक बोली थी तो स्वभावत: संस्कृत के द्वारा ,इसमें भी पूर्ण रूप से ना सही लेकिन कुछ बहुत शब्दों का बहूअर्थी होना प्राकृतिक था । जानकारों का मानना है कि संस्कृत और उसकी बोली पाली भाषा में कुछ शब्द संयुक्त होते थे जो संयुक्त रूप से अलग अर्थ और विच्छेद हो जाने पर अलग अर्थ प्रकट करते थे l इस तर्क को समझने का सबसे सरल उदाहरण “वसुंधरा” शब्द है: *वसुंधरा (संयुक्त रूप मे) अर्थ- पृथ्वी
*वसु+ धरा ( विच्छेद इस रूप में) अर्थ- जो रतन ,धन को धारण करती है ( रानी) *अब यहां रानी और धरती में कितना फर्क हैl
*गौतम बुद्ध की मृत्यु के संबंध में जिस घटना का उल्लेख मिलता है उससे ज्ञात होता है कि वह पावापुरी से कुशीनगर आम की बागों को देखने के लिए जा रहे थे तभी एक श्रमिक कुंद कुमारा पुत्ता द्वारा उन्हें भोजन खिलाने से उनके भोजन विषाक्तता पैदा हो गई l पाली धर्म ग्रंथों में उनकी मृत्यु का कारण ” सूकरमद्दव ” को बताया गया है l *बौद्ध धर्म के ही कुछ अज्ञानी बिच्छू एवं उनके कुछ विरोधियों के द्वारा यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि उनकी मृत्यु , मृदु सूअर अर्थात सूअर का मांस खाने से हुई थीl यह गलत हैl
*गौतम बुद्ध की मृत्यु जिसे खाने से हुई थी उसे भारत के कई इलाकों में “कुकुरमुत्ता “नाम से जाना जाता हैl यदि इस शब्द के संपूर्ण अर्थ को ध्यान में रखें तो यह एक प्रकार का जमीन पर उगने वाला कंद हैl *अभी यदि हम अगर इस का संधि विच्छेद करके (कुकुर+ मुत्ता )इस के अर्थ को ध्यान में रखें तो
*इसका अर्थ” कुत्ता “ही हो जाता है l इस बात को समझाने के लिए मेरे पास शब्द कम पड़ रहे हैं अतः मैं एक उदाहरण द्वारा समझाती हूं :: *मान लीजिए आज किसी की मृत्यु ” कुकुरमुत्ता “खाकर हो गई जो कि एक जमीनी पौधा है और यह बात उसने किसी पुस्तक में लिख दी ,तो 1,000- 2000 साल बाद आने वाली पीढ़ी तो यही समझेगी की उनकी मृत्यु कुत्ता खा कर ही हुई होगी l
*गौतम बुध के “सूकरमद्दव “के संबंध में भी यही बात है यह वास्तव में एक संपूर्ण शब्द है “सूकरमद्दव” (पौधा) । ना कि सूकर + मद्दव (सूअर मृदु) l •••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤•••• ⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।। *मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।

Related Articles

Back to top button