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Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

✦••• जय श्री हरि •••✦

🧾 आज का पंचाग 🧾

गुरुवार 23 अप्रैल 202623 अप्रैल 2026 दिन गुरुवार गंगा सप्तमी (गंगा जयंती) मनाई जाएगी। उदया तिथि के अनुसार, मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 11:01 से दोपहर 01:38 बजे तक (मध्याह्न) है। इस दिन स्नान, दान और पूजा-अर्चना के लिए यह समय सर्वोत्तम माना जाता है। सप्तमी तिथि 22 अप्रैल की रात 10:49 बजे शुरू होकर 23 अप्रैल की रात 08:49 बजे समाप्त होगी। आप सभी सनातनियों को “गंगा जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनायें।।मंगल श्री विष्णु मंत्र :-मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।* मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ ☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) *गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।*गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । *गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी*🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल☸️ काली सम्वत् 5127🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव☣️ आयन – उत्तरायण☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु☀️ मास – बैशाख मास🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष📅 तिथि – गुरुवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 08:49 PM तक उपरांत अष्टमी✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।💫 नक्षत्र- नक्षत्र पुनर्वसु 08:57 PM तक उपरांत पुष्य🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति गुरु हैं। देवता अदिति हैं, जो सभी देवताओं की माता हैं। पुनर्वसु नक्षत्र में अदिति (ऋषि कश्यप की पत्नी, देवताओं की माता) की पूजा करने से सुरक्षा मिलती है।⚜️ योग – सुकर्मा योग 06:07 AM तक, उसके बाद धृति योग 03:32 AM तक, उसके बाद शूल योग⚡ प्रथम करण : गर 09:45 AM तक✨ द्वितीय करण : वणिज 08:49 PM तक, बाद विष्टि🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:40:00🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:29:00👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:20 ए एम से 05:04 ए एम🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:42 ए एम से 05:48 ए एम🌟 अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:54 ए एम से 12:46 पी एम✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:22 पी एम🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:50 पी एम से 07:12 पी एम🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:51 पी एम से 07:57 पी एम💧 अमृत काल : शाम 06:41 पी एम से 08:11 पी एम🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:57 पी एम से 12:41 ए एम, अप्रैल 24🌸 गुरु पुष्य योग : शाम 08:57 पी एम से 05:47 ए एम, अप्रैल 24⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन🌊 अमृत सिद्धि योग : 08:57 पी एम से 05:47 ए एम, अप्रैल 24🚓 यात्रा शकुन- गुरुवार को बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।⚛️ पर्व एवं त्यौहार – गंगा सप्तमी/ भद्रा/ गुरु पुष्य योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ आडल योग/ स्वतंत्रता सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह स्मृति दिवस, प्रसिद्ध नाटककार विलियम शेक्सपियर स्मृति दिवस, भारतीय विदुषी और समाज सुधारक पंडिता रमाबाई जयन्ती, सुरबहार वाद्ययंत्र की एकमात्र महिला अन्नपूर्णा देवी जन्म दिवस, सिख गुरु, गुरु अंगद जयन्ती, ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर जनरल, गिल्बर्ट आलियात मिंटो जन्म दिवस, दार्शनिक पंडिता रमाबाई जयन्ती, प्रसिद्ध साहित्यकार जी.पी. श्रीवास्तव जन्म दिवस, प्रशंसित अभिनेता मनोज बाजपेयी जन्म दिवस, राष्ट्रीय प्रेमी दिवस, समाज सुधारक महर्षि विट्ठल रामजी शिंदे जन्म दिवस, हिंदी पार्श्व गायिका शमशाद बेगम स्मृति दिवस, विश्व प्राधिकरण दिवस, विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस (World Book and Copyright Day)✍🏼 *तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। 🌷 *_Vastu tips* 🌸वास्तु शास्त्र के अनुसार रात में किचन को गंदा छोड़ना या सिंक में जूठे बर्तन रखना अच्छा नहीं माना जाता। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और मां लक्ष्मी की कृपा कम हो सकती है। इसका असर आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।*अगर बर्तन धोना संभव न हो तो क्या करें अगर किसी कारण से रात में बर्तन साफ करना संभव न हो, तो कम से कम उनमें पानी डालकर जरूर रखें। ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव कुछ हद तक कम हो जाता है। हालांकि इसे रोज की आदत बनाना ठीक नहीं माना जाता। *रसोई से जुड़े जरूरी वास्तु नियम आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार किचन में पानी और आग से जुड़ी चीजों को पास-पास नहीं रखना चाहिए। सिंक और गैस चूल्हे के बीच दूरी बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है।♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️★ जो पति सुबह उठकर अपनी पत्नी को कम से कम पाँच मिनट तक गले लगाता है, उसके कार्यक्षेत्र में खतरे की संभावना कम होती है।* ★ किताबें घर की लक्ष्मी होती हैं। इन्हें जितना ज्यादा प्यार दिया जाता है, उतना ही घर में शांति आती है।*★ पत्नी को पर्याप्त समय दें, या फिर पर्याप्त विश्वास करें। तब घर कभी युद्धक्षेत्र नहीं लगेगा।* ★ वही पुरुष कायर है, जो अपनी पत्नी के सामने प्रेमी नहीं बन सका।*★ रोज़ एक बार पत्नी से “मैं तुमसे प्यार करता हूँ” कहने से मन की सारी चिंताएँ दूर हो जाती हैं।* ★ मन खुश रखने के लिए पत्नी को फेसबुक, फोनबुक, नोटबुक समेत सभी अकाउंट्स के पासवर्ड दे दें। ★ महिलाओं के मन में प्यार और रूठना दोनों ही ज्यादा होते हैं। इसलिए रूठने को प्यार से बड़ा नहीं मानना चाहिए। पतियों का कर्तव्य है कि वे प्यार से पत्नी की हर नाराज़गी दूर करें। ★ एक बच्चे को जन्म देने के लिए माँ जो कष्ट सहती है, उसे पिता जीवनभर प्यार देकर भी चुका नहीं सकता। इसलिए हर पति का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चे की माँ को कोई कष्ट न दे। 🫗 आरोग्य संजीवनी 🍶अगर बात करें समाधान की तो सरल उपायों को अपनाकर इस समस्या से पूर्णतया छुटकारा पाया जा सकता है।*. ध्यान देने वाली बात यह है यह समस्या तभी उत्पन्न होती है जब आपके शरीर में पोषक तत्वों की कमी है इसीलिए आपको फास्ट फूड त्याग कर पोषक तत्वों से परिपूर्ण भोजन करना होगा।*. अखरोट बादाम मुनक्का इत्यादि का सेवन बहुत ही लाभकारी है। रात में भिगोकर सुबह इसका सेवन करें। *. नारियल पानी का सेवन अगर आप करते हैं तो आपको इस तरह की समस्या कभी होगी ही नहीं क्योंकि यह विटामिन मिनरल्स और अन्य कई पोषक तत्व जैसे कि मैग्नीज से भरपूर होता है अतः हो सके तू नारियल पानी अथवा गरी नारियल का सेवन भी कर सकते है।*. आपको अपनी दिनचर्या में व्यायाम और योगासन को सम्मिलित करना होगा अगर आपकी उम्र अधिक है तो आप योगासन ना कर व्यायाम ही करें। *. धतूरे के बीज को अगर सरसों के तेल में पकाकर मालिश करें तो यह ना सिर्फ जोड़ों की समस्या बल्कि शरीर में अन्य कहीं भी होने वाले दर्द में लाभकारी है। यह उपाय मेरी मां खुद किया करती है और यह बहुत ही कारगर है।📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️शुक्राचार्य, जो दैत्यों के गुरु हैं, उनकी यह तपस्या भारतीय पौराणिक कथाओं की सबसे कठिन और डरावनी तपस्याओं में से एक मानी जाती है।*शुक्राचार्य जानते थे कि देवताओं के पास अमृत है, जिससे वे अमर हैं। युद्ध में जब भी देवता और दानव लड़ते, तो देवता जीत जाते क्योंकि उनके पास खोई हुई शक्ति वापस पाने के साधन थे। शुक्राचार्य चाहते थे कि उनके शिष्यों (दैत्यों) को भी अमरता मिले। इसके लिए उन्हें ‘मृत-संजीवनी विद्या’ (मरे हुए को जीवित करने की शक्ति) की आवश्यकता थी, जो केवल भगवान शिव के पास थी। *भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शुक्राचार्य ने हिमालय पर घोर तप शुरू किया। यह तपस्या सामान्य नहीं थी:*उल्टा लटकना: वे एक प्राचीन वृक्ष की शाखा से अपने पैरों के सहारे उल्टा लटक गए। *धुएँ का आहार: उन्होंने अन्न और जल का पूरी तरह त्याग कर दिया। उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे केवल नीचे जलने वाली सूखी पत्तियों और लकड़ियों से निकलने वाले धुएँ (धूम्र) को ही ग्रहण करेंगे।*कठिन समय: इसी अवस्था में वे लगातार 1000 वर्षों तक लटके रहे। उनका शरीर जर्जर हो गया था, लेकिन उनकी इच्छाशक्ति अडिग थी। *जब शुक्राचार्य तपस्या कर रहे थे, तब इंद्र और अन्य देवता डर गए। इंद्र ने इस तपस्या को भंग करने के लिए अपनी पुत्री जयंती को भेजा। जयंती ने कई कोशिशें कीं, लेकिन शुक्राचार्य का ध्यान नहीं भटका। अंत में, शुक्राचार्य की अटूट श्रद्धा और कष्ट को देखकर भगवान शिव प्रकट हुए।*महादेव उनकी इस “उग्र तपस्या” से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने शुक्राचार्य को न केवल मृत-संजीवनी विद्या प्रदान की, बल्कि उन्हें ग्रहों में सर्वश्रेष्ठ स्थान (शुक्र ग्रह) और समस्त धन-संपदा का अधिपति भी बना दिया। *इस कहानी का सच यह है कि यह तपस्या केवल शक्ति पाने के लिए नहीं, बल्कि अपने शिष्यों के प्रति उनके समर्पण को दिखाती है। उल्टा लटककर धुएँ के बीच सांस लेना घुटने और फेफड़ों को खत्म कर देने जैसा था, लेकिन उन्होंने इसे पूरा किया।*_यही कारण है कि आज भी शुक्र ग्रह को ज्योतिष में सबसे चमकीला और प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि यह एक ऐसे गुरु की शक्ति का प्रतीक है जिसने मृत्यु को भी मात दे दी थी।•••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤••••⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।

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