मध्य प्रदेश

डीजीपी के निर्देश का क्या होगा पालन? वरिष्ठ जनप्रतिनिधि के सम्मान को लेकर विभिन्न चर्चा

ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस मैनुअल में सांसदों और विधायकों को सलामी देने के संबंध में कोई विशिष्ट प्रावधान या नियम स्पष्ट रूप से उल्लेखित नहीं है, जो इसे अनिवार्य बनाता हो। हालांकि, हाल ही में मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना द्वारा 24 अप्रैल 2025 को जारी एक आदेश में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि वे सांसदों और विधायकों को सलामी दें। साथ ही उनके साथ शिष्ट व्यवहार करें। यह आदेश मध्यप्रदेश पुलिस मैनुअल एक्ट के तहत नहीं, बल्कि प्रशासनिक निर्देशों और प्रोटोकॉल के आधार पर जारी किया गया है।

प्रमुख बिंदु:-
DGP का आदेश (24 अप्रैल 2025):
DGP कैलाश मकवाना ने निर्देश जारी किया । कि पुलिस अधिकारी और कर्मचारी, जो वर्दी में हैं, सरकारी कार्यक्रमों या सामान्य मुलाकात के दौरान सांसदों और विधायकों को सलामी देंगे।

यह आदेश जनप्रतिनिधियों के प्रति सम्मान और शिष्टाचार सुनिश्चित करने के लिए है।

आदेश में 8 परिपत्रों के आधार पर वर्ष (2004, 2007, 2011, 2017, 2019, 2021, और 2022) का उल्लेख है। जिसे पहले शासन द्वारा पुलिस अधिकारियों के लिए जनप्रतिनिधियों के प्रति शिष्टाचार के संबंध में जारी किए गए थे।

मध्यप्रदेश पुलिस मैनुअल:-
मध्यप्रदेश पुलिस मैनुअल में मुख्य रूप से पुलिस के कर्तव्यों, अनुशासन, और प्रक्रियाओं का उल्लेख है। इसमें सलामी देने के संबंध में सामान्य दिशानिर्देश हो सकते हैं, लेकिन सांसदों या विधायकों को विशेष रूप से सलामी देने का कोई अनिवार्य नियम नहीं है।

सलामी देने की प्रथा प्रोटोकॉल और परंपराओं पर आधारित है, जो समय-समय पर DGP या गृह विभाग के आदेशों द्वारा निर्देशित जारी किए जाते है।

कानूनी अधिकार:-
पुलिस को सलामी देने का “अधिकार” नहीं, बल्कि यह एक प्रशासनिक निर्देश या प्रोटोकॉल का हिस्सा है। यह DGP के आदेश के तहत एक कर्तव्य के रूप में लागू किया गया है।

यह आदेश संवैधानिक पदों (जैसे सांसद और विधायक) के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए है, लेकिन इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह मध्यप्रदेश पुलिस मैनुअल एक्ट का हिस्सा नहीं है।

विवाद और प्रतिक्रिया:
इस आदेश पर राजनीतिक विवाद भी हुआ है। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने इसे पुलिस की गरिमा और आत्मसम्मान पर हमला बताया है। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि यह पुलिस पर राजनीतिक दबाव बढ़ा सकता है।

निष्कर्ष:-
मध्यप्रदेश पुलिस मैनुअल एक्ट के तहत सांसदों या विधायकों को सलामी देना अनिवार्य नहीं है, और यह कोई कानूनी “अधिकार” नहीं है। यह DGP के हालिया प्रशासनिक आदेश (24 अप्रैल 2025) के तहत एक प्रोटोकॉल है, जो जनप्रतिनिधियों के प्रति शिष्टाचार और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है। यदि आप मध्यप्रदेश पुलिस मैनुअल के किसी विशिष्ट खंड या नियम का उल्लेख चाहते हैं, तो कृपया अधिक विवरण प्रदान करें, ताकि मैं और सटीक जानकारी आप सभी तक पहुंचा सकूं।

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