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17 या 18 सितंबर ? कब है भाद्रपद पूर्णिमा, यहां दूर होगी डेट की कन्फ्यूजन

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 17 या 18 सितंबर? कब है भाद्रपद पूर्णिमा, यहां दूर होगी डेट की कन्फ्यूजन
🔘 HIGHLIGHTS
▪️ भाद्रपद पूर्णिमा श्रीहरि को समर्पित है।
▪️ इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा होती है।
▪️ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना चाहिए।
भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि को हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन से पितृ पक्ष की शुरुआत भी होती है। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन स्नान-दान करने से देवताओं के साथ ही हमारे पितृ भी प्रसन्न होते हैं। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का भी विधान है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि कब है और पूर्णिमा का व्रत किस दिन रखा जाना सही होगा।
🌕 भाद्रपद पूर्णिमा
भाद्रपद पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है और इसके बाद 16 दिनों तक हम अपने पितरों को याद करते हैं, उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, दान आदि करते हैं। साल 2024 में पूर्णिमा तिथि 17 सितंबर के दिन शुरू होगी। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सुबह लगभग 11 बजकर 43 मिनट पर होगी और 18 सितंबर को सुबह 8 बजकर 5 मिनट तक पूर्णिमा तिथि व्याप्त रहेगी। क्योंकि उदयातिथि की पूर्णिमा 18 सितंबर को है इसलिए इसी दिन पूर्णिमा तिथि मानी जाएगी। हालांकि, जो लोग व्रत रखने वाले हैं, चंद्रमा की पूजा करने वाले हैं, या विष्णु-लक्ष्मी पूजन करने वाले हैं वो 17 तारीख को ये सब कार्य कर सकते हैं। वहीं स्नान-दान के लिए 18 सितंबर का दिन शुभ माना जाएगा।
❄️ रवि योग का शुभ संयोग- भाद्रपद पूर्णिमा पर रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में रवि योग को शुभ योगों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किसी भी कार्य को करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
🙇🏻‍♀️ भाद्रपद पूर्णिमा 2024 योग
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन रवि योग बन रहा है। रवि योग 17 सिंतबर सुबह 6 बजकर 7 मिनट से आरंभ होगा, जबकि इसका समापन दोपहर 1 बजकर 53 मिनट पर होगा। रवि योग में पूजा पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। साथ ही कहते हैं रवि योग में पूजा करने से सभी प्रकार के दोष भी दूर हो जाते हैं। वहीं इसी दिन धृति योग भी सुबह 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
💰 भाद्रपद पूर्णिमा स्नान-दान का शुभ मुहूर्त- पूर्णिमा के दिन रवि योग सुबह 06:06 से दोपहर 01:53 तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:39 तक रहेगा। इसके बाद विजय मुहूर्त दोपहर 02:17 से दोपहर 03:06 तक रहेगा।
📅 पूर्णिमा तिथि कब से कब तक- पूर्णिमा तिथि 17 सितंबर 2024, सुबह 11 बजकर 44 मिनट से प्रारंभ होगी और 18 सितंबर को सुबह 08 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी।
☝🏼 भाद्रपद पूर्णिमा पितृ पक्ष का हिस्सा नहीं- पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा श्राद्ध भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। पूर्णिमा तिथि पर मृत्यु प्राप्त करने वालों के लिए महालय श्राद्ध भी अमावस्या श्राद्ध तिथि पर किया जाता है। भाद्रपद पू्र्णिमा श्राद्ध पितृ पक्ष से एक दिन पहले आता है, लेकिन यह पितृ पक्ष का हिस्सा नहीं है।
🤷🏻 भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व- भाद्रपद पूर्णिमा के दिन स्‍नान दान का खास महत्‍व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु व चंद्र देव की पूजा-अर्चना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
💁🏻‍♀️ भाद्रपद पूर्णिमा पर क्‍या करें भाद्रपद पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें। इस दिन पीपल के चारों ओर परिक्रमा करने से आपके घर में सुख शांति और समृद्धि प्राप्‍त होती है। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन पितरों के नाम से आपको दान पुण्‍य भी करना चाहिए। इससे आपके घर में खुशहाली आती है। इस दिन आपको उन लोगों का श्राद्ध करना चाहिए जो लोग पूर्णिमा पर मृत्‍यु को प्राप्‍त होते हैं।
👉🏼 भाद्रपद पूर्णिमा के उपाय
🔹 अगर आप सुख-समृद्धि की कामना करते हैं तो भाद्रपद पूर्णिमा के दिन कुछ आसान उपाय आप कर सकते हैं। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से इन उपायों के बारे में।
🔹 इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से और सामर्थ्य अनुसार दान देने से पितरों और देवताओं का आशीर्वाद आपको प्राप्त होता है।
🔹 भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करने से आर्थिक समस्याओं से आपको छुटकारा मिलता है।
🔹 सत्यनारायण की कथा का पाठ करने से सुख-समृद्धि घर में बनी रहती है।
🔹 अगर आप इस दिन गाय, कुत्ता, कौआ, चींटी आदि को अन्न खिलाते हैं तो आपके जीवन की कई समस्याओं का हल आपको मिल सकता है।
🔹 इस दिन घर में गंगाजल का छिड़काव करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है।
🔹 इस दिन योग-ध्यान करने से आलौकिक अनुभव व्यक्ति को प्राप्त होते हैं।
🔹 अगर दांपत्य जीवन में परेशानियां चल रही हैं तो इस दिन पति-पत्नी को चंद्रमा को दूध का अर्घ्य देना चाहिए, ऐसा करने से दांपत्य जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं।
🔹 जो लोग अविवाहित हैं और योग्य जीवनसाथी पाना चाहते हैं वो भी इसदिन चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं और चंद्रमा का पूजन कर सकते हैं।
🔹 भाद्रपद पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ तले दीपक जलाने से आपके पितृ प्रसन्न होते हैं।
🗣️ भाद्रपद पूर्णिमा कथा

भाद्रपद पूर्णिमा के दिन उमा महेश्वर व्रत करने का भी विधान बताया गया है. धर्म शास्त्रों में इस पूर्णिमा के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. इसके साथ ही रात्रि के समय जागरण करना चाहिए. नारद पुराण और मत्स्य पुराण में इस व्रत के बारे में भी बताया गया है. इस व्रत को करने से मांगलिक सुख मिलते हैं. दांपत्य सुख प्राप्त होता है.
उमा महेश्वर व्रत के साथ ही कथा भी सुननी चाहिए. इस कथा को सुनने से व्रत का संपूर्ण फल मिलता है. कथा इस प्रकार है –
ऋषि दुर्वासा जी एक बार भगवान शिव शंकर जी के दर्शन करने उनसे मिलने कैलाश जाते हैं . कैलाश पर भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन कर वह अत्यंत प्रसन्न होते हैं. भगवान शिव, ऋषि दुर्वासा को एक पुष्प माला भेंट करते हैं जिसे दुर्वासा प्रेम से स्वीकार कर लेते हैं.
भगवान से भेंट कर लेने के पश्चात दुर्वासा वहां से आगे निकल पड़ते हैं. मार्ग में वह भगवान श्री विष्णु जी के दर्शन के लिए भी उत्सुक होते हैं ओर उनसे मिलने के लिए विष्णु लोक जाने के लिए आगे निकल पड़ते हैं लेकिन तभी उनकी भेंट इंद्र से होती है तब दुर्वाजी भगवान शिव द्वारा उन्हें प्रदान कि हुई माला वह इंद्र को भेंट दे देते हैं.
इंद्र अपने अभिमान में उस माला को अपने वाहन ऎरावत हाथी को पहना देता है. ऋषि दुर्वासा यह सब देखकर क्रोधित हो उठते हैं उन्हें यह कार्य अच्छा नही लगता है और दुर्वासा क्रोधित स्वर में इंद्र को कहते हैं कि तुमने महादेव शिव शंकर जी का अपमान किया है. इससे तुम्हें लक्ष्मी जी छोड़कर चली जायेंगी और तुम्हें इंद्र लोक और अपने सिंहासन को भी त्यागना पड़ेगा.
यह सुनकर इंद्र जी ने ऋषि दुर्वासा जी के समक्ष हाथ जोड़कर क्षमा याचना करी और इस श्राप से मुक्त होने का उपाय पूछा. इंद्र की विनय सुन कर दुर्वासा जी कुछ शांत हुए और क्रोध शांत होने पर ऋषि दुर्वासा जी ने इंद्र को बताया कि उसे उमा महेश्वर व्रत करना चाहिए. तभी वह अपने स्थान को पुन: प्राप्त हो पाएगा. तब इंद्र ने इस व्रत को किया. उमा महेश्वर व्रत के प्रभाव से लक्ष्मी जी समेत सभी वस्तुएं जो उनसे छिन गई थीं सभी की प्राप्ति होती है.

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