19 जनवरी 2026 कब से शुरू हो रही है माघ गुप्त नवरात्रि? जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और महत्व पूजा विधि एवं कथा

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
👣 19 जनवरी 2026 कब से शुरू हो रही है माघ गुप्त नवरात्रि? जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और महत्व पूजा विधि एवं कथा.
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★ माघ गुप्त नवरात्रि 2026: 19 जनवरी से शुरू होकर 27 जनवरी तक मनाई जाएगी। ★ गुप्त नवरात्रि में शक्ति साधना गुप्त रूप से की जाती है, जिसका विशेष महत्व है। ★ घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 19 जनवरी को सुबह 7:14 से 10:46 बजे तक रहेगा।
माघ गुप्त नवरात्रि में सर्वार्थसिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है।
👉🏼 हिंदू धर्म में नवरात्रि का त्योहार मां दुर्गा की आराधना का प्रतीक है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि साल में चार नवरात्रियां मनाई जाती हैं? इनमें से दो प्रमुख नवरात्रियां चैत्र और शारदीय हैं, जो पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाती हैं, लेकिन दो अन्य नवरात्रियां ‘गुप्त नवरात्रि’ के नाम से जानी जाती हैं। ये आषाढ़ और माघ मास में आती हैं और मुख्य रूप से तांत्रिक साधना, शक्ति उपासना और गुप्त पूजा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। 2026 की माघ गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू हो रही है। इस दौरान यदि भक्त विशेष रूप से एक पौराणिक कथा का पाठ हर दिन करें, तो घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है, ऐसा मान्यता है।
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। ये महाविद्याएं हैं- काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला। इनकी पूजा से सिद्धियां प्राप्त होती हैं, और विशेष कथा का पाठ करने से पारिवारिक समस्याएं दूर होती हैं। इस लेख में हम गुप्त नवरात्रि के महत्व, पूजा विधि, और विशेष रूप से व्रत कथा को विस्तार से समझेंगे। यह जानकारी धार्मिक विशेषज्ञों और पुराणों पर आधारित है, जो भक्तों के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकती है।
👀 माघ गुप्त नवरात्रि
प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ: 19 जनवरी 2026, सोमवार को सुबह 01:21 बजे.*
प्रतिपदा तिथि का समापन: 20 जनवरी 2026, मंगलवार को सुबह 02:14 बजे.* उदयातिथि के अनुसार: माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 19 जनवरी 2026 को होगा. ☸️ घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त
🥥 घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 7:14 से 10:46 बजे तक.
🌟 अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक.
👣 माघ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ
आचार्य श्री गोपी राम ने बताया कि पंचांग की गणना के अनुसार सोमवार 19 जनवरी को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग तथा मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा. मध्यान काल में शुभ अभिजीत के समय सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग रहेगा.
सर्वार्थसिद्धि योग प्रत्येक शुभ कार्य को सफल करने वाला माना गया है. इस योग में किए गए शुभ मांगलिक कार्य मनोरथ पूर्ण करते हैं. इस योग में साधना, आराधना की शुरुआत करने से यह शीघ्र फलित होती है.
💫 चार रवियोग का संयोग
आचार्य श्री गोपी राम ने बताया कि दो सर्वार्थसिद्धि व चार रवि योग का संयोग माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी पर्यंत गुप्त नवरात्रि का अनुक्रम रहता है. यह साधक और आराधकों के लिए विशेष महत्वपूर्ण होती है. इस कालखंड में चुंकी सूर्य का उत्तरायण होता है, जो शुभ मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है.
ग्रह योग की गणना भी इस बार श्रेष्ठ है जो साधना का अनुकूल और मनवांछित फल प्रदान कर सकती है. इस बार नवरात्र के नौ दिनों में दो सर्वार्थ सिद्धि योग है और चार रवि योग का संयोग बन रहा है. 19 जनवरी: कुमार योग, सर्वार्थ सिद्धि
20 जनवरी: द्विपुष्कर योग, राजयोग* 21 जनवरी: राजयोग, रवि योग*
22 जनवरी: रवि योग* 23 जनवरी: कुमार योग, रवि योग*
24 जनवरी: रवि योग* 25 जनवरी: रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि*
27 जनवरी: सर्वार्थ सिद्धि योग.
☄️ विशेष ज्योतिषीय संयोग
इस वर्ष गुप्त नवरात्रि के पहले ही दिन ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ का निर्माण हो रहा है, जो इसकी शुभता को कई गुना बढ़ा देता है। यह विशेष संयोग 19 जनवरी को दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 20 जनवरी की सुबह 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस योग के दौरान की गई कोई भी साधना, पूजा या संकल्प निश्चित रूप से सफल और फलदायी होता है।
🙇🏻♀️ गुप्त नवरात्रि में साधना
आचार्य श्री गोपी राम ने बताया कि प्रत्यक्ष नवरात्रि में मां भगवती की पूजा जहां माता के ममत्व के रूप में की जाती है तो वहीं गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा शक्ति रूप में की जाती है.
*मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में देवी साधना किसी को बता कर नहीं की जाती है. इसलिए इन दिनों को नाम ही गुप्त दिया गया है. गुप्त नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक गुप्त अनुष्ठान किये जाते हैं. इन दिनों देवी दुर्गा के दस रूपों की पूजा की जाती है.
*मान्यता है कि इन नवरात्रि में देवी साधना से शीघ्र प्रसन्न् होती हैं और मनोवांछित फल प्रदान करती हैं. जितनी अधिक गोपनीयता इस साधना की होगी उसका फल भी उतनी ही जल्दी मिलेगा. देवी के मां कालिके, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी देवी, भुनेश्वरी देवी, मां धूम्रावती, बगलामुखी माता, मातंगी माता और देवी कमला की गुप्त नवरात्रि में पूजा की जाती है मंत्र जाप, श्री दुर्गा सप्तशती, हवन के द्वारा इन दिनों देवी साधना करते हैं. यदि आप हवन आदि कर्मकांड करने में असहज हों तो नौ दिन का किसी भी तरह का संकल्प जैसे सवा लाख मंत्रों का जाप कर अनुष्ठान कर सकते हैं. या फिर राम रक्षा स्त्रोत, देवी भागवत आदि का नौ दिन का संकल्प लेकर पाठ कर सकते हैं. अखंड जोत जलाकर साधना करने से माता प्रसन्न होती हैं. 📖 गुप्त नवरात्रि की कथा पौराणिक कथा के अनुसार एक समय श्रृंगी ऋषि के पास उनके भक्त अपनी समस्याएँ और पीड़ायें लेकर आये और श्रृंगी ऋषि उनसे मिल कर उनके कष्ट सुन रहे थे। उसी समय एक औरत भीड़ से निकल कर सामने आकर रोने लगी। श्रृंगी ऋषि ने उस महिला से उसके दुख का कारण पूछा तो उसने कहा – हे ऋषिवर! मेरा पति दुर्व्यसनों में लिप्त है। वो मांसाहार करता है, जुआ खेलता है, कभी पूजा-पाठ नहीं करता और ना ही मुझे करने देता है। परंतु मैं माँ दुर्गा की भक्त हूँ और मैं उनकी भक्ति करना चाहती हूँ जिससे मेरे और मेरे परिवार के जीवन में ख़ुशियाँ आयें। *उस औरत के भक्तियुक्त वचन सुनकर श्रृंगी ऋषि अत्यंत प्रभावित हुए और उससे बोले – हे देवी! मैं तुम्हारे दुखों को दूर करने का उपाय बताता हूँ, तुम ध्यान से सुनो। एक वर्ष में चार नवरात्रि आती है। उसमें दो प्रकट (सामान्य) नवरात्रि होती है, चैत्र और शारदीय नवरात्रि जिसके विषय में सब जानते हैं। परंतु इसके अतिरिक्त वर्ष मे दो और नवरात्रि आती है उन्हे ‘गुप्त नवरात्रि’ कहते हैं। ये नवरात्रि आषाढ़ मास और माघ मास के शुक्ल पक्ष में आती है।
प्रकट (सामान्य) नवरात्रि में देवी माँ के नौ रूपों की पूजा-साधना होती है, परन्तु गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। जो भी कोई मनुष्य भक्तियुक्त चित्त से गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा की उपासना करता है माँ दुर्गा उसके जीवन के सभी दुखों को नष्ट कर देती है और उसके जीवन को सफल कर देती है। अगर कोई लोभी, मांसाहारी और पाठ-पूजा न करने वाला मनुष्य भी गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा की उपासना करें तो माँ उसके जीवन को खुशियों से भर देती है और उसे मनोवांछित फल प्रदान करती है।
श्रृंगी ऋषि बोले परंतु इस बात का अवश्य ध्यान रखना कि गुप्त नवरात्रि की पूजा का प्रचार प्रसार न करें। श्रृंगी ऋषि से ऐसी बातें सुन वो स्त्री अतिप्रसन्न हुई। और उसने श्रृंगी ऋषि के कथनानुसार पूर्ण भक्ति-भाव से गुप्त नवरात्रि में माँ दुर्गा की उपासना करी। जिससे उसके जीवन के सभी दुखों का नाश हो गया और वो अपने पति के साथ सुख से जीवन बिताने लगी।



