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षट्तिला एकादशी व्रत कब है, जानें मुहूर्त, महत्‍व और व्रत का पारण समय

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
⚜▬▬ஜ✵❀ श्री हरि: ❀✵ஜ▬▬⚜
🔮 षट्तिला एकादशी व्रत कब है, जानें मुहूर्त, महत्‍व और व्रत का पारण समय
🐚 माघ मास भगवान विष्णु का महीना माना जाता है और एकादशी की तिथि विश्वेदेवा की तिथि होती है. श्रीहरि की कृपा के साथ सारे देवताओं की कृपा का ये अद्भुत संयोग केवल षठलिता एकादशी को ही मिलता है. इस दिन दोनों की ही उपासना से मनोकामनाएं पूरी की जा सकती हैं. इस दिन कुंडली के दुर्योग भी नष्ट किए जा सकते हैं. इस बार षठतिला एकादशी का व्रत 25 जनवरी, शनिवार को रखा जाएगा।
❄️ षठतिला एकादशी शुभ मुहूर्त_
माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षठतिला एकादशी का व्रत रखा जाता है. षठतिला एकादशी की तिथि 24 जनवरी को शाम 7 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 25 जनवरी को रात 8 बजकर 31 मिनट पर होगा.
💧 षठतिला एकादशी का पारण 26 जनवरी को सुबह 7 बजकर 12 मिनट से लेकर 9 बजकर 21 मिनट तक होगा।
⚛️ षठतिला एकादशी पर ग्रहों का संयोग
षठतिला एकादशी पर चंद्रमा जल तत्व की राशि वृश्चिक में होगा, चंद्र और मंगल का संबंध भी बना रहेगा. इस दिन सूर्य उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में होगा, जिससे स्नान और दान विशेष लाभकारी होगा. इस बार के स्नान से शनि की समस्याएं कम होंगी, साथ ही कुंडली के दुर्योग भी होंगे।
💁🏻‍♀️ षटतिला एकादशी का महत्व‘षट’ का अर्थ है छः और ‘तिला’ का अर्थ है तिल. इस एकादशी में तिल का छः प्रकार से उपयोग किया जाता है, तिल का स्नान, तिल का उबटन, तिल का हवन, तिल का तर्पण, तिल का भोजन और तिल का दान. मान्यता है कि ऐसा करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में आर्थिक स्थिरता आती है और दरिद्रता दूर होती है.
🙇🏻 एकादशी के दिन इस मंत्र का करें जाप |
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।
💁🏻 षटतिला एकादशी पर क्या करें |
🔸 षटतिला एकादशी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू व्रत रखना है. इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखा जाता है.
🔸 तिल का दान: तिल का दान इस व्रत का मुख्य अंग है. तिल को काले कपड़े में बांधकर दान करना चाहिए.
🔸 भगवान विष्णु की पूजा करें. आप घर पर या मंदिर में जाकर पूजा कर सकते हैं.
🔸 विष्णु मंत्र का जाप करें. जैसे कि: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
🔸 षटतिला एकादशी की कथा सुनें.
🔸 यदि आप पूरा व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो सात्विक भोजन कर सकते हैं.
🔸 गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें.
🤷 षटतिला एकादशी पर क्या न करें |
🔹 मांसाहार: इस दिन मांसाहार से पूरी तरह परहेज करें.
🔹 प्याज और लहसुन: प्याज और लहसुन का सेवन न करें.
🔹 अनाज: अनाज का सेवन न करें.
🔹 नमक: नमक का सेवन न करें.
🔹 गुस्सा और झगड़ा: इस दिन गुस्सा नहीं करना चाहिए और किसी से झगड़ा नहीं करना चाहिए.
🔹 नकारात्मक विचार: मन में नकारात्मक विचार नहीं लाने चाहिए.
✡️ षटतिला एकादशी शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, मंत्र, व भोग-
🗣️ मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः, ॐ विष्णवे नमः
🙇🏻‍♀️ षटतिला एकादशी पूजा-विधि
▪️ स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
▪️ भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
▪️ प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
▪️ अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
▪️ मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
▪️ संभव हो तो व्रत रखें और व्रत लेने का संकल्प करें
▪️ षटतिला एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें
▪️ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
▪️ पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
▪️ प्रभु को तुलसी दल सहित भोग लगाएं
▪️ अंत में क्षमा प्रार्थना करें
🤷🏻‍♀️ भोग: फल- केला, सूखे मेवे तथा पीले मिष्ठान के साथ खीर का भोग लगा सकते हैं।
📖 षटतिला एकादशी की कथा
एक समय की बात है, एक एक ब्राह्मण की स्त्री अपने पति की मृत्यु के उपरान्त अपना सारा वक्त भगवान विष्णु की अराधना में लगा रही थी. एक बार उसने पूरे महीने भगवान विष्णु की उपासना की, परंतु दान-पुण्य ना करने से उसका सारा पुण्य अधूरा ही रह गया. ऐसा देख लक्ष्मीपति भगवान विष्णु स्वंय उसकी कुटिया में एक भिक्षुक का वेश धारणकर पहुंचे, और उन्होंने स्त्री से भिक्षा मांगी, तब उसने भिक्षुक के हाथ में एक मिट्टी का ढेला थमा दिया।
यह देख भगवान विष्णु वहां से अपने बैकुंठ वापस लौट आए. कुछ समय बाद उस स्त्री की मृत्यु हो गई, और वह लोक पहुंची, तो अपनी कुटिया खाली देख घबराकर भगवान विष्णु के पास पहुंची, और कहने लगी, हे प्रभु…मैंने पूरा जीवन आपकी पूजा उपासना की फिर भी मुझे खाली कुटिया क्यों मिली, तब भगवान विष्णु ने उसे अन्न दान ना करने और उनके हाथ पर मिट्टी का ढेला देने की बात बताइए, और कहा कि जब देव कन्या तुमसे मिलने आएं, तो तुम तभी अपना द्वार खोलना जब वह तुम्हें षटतिला एकादशी व्रत की विधि बताएं।
भगवान विष्णु के बताए अनुसार स्त्री ने ऐसा ही किया, जब देव कन्या उससे मिलने आईं, तो उसने उनसे षटतिला एकादशी के व्रत के बारे में जानकारी मांगी, और फिर पूरे विधि-विधान के साथ षटतिला एकादशी का व्रत किया, जिसके प्रभाव से उसकी कुटिया में अन्न भर गया. इसलिए ऐसी मान्यता है, कि जो भी व्यक्ति षटतिला एकादशी का व्रत कर तिल और अन्न दान करता है, उसे वैभव और मुक्ति की प्राप्ति हो जाती है।
🖌 ””सदा मुस्कुराते रहिये””

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