आज का पंचांग आज का पंचांग बुधवार, 24 जनवरी 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 24 जनवरी 2024
24 जनवरी 2024 दिन बुधवार को पौष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज भगवान श्रीसूर्यनारायण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र को छोड़कर श्रवण नक्षत्र पर (रात्रि:- 03:54 बजे) चले जाएंगे। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “श्रवण संक्रान्ति व्रत” की हार्दिक मंगलकामनाएँ।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – बुधवार पौष माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि 09:50 PM तक उपरांत पूर्णिमा
✏️ तिथि स्वामी : चतुर्दशी तिथि के देवता हैं शंकर। इस तिथि में भगवान शंकर की पूजा करने से मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों को प्राप्त कर लेता है।
💫 नक्षत्र : पुनर्वसु – पूर्ण रात्रि तक
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी गुरु बृहस्पति होता है.और राशि स्वामी बुध हैं. नक्षत्र की देवी अदिति हैं.
📢 योग – वैधृति योग 07:39 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
⚡ प्रथम करण : गर – 09:11 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 09:49 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:39:00
🌅 सर्यास्तः- सायं 05:21:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:26 ए एम से 06:20 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:53 ए एम से 07:13 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:20 पी एम से 03:03 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:51 पी एम से 06:17 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:53 पी एम से 07:13 पी एम
💧 अमृत काल : 05:41 ए एम, जनवरी 25 से 07:25 ए एम, जनवरी 25
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, जनवरी 25 से 01:00 ए एम, जनवरी 25
❄️ रवि योग : 10:41 पी एम से 07:13 ए एम, जनवरी 25
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकले।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को हरा ऊनी वस्त्र भेंट करें।
🌳 _वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : पूर्णिमा प्रारंभ रात्रि 09.49/ शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, राष्ट्रीय मूंगफली का मक्खन दिवस, राष्ट्रीय बालिका दिवस, एरोन नेविल जन्म दिवस, कैरी कून जन्म दिवस, डेवेड डिग्स जन्म दिवस, एड हेल्म्स जन्म दिवस, नील डायमंड जन्म दिवस, रे स्टीवंस जन्म दिवस, विलियम एलन यंग जन्म दिवस, जस्ट डू इट” दिवस. ग्रिज़ल्ड प्रॉस्पेक्टर डे, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जयन्ती, निर्माता-निर्देशक सुभाष घई जन्म दिवस।
✍🏼 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
🛕 Vastu tips 🏡
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में टूटे व दरार वाले बर्तनों को कभी भी जगह नहीं देनी चाहिए। ऐसे बर्तनों में खाना खाने से घर में दरिद्रता बढ़ती है जिससे कई बार कर्ज लेने तक की नौबत आ जाती है। इसलिए कभी भी टूटे या दरार वाले बर्तनों के अलावा टूटी हुई खाट का उपयोग भी नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा कर्ज और अन्य प्रकार की परेशानियों से बचने के लिये उत्तर दिशा की तरफ अष्टकोणीय, यानि आठ कोनों वाला आईना लगाना चाहिए। घर में इस तरह का आईना लगाने से बहुत से शुभ फल मिलते हैं । इसलिए अष्टकोणीय आईना जरूर लगाएं।
➡️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दूध गाय भैंस का अगर हम चाय में ले रहे हैं तो यह जहर का ही काम करता है,
इसलिए अगर चाय में दूध डालकर पीना ही है तो आप नारियल का दूध बादाम का दूध काजू का दूध डालकर पीजिए बिना गर्म किए हुए।
चाय में भी अगर चाय पत्ती डाल रहे हैं चीनी डाल रहे हैं तो यह भी बहुत बड़ा जहर है।
आप चाय बनाकर पीना चाहते हैं तो 5 ग्राम अदरक 5 ग्राम गुड 5 तुलसी का पत्ता पांच पुदीने का पत्ता दो ग्राम दालचीनी एक इलायची डालकर खौला लीजिए और इसको उतार कर इसमें नारियल का बादाम का काजू का दूध डालकर पीजिए।
आप गाय भैंस का दूध भूल जाएंगे यह सिर्फ फायदा ही फायदा करता है आपकी बॉडी के लिए शरीर के लिए बहुत लाभदायक है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
सोने से पहले सिर्फ 1 लौंग खाकर पानी पीने से कई बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। इसमें शामिल हैं:
गले में खराश: लौंग में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो गले में खराश से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।
मुंह की बदबू: लौंग में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो मुंह की बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मारने में मदद कर सकते हैं।
दर्द और सूजन: लौंग में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो दर्द और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
खांसी और सर्दी: लौंग में एंटी-वायरल और एंटी- बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो खांसी और सर्दी के लक्षणों को दूर करने में मदद कर सकते हैं।
📚 गुरु भक्ति योग 📚
परमात्मा के कई तत्व हैं, जैसे शिव तत्व, विष्णु तत्व, शक्ति तत्व इत्यादि। यहाँ हम बात कर रहे हैं शिव तत्व की, आखिर कौन हैं भगवान शिव। कैलाश पर रहते हैं वे, लेकिन क्या उतने तक ही सीमित है या हर जगह हैं वे? इस सबकी शुरुआत तब हुई जब इस सृष्टि की उत्पत्ति भी नहीं हुई थी। महाशून्य था, हर जगह अंधकार था मानो। ऐसे में परमात्मा थे। परमात्मा ने स्वयं को दो प्रकार का बना लिया पुरुष और प्रकृति। पुरुष के कई तत्व थें और प्रकृति के भी कई तत्व थें। पुरुष में शिव तत्व एक खास तत्व है। शिव तत्व और शक्ति तत्व मिलकर पूर्ण कह लाते हैं। शिव का अर्थ होता है ‘कल्याणकारी’। यह तत्व निराकार रूप में था। समय अनुसार धीरे धीरे अन्य तत्व भी सक्रिय हुए। शिव ने धीरे धीरे रूप लिया और बन गए एक ज्योति समान निराकार अग्नि स्तंभ, जिसमे से विष्णु तत्त्व अलग हुआ, विष्णु ने आकार लिया, बन गए वे महा विष्णु। उनकी नाभि के अंदर ही ब्रह्म तत्व ने आकार लिया और उनकी नाभि से बाहर आ गए। विष्णु और ब्रह्मा, दोनों एक दूसरे से मिले, ब्रह्मा के अनुसार वे श्रेष्ठ थें और विष्णु के अनुसार स्वयं विष्णु श्रेष्ठ थें। दोनों के बीच हुई इस बहस के बीच एक आवाज़ उन दोनों को सुनाई दी।
वह आवाज़ थी शिव की जो अब तक निराकार स्वरुप में थें, ब्रह्मा और विष्णु समझ गए की उनसे भी पहले कोई तत्व सक्रिय था, ब्रह्मा की उत्पति विष्णु की नाभि से हुई, विष्णु निराकार अग्नि स्तंभ से प्रकट हुए। तो प्रश्न यह उठता है कि यह अग्नि स्तंभ जिसका कोई आकार नहीं था आखिर यह क्या? लिंग समान अग्नि स्तंभ ने कुछ इस प्रकार दिख रहा था।
अग्नि स्तंभ (शिव) ने कहा- आप दोनों में से जिसे मेरा आरंभ या अंतिम चोर मिल जाएगा, वह श्रेष्ठ माना जाएगा। ब्रह्मा और विष्णु इस लिंग के अंदर चले गए, ब्रह्मा उपर कि ओर और विष्णु नीचे की ओर। दोनों में से किसी को भी इस स्तंभ का आरम्भ या अंत नहीं मिला, क्योंकि यह तो अनंत था। विष्णु भगवान ने मान लिया की उन्हें अंत नहीं मिला, लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ कहा कि उन्हें मिल गया और वे स्वयं को श्रेष्ठ बताने लगे, उनमें अहंकार आ गया। इस झूठ को सुनकर लिंग रूपी शिव तत्व को क्रोध आ गया, और उस तत्व ने साकार रूप धारण कर लिया।
लिंग रूपी भगवान शिव अब अपने महा सदाशिव रूप को धारण कर चुके थें और कुछ इस तरह, ब्रह्मा और विष्णु से कही अधिक विशाल रूप दिख रहे थे महा सदाशिव।
महा सदाशिव ने अपने विशाल रूप को छोटा करा, और सदाशिव कुछ इस तरह दिखने लगे।
◄┉┉┉┉┉┉༺✦ᱪ✦༻┉┉┉┉┉┉►
⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

