जिसके पास प्रेमधन है वह निर्धन नही हो सकता , श्रीमद्भागवत कथा मित्रता हो तो कृष्ण सुदामा जैसी

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान l उमरियापान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान सप्ताह यज्ञ का आयोजन किया गया l इस अवसर पर कथावाचक सिया वल्लभदास
वेदांती महाराज ने श्रीकृष्ण-सुदामा के आदर्श मित्रता की कथा सुनाते हुए कहा कि सुदामा से परमात्मा ने मित्रता का धर्म निभाया राजा के मित्र राजा होते हैं रंक नहीं पर परमात्मा ने कहा की मेरे भक्त जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता l कृष्ण और सुदामा दो मित्र का मिलन ही नहीं जीव व ईश्वर तथा भक्त और भगवान का मिलन था आज मनुष्य को ऐसा ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए l
कथावाचक ने कहा की श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां है। यही कारण है की आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है। द्वारपाल के मुख से पूछत दीनदयाल के धाम, बतावत आपन नाम सुदामा, सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने पहुंच गए। लोग समझ नहीं पाए की आखिर सुदामा में क्या खासियत है की भगवान खुद ही उनके स्वागत में दौड़ पड़े। श्रीकृष्ण ने स्वयं सिंहासन पर बैठाकर सुदामा के पांव पखारे। श्रीकृष्ण -सुदामा चरित्र प्रसंग पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे l
श्रीमद भागवत कथा आरती में यजजमान केशव लक्ष्मी सुलोचना असाटी, आलोक पूजा, ओंमकार, चुखखो, राजेंद्र गीता, सुनील विनीता, सुशील, शरद, विनय असाटी, सौरभ, जुगल सीमा, आकाश भगवती, उषा, नरेंद्र, नीतू, कैलाश माया, अनुभव संगम सागर, पुलकित, प्रहलाद, विनीता, अमित असाटी सहित बड़ी संख्या में नगर के श्राध्दालु गण उपस्थित रहे l



